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कुंडली में कैसे बनता है कालसर्प दोष, जानिए इसका प्रभाव और ज्योतिषीय उपाय

कुंडली में कालसर्प दोष तब बनता है जब सभी ग्रह राहु और केतु के बीच फंस जाते हैं. इसे जन्मकुंडली का एक महत्वपूर्ण दोष माना जाता है, जो व्यक्ति के जीवन में उतार-चढ़ाव, मानसिक तनाव और बाधाओं का कारण बन सकता है.

kaal sarp dosh
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( Image Source:  AI SORA )
State Mirror Astro
By: State Mirror Astro3 Mins Read

Updated on: 24 Feb 2026 6:30 AM IST

अक्सर लोग कालसर्प योग का नाम सुनते ही घबरा जाते हैं और उनके मन में तरह-तरह के डर पैदा होने लगता है. वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी व्यक्ति का जन्म होता है तो उसी समय व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों और नक्षत्रों की शुभ-अशुभ स्थिति अंकित हो जाती है. कुंडली में कुछ ग्रहों के निर्माण से शुभ योगों का निर्माण होता है, वहीं अशुभ ग्रहों के संयोग से अशुभ योगों का निर्माण होता है.

आज हम आपको कुंडली में बनने वाले कालसर्प योग के बारे में बताने जा रहे हैं. वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार यह योग राहु और केतु के द्वारा बनाया जाता है. जब भी किसी जातक की कुंडली में कालसर्प दोष बनता है तो व्यक्ति के जीवन में संघर्ष, धन हानि और कार्यों में बाधाएं आती हैं. आइए जानते हैं कुंडली में कैसे बनता है कालसर्प दोष और इसके प्रभाव से बचने के उपाय.

कुंडली में कैसे बनता है कालसर्प दोष

वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब किसी व्यक्ति की कुंडली में राहु-केतु के बीच सभी ग्रह आ जाते हैं तो कालसर्प दोष नाम का एक अशुभ योग बन जाता है. कालसर्प दोष कई तरह के होते हैं.

  • अनंत कालसर्प दोष तब बनता है जब कुंडली कुंडली के पहले भाव में राहु और सातवें भाव में केतु हो. इससे विवाह में अड़चनें आती हैं.
  • जब कुंडली के दूसरे भाव में राहु और आठवें भाव मे केतु हो तो कुलिक कालसर्प दोष बनता है. इससे व्यक्ति को शारीरिक कष्ट पहुंचते हैं.
  • कुंडली के तीसरे भाव में राहु और नवम भाव में केतु स्थित हो तो वासुकि कालसर्प दोष बनाता है. इससे कई तरह की परेशानियां आती है.
  • कुंडली के चौथे भाव में राहु और दशम भाव में केतु हो तो शंखपाल कालसर्प दोष बनता है. इससे व्यक्ति बुरे कामों में लिप्त रहता है.
  • कुंडली के पंचम भाव में राहु और ग्याहरवें भाव में केतु हो तो पदम कालसर्प दोष का निर्माण होता है. इससे संतान संबंधी परेशानियां होती है.
  • इस तरह से महापदम, तक्षक, कर्कोटक, शंखचूड़, घातक, विषधर, शेषनाग आदि काल सर्पदोष बनते हैं. इससे जीवन में कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.

किन लोगों के लिए कालसर्प दोष भाग्यशाली?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, हमेशा कालसर्प दोष कष्टकारी ही नहीं होता बल्कि भाग्यशाली भी होता है. कुंडली में जब राहु अपनी उच्च राशि वृषभ या मिथुन में होता है. ऐसे तो लोग राहु की दशा में जीवन में खूब सफलता प्राप्त होते हैं. इसके अलावा जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष के साथ-साथ कुंडली में गुरु और चंद्रमा एक दूसरे से केंद्र में होते हैं या फिर साथ बैठे हो तो व्यक्ति करियर कारोबार में तरक्की पाता है.

कालसर्प दोष के क्या हैं उपाय

जिन लोगों की कुंडली में कालसर्प दोष होता है उनको सर्प मंत्र और सर्प गायत्री मंत्र का जाप करना शुभ होता है. इसके अलावा भैरव देव की उपासना भी बहुत ही फलदायी माना जाता है. वहीं महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना भी फलदायी होता है.

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