Explainer: शमी-चहल से लेकर अभिषेक-वरुण तक, अगरकर के कार्यकाल में किसका करियर चमका और किसकी जगह हुई खत्म?
अजित अगरकर का तीन साल के कार्यकाल के दौरान कई खिलाड़ियों के करियर की दिशा तेजी से बदली. मोहम्मद शमी और युजवेंद्र चहल जैसे अनुभवी खिलाड़ियों की जगह कम हुई, जबकि अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती और तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ियों ने टीम में अपनी मजबूत जगह बनाई.
Ajit Agarkar
अजित अगरकर का भारतीय क्रिकेट टीम के मुख्य चयनकर्ता के तौर पर कार्यकाल अब अपने अंतिम पड़ाव पर दिखाई दे रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगरकर ने BCCI को बता दिया है कि वह मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद इस पद पर आगे नहीं रहना चाहते. उनका कार्यकाल 4 अक्टूबर को समाप्त होना है. हालांकि, BCCI की ओर से अभी उनके जाने की औपचारिक घोषणा नहीं हुई है.
अगरकर ने जुलाई 2023 में मुख्य चयनकर्ता की जिम्मेदारी संभाली थी. इसके बाद भारतीय टीम ने 2023 वनडे वर्ल्ड कप का फाइनल खेला, 2024 टी20 वर्ल्ड कप जीता, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी अपने नाम की और 2026 में एक बार फिर टी20 वर्ल्ड कप जीतकर खिताब बरकरार रखा... लेकिन किसी चयनकर्ता के कार्यकाल को सिर्फ ट्रॉफियों की संख्या से समझना पूरी तस्वीर नहीं बताता.
असली कहानी यह है कि इस दौरान किस खिलाड़ी का टीम में भरोसा बढ़ा, किसे लगातार मौके मिले, किसका करियर ठहर गया और किस खिलाड़ी को लंबे अंतराल के बाद दोबारा टीम में जगह मिली... इसी बदलाव को समझने के लिए Hindustan Times ने एक डेटा आधारित पैमाना इस्तेमाल किया है- India Career Value Index यानी ICVI.
क्या है ICVI?
ICVI को 100 अंकों के पैमाने पर बनाया गया है. इसमें चार मुख्य चीजों को देखा गया है;
- 40 अंक: भारतीय टीम के साथ खिलाड़ी की भागीदारी
- 30 अंक: अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन
- 20 अंक: ICC टूर्नामेंट में चयन और भरोसा
- 10 अंक: केंद्रीय अनुबंध और नेतृत्व जैसी संस्थागत भूमिका
यह स्कोर किसी खिलाड़ी की प्रतिभा का फैसला नहीं करता और न ही यह बताता है कि चयन सही था या गलत. इसका मकसद सिर्फ यह देखना है कि किसी खास समय में खिलाड़ी भारतीय टीम के ढांचे में कितना महत्वपूर्ण और स्थायी हिस्सा था. यानी किसी खिलाड़ी का ICVI गिरना यह जरूरी नहीं बताता कि वह खराब खिलाड़ी बन गया. इसी तरह किसी खिलाड़ी का स्कोर बढ़ना सिर्फ प्रतिभा की वजह से नहीं, बल्कि लगातार चयन, भूमिका और टीम के भरोसे का नतीजा भी हो सकता है.
सबसे बड़ी गिरावट: शमी, चहल और गायकवाड़
1- मोहम्मद शमी: 98 से सीधे 0
- अगरकर के दौर में सबसे बड़ा नकारात्मक बदलाव मोहम्मद शमी के मामले में दिखाई देता है. शमी का ICVI एक समय 98 तक पहुंचा था. वह भारत की वनडे योजनाओं के अहम हिस्से थे, उनके पास Grade A केंद्रीय अनुबंध था और उन्होंने दो बड़े ICC टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन किया था.
