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Holashtak 2026: क्या है होलाष्टक से जुड़ी कथा, आखिर क्यों 8 दिन तक रुक जाते हैं सारे शुभ काम?

फाल्गुन महीने में होली से पहले पड़ने वाले आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है. मान्यता है कि इस दौरान ग्रहों की स्थिति अशुभ मानी जाती है, इसलिए विवाह, गृह प्रवेश और अन्य मांगलिक कार्य रोक दिए जाते हैं.

Holashtak 2026
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( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 17 Feb 2026 1:01 PM IST

हिंदू धर्म में होलाष्टक को शुभ नहीं माना जाता है. होली से ठीक पहले आने वाले आठ दिनों को होलाष्टक कहा जाता है. इसलिए इन दिनों कोई भी मांगलिक कार्य करने की मनाही होती है, क्योंकि वातावरण में अस्थिरता और नकारात्मकता बढ़ जाती है, इसलिए नए और शुभ काम टाल दिए जाते हैं.

इस साल 24 फरवरी 2026 से होलाष्टक शुरू होगा और फाल्गुन पूर्णिमा यानी होलिका दहन तक चलेंगे. चलिए ऐसे में जानते हैं होलाष्टक से जुड़ी पौराणिक कथा और इन दिनों क्या करना चाहिए.

क्या है होलाष्टक से जुड़ी पौराणिक कथा?

होलाष्टक की जड़ें भक्त प्रह्लाद और असुरराज हिरण्यकश्यप की प्रसिद्ध पौराणिक गाथा में मिलती हैं. कहा जाता है कि हिरण्यकश्यप ने स्वयं को ही सर्वोच्च ईश्वर घोषित कर दिया था, जबकि उसका पुत्र प्रह्लाद अटूट श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु की उपासना करता था. पुत्र की इस अडिग आस्था से क्रुद्ध होकर उसने उसे लगातार आठ दिनों तक कठोर यातनाएं दीं. मान्यता है कि वही आठ कठिन दिन आगे चलकर होलाष्टक के नाम से जाने गए. यह घटना संदेश देती है कि अटूट विश्वास और सच्ची साधना के सामने हर विपत्ति छोटी पड़ जाती है. इसी कारण इन आठ दिनों को शुभ कार्यों से विराम लेकर मनन, संयम और आध्यात्मिक साधना के लिए उपयुक्त समय माना जाता है.

क्यों नहीं किए जाते मांगलिक कार्य?

  • धार्मिक मान्यताओं के अनुसार होलाष्टक के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण, जनेऊ जैसे 16 संस्कार और अन्य शुभ कार्य नहीं किए जाते.
  • नया व्यापार शुरू करना, हवन या बड़ा धार्मिक अनुष्ठान करना भी टालने की सलाह दी जाती है. ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में ग्रहों की स्थिति थोड़ी उग्र होती है, जिससे नए कार्यों में रुकावट आ सकती है. इसलिए लोग शुभ काम होलाष्टक के बाद करना पसंद करते हैं.
  • परंपरा के अनुसार, जिन कन्याओं की हाल ही में शादी हुई हो, वे इन दिनों अपने मायके में रहती हैं. साथ ही, अनजान लोगों से खाने-पीने की चीजें लेने से भी बचने की सलाह दी जाती है.

होलाष्टक में क्या करें?

इन आठ दिनों को नकारात्मक नहीं, बल्कि सकारात्मक रूप से भी लिया जा सकता है.

  • होलाष्टक के दौरान रोजाना पूजा-पाठ और मंत्र जाप करने से जीवन में सुख-शांति आती है.
  • इन दिनों में खासतौर पर भगवान विष्णु या अपने इष्ट देव का ध्यान करने से लाभ मिलेगा.
  • आठ दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या धन का दान करना फलदायक माना जाता है.
  • घर में शांति और साफ-सफाई बनाए रखें.
धर्म
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