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गाबा टेस्ट खेलना चाहता था, लेकिन... अश्विन का 5 साल बाद बड़ा खुलासा; ड्रेसिंग रूम में रवि शास्त्री के गुस्से का भी किया जिक्र

पूर्व भारतीय स्पिनर Ravichandran Ashwin ने खुलासा किया कि वह 2021 के ऐतिहासिक गाबा टेस्ट में खेलना चाहते थे, लेकिन पीठ की चोट इतनी गंभीर थी कि वह खड़े तक नहीं हो पा रहे थे। अश्विन ने उस मैच के दौरान ड्रेसिंग रूम का माहौल और तत्कालीन कोच Ravi Shastri के गुस्से भरे रिएक्शन का भी दिलचस्प किस्सा साझा किया।

ashwin on gabba test 2021 and ravi shastri
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गाबा टेस्ट 2021 पर अश्विन का बड़ा खुलासा
( Image Source:  ANI )

Ravichandran Ashwin on Gabba Test Victory: भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार टेस्ट सीरीज में से एक 2020-21 का ऑस्ट्रेलिया दौरा माना जाता है. इसी दौरे पर भारत ने तमाम मुश्किलों, चोटों और आलोचनाओं के बीच ऑस्ट्रेलिया को उसी की धरती पर 2-1 से हराकर लगातार दूसरी बार बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफी अपने नाम की थी. अब इस ऐतिहासिक जीत से जुड़ा एक दिलचस्प खुलासा पूर्व भारतीय ऑफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन ने किया है. अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास ले चुके अश्विन ने बताया कि वह ब्रिस्बेन के ऐतिहासिक गाबा टेस्ट में खेलना चाहते थे, लेकिन पीठ की गंभीर समस्या के कारण मैदान पर उतरना संभव नहीं हो सका.

क्रिकइन्फो ऑनर्स अवॉर्ड्स 2026 में बातचीत के दौरान आर अश्विन ने कहा कि गाबा टेस्ट से पहले उन्होंने खुद को फिट साबित करने की कोशिश की थी. अश्विन ने बताया कि मैच की सुबह उन्होंने मैदान का चक्कर भी लगाया, लेकिन उनकी पीठ की हालत इतनी खराब थी कि वह ठीक से खड़े तक नहीं हो पा रहे थे. ऐसे में टीम प्रबंधन और मेडिकल स्टाफ ने उन्हें खेलने का जोखिम नहीं लेने दिया. हालांकि, मैदान से बाहर रहने के बावजूद वह पूरे पांच दिन टीम के साथ रहे और खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाते रहे.

कोचिंग स्टाफ और खिलाड़ियों के बीच बने थे 'मैसेंजर'

अश्विन ने बताया कि गाबा टेस्ट के दौरान वह एक तरह से कोचिंग स्टाफ और खिलाड़ियों के बीच संदेश पहुंचाने का काम कर रहे थे. वह ड्रेसिंग रूम के माहौल को करीब से देख रहे थे और टीम के हर फैसले का हिस्सा बने हुए थे. उन्होंने कहा कि उस मुकाबले के दौरान कई ऐसे संदेश और रणनीतियां साझा की जा रही थीं, जो बेहद दिलचस्प और असाधारण थीं.

रवि शास्त्री का दिखा था गुस्सा

अश्विन ने तत्कालीन मुख्य कोच Ravi Shastri का एक दिलचस्प किस्सा भी सुनाया. उन्होंने बताया कि मैच के दौरान एक आसान कैच छूट गया था, जिससे शास्त्री बेहद नाराज हो गए. वह पानी की बोतल से घूंट लेने ही वाले थे कि अचानक गुस्से में उन्होंने बोतल को झटका देकर फेंक दिया. बोतल दीवार से टकराकर टूट गई. अश्विन के मुताबिक, उस समय ड्रेसिंग रूम का माहौल इतना तनावपूर्ण और भावनात्मक था कि हर गेंद के साथ खिलाड़ियों और सपोर्ट स्टाफ की धड़कनें बढ़ रही थीं.

36 रन पर ऑलआउट से गाबा जीत तक का सफर

यह सीरीज भारतीय क्रिकेट की सबसे बड़ी वापसी में से एक मानी जाती है. एडिलेड टेस्ट में भारत सिर्फ 36 रन पर ऑलआउट हो गया था, जो उसका सबसे कम टेस्ट स्कोर है. इसके बाद कप्तान विराट कोहली पितृत्व अवकाश के कारण भारत लौट गए. कई प्रमुख खिलाड़ी चोटिल होकर सीरीज से बाहर हो गए. ऐसे में स्टैंड-इन कप्तान अजिंक्य रहाणे ने मेलबर्न टेस्ट में शतक लगाकर भारत को शानदार जीत दिलाई और सीरीज 1-1 से बराबर कर दी. सिडनी टेस्ट में अश्विन और हनुमान विहारी ने चोटिल होने के बावजूद ऐतिहासिक संघर्ष दिखाया. दोनों बल्लेबाजों ने घंटों बल्लेबाजी कर मैच ड्रॉ कराया और ऑस्ट्रेलिया की जीत की उम्मीदों पर पानी फेर दिया.

पंत और गिल ने गाबा में रचा इतिहास

सीरीज का निर्णायक मुकाबला ब्रिस्बेन के गाबा मैदान पर खेला गया, जहां ऑस्ट्रेलिया 32 वर्षों से कोई टेस्ट नहीं हारा था, लेकिन युवा बल्लेबाज शुभमन गिल ने 91 रन और विकेटकीपर बल्लेबाज ऋषभ पंत ने नाबाद 89 रन की मैच जिताऊ पारी खेलकर भारत को 328 रन का लक्ष्य हासिल करा दिया. इस जीत के साथ भारत ने 2-1 से सीरीज अपने नाम की और ऑस्ट्रेलिया के गाबा किले को भी ढहा दिया. यह जीत आज भी भारतीय क्रिकेट इतिहास की सबसे महान टेस्ट जीतों में गिनी जाती है.

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