Begin typing your search...

ऑनलाइन बात करने से कम हो सकती है उम्र! सोशलाइज करना सीखें वरना होगी दिक्कत, एक्सपर्ट से जानें कैसे

दुनिया में आज हर कोई अपने फोन और सोशल मीडिया में उलझा हुआ है. लोग “डोपामिन बूस्ट” और “सिरोटोनिन हिट” जैसी चीज़ों की बात करते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि सिर्फ ऑनलाइन लोगों से बात करने से आपकी उम्र कम हो सकती है?

ऑनलाइन बात करने से कम हो सकती है उम्र! सोशलाइज करना सीखें वरना होगी दिक्कत, एक्सपर्ट से जानें कैसे
X
( Image Source:  AI SORA )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत

Updated on: 14 Jan 2026 1:50 PM IST

अगर आपको लगता है कि रोज़ के गुड मॉर्निंग मैसेज, WhatsApp कॉल और इंस्टाग्राम डीएम से ही सोशल लाइफ पूरी हो जाती है, तो ज़रा रुकिए. एक्सपर्ट्स की मानें तो सिर्फ स्क्रीन पर बात करना आपकी सेहत के लिए काफी नहीं है. असली सोशलाइजिंग बेहद जरूरी है. इ

यानी सामने बैठकर हंसना, बात करना और लोगों के साथ समय बिताना, न सिर्फ मूड अच्छा करता है, बल्कि उम्र भी बढ़ाने में मदद करता है. मतलब कि दोस्ती सिर्फ टाइमपास नहीं, बल्कि हेल्थ टॉनिक है.

अकेलापन क्यों नुकसानदेह है

न्यूरोसाइंटिस्ट बेन रीन ने बताया कि जब कोई अकेला रहता है, तो शरीर में स्ट्रेस प्रोसेस शुरू हो जाता है. यह हमारे पूर्वजों के समय से जुड़ा हुआ है, जब अकेलापन खतरे का संकेत होता था. तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल बढ़ाता है, जो पहले काम आता था, लेकिन आज लंबे समय तक अकेलेपन में यह हमारी सेहत को नुकसान पहुंचाता है.

क्या कहती है चूहों पर हुई रिसर्च

चूहों पर एक रिसर्च की गई. जब अकेले चूहों को स्ट्रोक दिया गया, तो अकेले रहने वाले चूहों में ज्यादा दिमाग ज्यादा डैमेज हुआ और उनकी मौत का जोखिम बढ़ गया. वहीं, जो चूहे ग्रुप में रहते थे, उनकी रिकवरी बेहतर थी. यही कंडीशन इंसानों पर भी लागू होती है. अकेलेपन से क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन बढ़ता है, जिससे अंग कमजोर होते हैं और इलाज धीमा पड़ता है.

क्यों करना चाहिए सोशलाइज?

दरअसल जब हम दूसरों के साथ समय बिताते हैं, तो हमारा दिमाग ऑक्सिटोसिन रिलीज करता है, जो टेंशन घटाता है, इन्फ्लेमेशन कम करता है और फिट होने की प्रोसेस को तेज करता है. बेन रीन के अनुसार, शादीशुदा लोग जिनमें ऑक्सिटोसिन अधिक होता है, उनके हेल्थ रिजल्ट भी बेहतर होते हैं. इसके अलावा, सोशलाइज करने से हमारे दिमाग में डोपामिन और सिरोटोनिन को एक्टिव होता है, जो हमें अच्छा महसूस कराती है. यह हमारे दिमाग का तरीका है यह कहने का कि “जो तुम कर रहे हो वह तुम्हारे लिए अच्छा है, इसे दोबारा करो.”

ऑनलाइन दुनिया और असली बातचीत का अंतर

एक्सपर्ट का कहना है कि सोशल मीडिया पर कॉन्टैक्ट असली बातचीत का ऑप्शन नहीं बन सकता है. जब हम केवल टेक्स्ट या वीडियो कॉल में बातचीत करते हैं, तो हमारे दिमाग को जरूरी संकेत जैसे चेहरे के भाव, आवाज़ का स्वर, और बॉडी लैंग्वेज नहीं मिलते है. इससे अकेलापन, चिंता और उदासी बढ़ती है. ऐसे में अगर टेक्स्ट करना है तो कॉल करें. कॉल करना है तो वीडियो कॉल करें और सबसे बेहतर है कि असली में मिलें.

ये बदलाव करें

एक्सपर्ट ने बताया कि हमारे दिमाग के लिए छोटे बदलाव भी मददगार होते हैं. जैसे आप जानवर पाल सकते हैं. उदाहरण के लिए मालिक और कुत्ते के बीच नजर मिलाना ऑक्सिटोसिन बढ़ाता है और कॉर्टिसोल घटाता है. या फिर समाज में दूसरों के साथ पॉजिटिव कनेक्शन बनाना, जैसे किसी की मदद करना, तारीफ या बातचीत शुरू करना भी आपके लिए फायदेमंद हो सकता है.

काम की खबर
अगला लेख