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डायबिटीज़ मरीजों के लिए बड़ी खबर, दवा से भी ज्यादा असर करती है कॉफी, नई रिसर्च ने उड़ाए होश

ताज़ा वैज्ञानिक रिसर्च ने कॉफी को लेकर एक ऐसा दावा किया है, जिसने डायबिटीज़ की दुनिया में नई बहस छेड़ दी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि एक आम कप कॉफी, टाइप-2 डायबिटीज़ में इस्तेमाल होने वाली एक दवा जितनी असरदार साबित हो सकती है. आइए,

डायबिटीज़ मरीजों के लिए बड़ी खबर, दवा से भी ज्यादा असर करती है कॉफी, नई रिसर्च ने उड़ाए होश
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( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 14 Jan 2026 5:00 PM IST

अब तक ब्लड शुगर कंट्रोल के लिए जिन दवाओं पर भरोसा किया जाता था, उन्हीं को चुनौती देती हुई एक नई वैज्ञानिक रिसर्च चर्चा में है. इस रिसर्च के मुताबिक, एक आम कप कॉफी में मौजूद कुछ प्राकृतिक तत्व शरीर में उसी तरह काम कर सकते हैं जैसे डायबिटीज़ की दवाएं करती हैं, जिससे खाना खाने के बाद शुगर लेवल तेजी से नहीं बढ़ता.

रिसर्च के इस दावे ने मेडिकल और हेल्थ वर्ल्ड में हलचल मचा दी है. वैज्ञानिकों का कहना है कि कॉफी में पाए गए खास कंपाउंड्स ब्लड शुगर को कंट्रोल करने वाले एंज़ाइम पर असर डालते हैं, जो टाइप-2 डायबिटीज़ के मरीजों के लिए भविष्य में नए और नेचुरल इलाज का रास्ता खोल सकते हैं. हालांकि, एक्सपर्ट्स यह भी सलाह दे रहे हैं कि दवा छोड़ने से पहले डॉक्टर की सलाह बेहद ज़रूरी है.

कॉफी और ब्लड शुगर का कनेक्शन

डेली मेली में छपी, रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक कॉफी को ज़्यादातर लोग एनर्जी ड्रिंक या आदत के तौर पर देखते थे. लेकिन वैज्ञानिकों ने जब रोस्टेड अरबिका कॉफी में मौजूद तत्वों को गहराई से परखा, तो चौंकाने वाला सच सामने आया. रिसर्च में पाया गया कि कॉफी के कुछ खास कंपाउंड्स शरीर में उसी एंज़ाइम पर असर डालते हैं, जिस पर टाइप-2 डायबिटीज़ की दवा Acarbose काम करती है.

दवा जैसा असर कैसे करती है कॉफी?

दरअसल, हमारा शरीर खाना खाने के बाद कार्बोहाइड्रेट्स को तोड़कर ग्लूकोज़ में बदलता है. इस प्रक्रिया में alpha-glucosidase नाम का एंज़ाइम अहम भूमिका निभाता है. Acarbose जैसी दवाएं इसी एंज़ाइम को धीमा कर देती हैं, जिससे ब्लड शुगर अचानक नहीं बढ़ता. रिसर्च में सामने आया कि कॉफी में मौजूद कुछ नैचुरल कंपाउंड्स भी बिल्कुल यही काम करते हैं- यानी खाना खाने के बाद शुगर स्पाइक्स को कम करना.

तीन नए कंपाउंड्स की खोज

जर्नल Beverage Plant Research में प्रकाशित इस स्टडी में वैज्ञानिकों ने तीन बिल्कुल नए कंपाउंड्स की पहचान की, जिन्हें नाम दिया गया-Caffaldehydes A, B, और C. तीन-स्टेप एक्सट्रैक्शन प्रोसेस से निकाले गए इन कंपाउंड्स ने alpha-glucosidase को प्रभावी तरीके से रोकने की क्षमता दिखाई.

क्या है टाइप-2 डायबिटीज़?

टाइप-2 डायबिटीज़ तब होती है जब शरीर पर्याप्त इंसुलिन नहीं बना पाता या फिर इंसुलिन का सही इस्तेमाल नहीं कर पाता. नतीजा खून में शुगर का बढ़ना. अगर इसे कंट्रोल न किया जाए तो यह दिल की बीमारी, स्ट्रोक, किडनी फेलियर, आंखों की रोशनी जाने और नर्व डैमेज जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है.

क्या डायबिटीज़ रिवर्स हो सकती है?

कुछ मामलों में वजन घटाने और लाइफस्टाइल बदलने से टाइप-2 डायबिटीज़ को काफी हद तक कंट्रोल या रिवर्स किया जा सकता है. लेकिन कई मरीजों को लंबे समय तक इंसुलिन, GLP-1 इंजेक्शन या दवाओं पर निर्भर रहना पड़ता है.

कॉफी पीने वालों में डायबिटीज़ का खतरा कम?

पहले की बड़ी स्टडीज़ में भी यह देखा गया है कि जो लोग नियमित रूप से कॉफी पीते हैं, उनमें टाइप-2 डायबिटीज़ का खतरा कम होता है. कुछ शोधों के मुताबिक, दिन में 3 से 5 कप कॉफी पीने से सबसे ज़्यादा फायदे देखे गए हैं. दुनिया भर में 40 करोड़ से ज्यादा लोग टाइप-2 डायबिटीज़ से जूझ रहे हैं. यूके में यह सबसे तेजी से बढ़ने वाली हेल्थ समस्या बन चुकी है. मोटापे की वजह से 40 साल से कम उम्र के लोगों में भी इसके मामले तेजी से बढ़े हैं.

वजन घटाने वाले इंजेक्शन और नई चेतावनी

Mounjaro और Wegovy जैसे इंजेक्शन को मोटापे और डायबिटीज़ के इलाज में क्रांति माना गया. हालांकि, ऑक्सफोर्ड की एक बड़ी समीक्षा चेतावनी देती है कि इलाज बंद होते ही इनके फायदे धीरे-धीरे खत्म हो सकते हैं, यानी मरीजों को इन्हें लंबे समय तक लेना पड़ सकता है.

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