- 2023 वनडे वर्ल्ड कप में शमी ने सिर्फ सात मैच खेले, लेकिन 24 विकेट लेकर टूर्नामेंट के सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने. खास बात यह थी कि उन्होंने भारत के शुरुआती चार मैच नहीं खेले थे. इसके बावजूद बाद में उन्होंने ऐसा प्रदर्शन किया कि टीम की गेंदबाजी के सबसे भरोसेमंद नामों में शामिल हो गए.
- 2025 चैंपियंस ट्रॉफी में चोट से वापसी के बाद भी शमी ने अपना प्रभाव बनाए रखा. उन्होंने पांच मैचों में 9 विकेट लिए और ICC की Team of the Tournament में जगह बनाई.
- ICC के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक इस टूर्नामेंट में उनके नौ विकेट थे और उन्होंने बांग्लादेश के खिलाफ 5/53 का प्रदर्शन भी किया, लेकिन चैंपियंस ट्रॉफी फाइनल के बाद मार्च 2025 से शमी भारत के लिए नहीं खेले हैं.
- इस दौरान घरेलू क्रिकेट में उनका प्रदर्शन भी कमजोर नहीं रहा. 2025-26 रणजी सीजन में उन्होंने 37 विकेट 16.72 की औसत से लिए और सीजन की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी में 8/90 का प्रदर्शन भी किया.
- इसके बावजूद वह भारतीय टीम की योजनाओं से बाहर रहे. उनके केंद्रीय अनुबंध की स्थिति भी बदली- 2024-25 में Grade A से 2025-26 में वह केंद्रीय अनुबंध सूची से बाहर हो गए.
- इसलिए ICVI में शमी का सफर 98 से 0 तक पहुंचता है. यह इस बात का उदाहरण है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थापित खिलाड़ी भी चयन प्रक्रिया में कितनी तेजी से टीम के केंद्र से बाहर हो सकता है.
2- युजवेंद्र चहल: सक्रिय भारतीय खिलाड़ी से अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से बाहर
युजवेंद्र चहल की कहानी कुछ अलग है. जब अगरकर ने पद संभाला, तब चहल भारत के सक्रिय टी20 गेंदबाज थे. अगस्त 2023 में वेस्टइंडीज के खिलाफ पांच मैचों की टी20 सीरीज में उन्होंने सभी पांच मुकाबले खेले और पांच विकेट लिए. उस समय तक उनके नाम 80 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 96 विकेट और 72 वनडे में 121 विकेट थे, लेकिन उस सीरीज का आखिरी मुकाबला 13 अगस्त 2023 को खेला गया और वही अब तक चहल का आखिरी अंतरराष्ट्रीय मैच बना हुआ है. इसके बाद वह 2023 वनडे वर्ल्ड कप से बाहर रहे. 2024 टी20 वर्ल्ड कप के लिए टीम में चुने गए, लेकिन उन्हें एक भी मैच खेलने का मौका नहीं मिला. इसके बाद वह फिर टीम से बाहर हो गए.
अगरकर ने 2023 एशिया कप के समय चहल के चयन को लेकर बताया था कि अक्षर पटेल की बल्लेबाजी उपयोगिता और कुलदीप यादव की स्थिति ने चयन को प्रभावित किया था. यानी चहल का मामला प्रदर्शन में अचानक गिरावट से ज्यादा टीम की रणनीति और भूमिका में बदलाव का उदाहरण बन गया. उनका ICVI अगरकर के शुरुआती दौर के 43 से घटकर अब 0 बताया गया है.
2- ऋतुराज गायकवाड़: प्रदर्शन रहा, लेकिन मौके कम होते गए
ऋतुराज गायकवाड़ की कहानी इसलिए दिलचस्प है क्योंकि यहां आंकड़े यह नहीं बताते कि खिलाड़ी का प्रदर्शन अचानक खराब हो गया था. 2023 और 2024 में उनके टी20 अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को देखें तो गायकवाड़ ने 498 रन 62.25 की औसत और 150 के स्ट्राइक रेट से बनाए. ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2023 की टी20 सीरीज में उन्होंने 223 रन बनाए. उनका औसत 55.75 और स्ट्राइक रेट 159.28 रहा.
