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क्या स्मोकिंग से भी ज्यादा खतरनाक है सोशल मीडिया, कौन हैं डेनमार्क की प्रधानमंत्री जिनके बयान ने शुरू की नई बहस?

क्या सोशल मीडिया बच्चों के लिए स्मोकिंग से भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है? इसी सवाल ने दुनिया भर में नई बहस छेड़ दी है. डेनमार्क की 48 वर्षीय प्रधानमंत्री Mette Frederiksen का एक पुराना वीडियो फिर वायरल हुआ है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर उनके छोटे बच्चे होते, तो वह उन्हें बिना निगरानी सोशल मीडिया पर छोड़ने के बजाय सिगरेट पीना पसंद करतीं.

क्या स्मोकिंग से भी ज्यादा खतरनाक है सोशल मीडिया, कौन हैं डेनमार्क की प्रधानमंत्री जिनके बयान ने शुरू की नई बहस?
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( Image Source:  ANI )

क्या कोई जिम्मेदार प्रधानमंत्री यह कह सकती है कि वह अपने बच्चों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने देने के बजाय सिगरेट पीना पसंद करेंगी? सुनने में यह बात चौंकाने वाली लग सकती है, लेकिन डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन का एक पुराना बयान एक बार फिर सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है. इस बयान ने दुनियाभर में बच्चों की डिजिटल सुरक्षा, सोशल मीडिया की लत और मानसिक स्वास्थ्य को लेकर नई बहस शुरू कर दी है.

वायरल वीडियो में फ्रेडरिक्सन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े एक सम्मेलन में बोलती नजर आती हैं. उन्होंने कहा था कि यदि आज उनके छोटे बच्चे होते, तो वह उन्हें बिना निगरानी के सोशल मीडिया पर छोड़ने के बजाय सिगरेट पीना पसंद करतीं. हालांकि उन्होंने तुरंत यह भी स्पष्ट किया कि एक प्रधानमंत्री के तौर पर ऐसा कहना उचित नहीं माना जाएगा, लेकिन उनका उद्देश्य सोशल मीडिया के बढ़ते खतरों की ओर ध्यान आकर्षित करना था.

आखिर सोशल मीडिया को लेकर इतनी चिंता क्यों जता रही हैं मेटे फ्रेडरिक्सन?

डेनमार्क की प्रधानमंत्री का मानना है कि आज के एल्गोरिदम आधारित डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों और किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल रहे हैं. उनके मुताबिक सोशल मीडिया केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि यह युवाओं के व्यवहार, आत्मविश्वास, सोचने के तरीके और सामाजिक जीवन को भी प्रभावित कर रहा है. उनका कहना है कि समाज अभी तक इस बात को पूरी तरह समझ नहीं पाया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों के विकास पर कितना बड़ा असर डाल सकते हैं.

क्या डेनमार्क सोशल मीडिया पर सख्त नियम लाने जा रहा है?

फ्रेडरिक्सन का यह बयान ऐसे समय में चर्चा में आया है जब डेनमार्क बच्चों के लिए सोशल मीडिया नियमों को और कड़ा बनाने पर विचार कर रहा है. प्रस्तावित नियमों के तहत 15 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की संभावना पर चर्चा चल रही है. वहीं 13 से 14 वर्ष की आयु के किशोरों के लिए माता-पिता की अनुमति को अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव भी सामने आया है. सरकार का तर्क है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए नए जोखिम पैदा कर रहे हैं, जिनसे निपटने के लिए कानूनों को अपडेट करना जरूरी हो गया है.

सोशल मीडिया बनाम स्मोकिंग, लोग क्यों बंट गए दो हिस्सों में?

प्रधानमंत्री की तुलना ने इंटरनेट पर तीखी बहस छेड़ दी है. एक वर्ग का मानना है कि सोशल मीडिया की तुलना सिगरेट से करना गलत है क्योंकि तंबाकू का सेवन सीधे स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाता है, जबकि सोशल मीडिया का जिम्मेदारी और सीमित उपयोग फायदेमंद भी हो सकता है.

दूसरी तरफ कई विशेषज्ञ और अभिभावक फ्रेडरिक्सन की चिंता को सही मानते हैं. उनका कहना है कि सोशल मीडिया की लत, साइबर बुलिंग, फेक कंटेंट, डिप्रेशन और आत्मसम्मान से जुड़ी समस्याएं बच्चों और किशोरों के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही हैं.

कौन हैं मेटे फ्रेडरिक्सन?

Mette Frederiksen का जन्म 19 नवंबर 1977 को हुआ था. वह जून 2019 से डेनमार्क की प्रधानमंत्री हैं और देश के इतिहास में इस पद तक पहुंचने वाली दूसरी महिला प्रधानमंत्री हैं. इसके साथ ही वह डेनमार्क की सबसे कम उम्र की प्रधानमंत्री भी मानी जाती हैं. दिसंबर 2021 में वह यूरोपीय संघ में सबसे लंबे समय तक लगातार सेवा देने वाली महिला सरकार प्रमुख बन गई थीं.

क्या सच में सोशल मीडिया नया सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट बन रहा है?

मेटे फ्रेडरिक्सन का बयान भले ही विवादित हो, लेकिन इसने एक अहम सवाल जरूर खड़ा कर दिया है. क्या सोशल मीडिया का अनियंत्रित इस्तेमाल आने वाली पीढ़ियों के लिए उतना ही बड़ा खतरा बन सकता है जितना कभी धूम्रपान को माना जाता था? इस सवाल का जवाब अभी पूरी दुनिया तलाश रही है. लेकिन इतना तय है कि बच्चों की डिजिटल सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य आने वाले वर्षों में वैश्विक नीति निर्माताओं के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक होने वाला है.

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