क्या भगवान शिव की पूजा करने वालों का अगला जन्म कुत्ते का होता है? प्रेमानंद महाराज ने बताई सच्चाई
धार्मिक कथाओं और पुरानी मान्यताओं को लेकर अक्सर लोगों के मन में सवाल उठते रहते हैं. हाल ही में एक ऐसा ही चौंकाने वाला सवाल सामने आया कि क्या सच में भगवान शिव की पूजा करने वालों का अगला जन्म कुत्ते के रूप में होता है. इस सवाल पर प्रेमानंद महाराज ने बताया कि आखिर सच क्या है.
धार्मिक कथाओं को लेकर लोगों के मन में अक्सर कई तरह के सवाल उठते हैं. ऐसा ही एक सवाल हाल ही में शिव भक्ति से जुड़े एक व्यक्ति ने प्रसिद्ध संत प्रेमानंद महाराज से पूछा. सवाल सुनने में चौंकाने वाला था. क्या सच में शिव मंदिर के पुजारी को अगले जन्म में कुत्ते का जन्म मिलता है? यह बात कहां से आई और इसके पीछे की कथा क्या है?
इस प्रश्न के जवाब में प्रेमानंद महाराज ने किसी अफवाह या डर की नहीं, बल्कि वाल्मीकि रामायण से जुड़ी एक गूढ़ कथा का उल्लेख करते हुए पूरे विषय को बेहद सरल शब्दों में समझाया.
ब्राह्मण और कुत्ते की कथा
प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि यह धारणा यूं ही नहीं बनी, बल्कि इसके पीछे एक प्राचीन कथा है. यह कथा वाल्मीकि रामायण में वर्णित है और इसका संबंध कर्म, आचरण और जिम्मेदारी से है, न कि शिव भक्ति को नीचा दिखाने से. कथा के अनुसार, एक बार एक ब्राह्मण भिक्षा मांगने निकले. पूरा दिन बीत गया, लेकिन उन्हें कहीं से कुछ भी प्राप्त नहीं हुआ. निराश होकर जब वे घर लौट रहे थे, तो रास्ते में एक कुत्ता बैठा मिला. बिना किसी कारण के ब्राह्मण ने अपने डंडे से उस कुत्ते को मार दिया.
भगवान श्रीराम तक पहुंची फरियाद
पीड़ा से व्यथित कुत्ता सीधे भगवान श्रीराम के पास पहुंचा और अपनी व्यथा सुनाई. उसने कहा कि उसने ब्राह्मण का कोई नुकसान नहीं किया था, फिर भी उसे मारा गया. उसने न्याय की मांग की और ब्राह्मण को दंड देने की प्रार्थना की. भगवान श्रीराम ने कहा कि रघुवंश की परंपरा में ब्राह्मण को दंड देने की व्यवस्था नहीं है. ऐसे में उन्होंने कुत्ते से ही कोई उपाय सुझाने को कहा. यह सुनकर कुत्ते ने जो मांग रखी, उसने सभी को चौंका दिया.
क्यों शिव की पूजा करने वाले को मिलता है कुत्ते का जन्म?
कुत्ते ने कहा कि ब्राह्मण को शिव मंदिर का पुजारी बना दिया जाए. श्रीराम को यह सुनकर आश्चर्य हुआ और उन्होंने इसका कारण पूछा. तब कुत्ते ने अपने पिछले जन्म का रहस्य बताया. कुत्ते ने कहा कि वह स्वयं अपने पिछले जन्म में एक शिव मंदिर का पुजारी था. लेकिन उसने पूजा-पाठ में नियमों का पालन नहीं किया. भगवान को अर्पित किए जाने वाले प्रसाद और वस्तुओं का मनमाना उपयोग किया. इसी गलत आचरण के कारण उसे कुत्ते की योनि मिली.
कथा का असली संदेश क्या है?
प्रेमानंद महाराज समझाते हैं कि इस कथा का मतलब यह नहीं है कि शिव की पूजा करने वाला कुत्ता बनता है. इसका असली संदेश यह है कि कोई भी पद, चाहे वह कितना ही पवित्र क्यों न हो, अगर उसका दुरुपयोग किया जाए तो उसके परिणाम भुगतने पड़ते हैं.