जिम्बाब्वे के खिलाफ आखिरी टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज में भी गायकवाड़ का प्रदर्शन ऐसा नहीं था कि इसे पूरी तरह विफल कहा जाए. फिर भी उनका आखिरी टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच 13 जुलाई 2024 को आया. गायकवाड़ अभी पूरी तरह भारतीय क्रिकेट से बाहर नहीं हैं. वह Grade C केंद्रीय अनुबंध में हैं और वनडे टीम में भी वापस आए हैं, लेकिन टी20 में उनकी स्थिति पहले जैसी नहीं रही. इसलिए उनका ICVI अपने 65 के पीक से घटकर 23 पर आता है.
दूसरी तरफ पूरी तरह उलटी कहानी: अभिषेक, वरुण और तिलक
अगर शमी, चहल और गायकवाड़ गिरते ग्राफ का उदाहरण हैं, तो दूसरी तरफ अभिषेक शर्मा, वरुण चक्रवर्ती और तिलक वर्मा इस दौर में सबसे बड़ी बढ़त लेने वाले नामों में हैं.
अभिषेक शर्मा: शून्य से 93 तक
- अगरकर के आने के समय अभिषेक शर्मा ने भारत के लिए एक भी अंतरराष्ट्रीय मैच नहीं खेला था. यानी उनका शुरुआती ICVI 0 था. अब तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है.
- सितंबर 2026 तक अभिषेक 59 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 1,858 रन बना चुके हैं. उनका स्ट्राइक रेट 194.55 है, जबकि उनके नाम तीन शतक और 12 अर्धशतक हैं.
- हालिया अफगानिस्तान सीरीज में तो उन्होंने एक और बड़ा रिकॉर्ड बनाया. दिल्ली में खेले गए तीसरे टी20 में अभिषेक ने सिर्फ 30 गेंदों में शतक पूरा किया और 34 गेंदों पर 108 रन बनाए. यह किसी भारतीय बल्लेबाज का टी20 अंतरराष्ट्रीय में सबसे तेज शतक है.
- यही नहीं, BCCI के मुताबिक इस पारी के साथ उन्होंने अफगानिस्तान के खिलाफ पूरी सीरीज में 229 रन बनाए और 22 छक्के लगाए.
- यानी अगरकर के कार्यकाल में जिस तरह के आक्रामक टी20 बल्लेबाज को लगातार मौका दिया गया, अभिषेक उसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं. उनका ICVI 0 से बढ़कर 93 तक पहुंच गया है.
वरुण चक्रवर्ती: 1,066 दिन बाद वापसी और फिर टीम के केंद्र में
वरुण चक्रवर्ती की कहानी शायद इस पूरे बदलाव की सबसे दिलचस्प मिसाल है. एक समय उनका अंतरराष्ट्रीय करियर लगभग खत्म माना जा रहा था. भारत के लिए शुरुआती छह टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में उनके नाम सिर्फ दो विकेट थे. इसके बाद वह करीब 1,066 दिन तक भारतीय टीम से बाहर रहे, लेकिन अक्टूबर 2024 में उन्हें फिर मौका मिला. इसके बाद कहानी तेजी से बदली.
2025 चैंपियंस ट्रॉफी में वरुण ने तीन मैचों में 9 विकेट लिए. उनका औसत 15.1 और इकॉनमी 4.53 रही. ICC ने उन्हें टूर्नामेंट की Team of the Tournament में भी शामिल किया. 2026 टी20 वर्ल्ड कप में भी उनका प्रदर्शन प्रभावशाली रहा. वह जसप्रीत बुमराह के साथ टूर्नामेंट के संयुक्त सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज रहे. दोनों के नाम 14-14 विकेट थे. इस सफर में वरुण बिना केंद्रीय अनुबंध वाले खिलाड़ी से Grade C अनुबंध तक पहुंचे और सफेद गेंद की टीम में प्रमुख स्पिन विकल्प बन गए. इसलिए उनका ICVI भी 0 से 93 तक पहुंचता है.
तिलक वर्मा: टीम में जगह से नेतृत्व तक
तिलक वर्मा जब अगरकर ने पद संभाला, तब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नए थे. उन्हें अगरकर के कार्यकाल में घोषित पहली टीम में ही टी20 अंतरराष्ट्रीय का कॉल-अप मिला. तीन साल बाद उनकी भूमिका सिर्फ टीम में बने रहने तक सीमित नहीं है. तिलक के नाम 1,645 टी20 अंतरराष्ट्रीय रन, 44.45 की औसत और 145.18 का स्ट्राइक रेट है. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ लगातार शतक, 2026 टी20 वर्ल्ड कप में 207 रन और 2025 एशिया कप फाइनल में नाबाद 69 रन ने उनकी भूमिका को और मजबूत किया.
अब वह भारत के टी20I उप-कप्तान हैं और Grade C केंद्रीय अनुबंध में भी हैं. इसलिए उनका ICVI 0 से 84 तक पहुंचता है. यहां बदलाव सिर्फ आंकड़ों का नहीं है- एक अनकैप्ड खिलाड़ी धीरे-धीरे टीम की लीडरशिप कोर का हिस्सा बन गया.
संजू सैमसन और ईशान किशन: बीच की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं
इन छह नामों के अलावा दो खिलाड़ियों की कहानी भी अगरकर के दौर को समझने में मदद करती है. संजू सैमसन ने लंबे समय तक भारतीय टीम में अंदर-बाहर होने के बाद 2024 में टी20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में तीन शतक लगाए. इसके बाद 2026 टी20 वर्ल्ड कप में उन्होंने पांच पारियों में 321 रन, 80.25 की औसत और 199.37 के स्ट्राइक रेट से बनाए और Player of the Tournament बने.
ईशान किशन का सफर और भी उतार-चढ़ाव वाला रहा. वह भारतीय टीम की योजनाओं से बाहर हुए, केंद्रीय अनुबंध भी गंवाया, लेकिन बाद में जोरदार वापसी करते हुए 2026 की भारतीय टीम में अहम भूमिका तक पहुंचे. यानी इस दौर में सिर्फ 'कौन अंदर आया और कौन बाहर गया' की कहानी नहीं है. कई खिलाड़ियों के करियर में गिरावट, इंतजार और फिर वापसी, तीनों चरण देखने को मिले.
अगरकर के तीन साल को कैसे समझें?
अगरकर के कार्यकाल को सिर्फ इस आधार पर देखना कि भारत ने कितनी ट्रॉफियां जीतीं, तो कहानी अधूरी रह जाएगी. इस दौरान चयन व्यवस्था में खिलाड़ियों की स्थिति तेजी से बदली. शमी और चहल जैसे स्थापित नाम टीम के केंद्र से बाहर चले गए. गायकवाड़ जैसे खिलाड़ी का प्रदर्शन मजबूत रहने के बावजूद टी20 में स्थान कमजोर हुआ. वहीं अभिषेक शर्मा और तिलक वर्मा जैसे युवा खिलाड़ी टीम की नई पीढ़ी का हिस्सा बने... और वरुण चक्रवर्ती ने लंबे अंतराल के बाद वापसी करके खुद को फिर से प्रमुख खिलाड़ी के रूप में स्थापित किया.
यही ICVI की असली कहानी है. यह यह नहीं बताता कि कौन बेहतर क्रिकेटर है या किसका चयन सही था. यह सिर्फ यह दिखाता है कि अगरकर के कार्यकाल में भारतीय क्रिकेट के भीतर भरोसा, मौके, भूमिका और टीम में जगह का संतुलन कितनी तेजी से बदला. .. और शायद अगरकर के कार्यकाल की सबसे बड़ी विरासत भी यही होगी- एक तरफ स्थापित खिलाड़ियों के लिए जगह बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा, तो दूसरी तरफ नए और अलग तरह के खिलाड़ियों को टीम के केंद्र तक पहुंचने के मौके मिले.




