फोन की टॉर्च लगाते ही चमकने लगे Breast! TikTok पर वायरल हुआ ट्रेंड, डॉक्टर से जानें कितना है खतरनाक
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म TikTok पर इन दिनों एक अजीब ट्रेंड वायरल हो रहा है, जिसमें अंधेरे में ब्रेस्ट चमकने लगते हैं. सुनकर अजीब लग रहा है ना, लेकिन यह सच है. इस ट्रेंड को फेक बूब ग्लो इन डार्क ट्रेंड का नाम दिया गया है, जिसे डॉक्टर ने कुछ हद तक खतरनाक बताया है.
सोशल मीडिया पर आए दिन नए-नए ट्रेंड वायरल होते रहते हैं, लेकिन हाल ही में टिक टॉक पर एक ऐसा वीडियो सामने आया जिसने लोगों को हैरान कर दिया. वीडियो में देखा गया कि फोन की टॉर्च लगाते ही ब्रेस्ट इम्प्लांट चमकने लगे. लोग इसे मज़ेदार “सुपरपावर” बता रहे हैं, वहीं कुछ डॉक्टरों ने इसे लेकर चेतावनी भी दी है.
लेकिन सवाल यही है कि क्या वाकई इम्प्लांट चमक रहे हैं? या इसके पीछे कोई साइंस है? इस वायरल ट्रेंड की पूरी कहानी और डॉक्टरों की राय जानना बेहद जरूरी है.
अंधेरे में चमकते ब्रेस्ट
इस ट्रेंड की शुरुआत कंटेंट क्रिएटर जूली वाइज़ के एक वीडियो से हुई. जूली ने बाथरूम की लाइट बंद की, सिर पर पहनने वाला टॉर्च (हेडलैम्प) लिया और उसे अपने ब्रेस्ट के नीचे रखा. जैसे ही उन्होंने टॉर्च ऑन की, कैमरे में गुलाबी रोशनी जैसा ग्लो दिखाई देने लगा. जूली खुद भी चौंक गईं. वीडियो को लाखों नहीं, बल्कि करोड़ों व्यूज़ मिल गए.
लोगों ने खुद आज़माया और रह गए दंग
जूली का वीडियो देखने के बाद कई महिलाओं ने खुद यह ट्रिक आज़माई. स्टेला टज़ॉर्ट्ज़ी को लगा यह सब बकवास है, लेकिन जब उन्होंने टॉर्च लगाई तो उनके ब्रेस्ट भी चमकते दिखे. कंटेंट क्रिएटर मैरी एशली ने वीडियो बनाते हुए कहा कि “ये मज़ाक हो ही नहीं सकता!” इसके बाद सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो की बाढ़ आ गई.
आखिर लाइट क्यों दिखाई देती है?
डॉक्टरों का कहना है कि इसमें डरने जैसी कोई बात नहीं है. दरअसल ब्रेस्ट इम्प्लांट सिलिकॉन या सलाइन से बने होते हैं. यह मटेरियल इंसानी फैट और टिशू से अलग होता है. जब अंधेरे में तेज़ रोशनी डाली जाती है, तो वह इम्प्लांट से होकर ज्यादा आसानी से गुजर जाती है यानी इम्प्लांट खुद नहीं चमकता, बल्कि रोशनी का व्यवहार अलग दिखता है. इसे आसान भाषा में समझें जैसे उंगलियों के पीछे टॉर्च रखने पर उंगलियां लाल और ट्रांसपेरेंट दिखती हैं, बिल्कुल वही साइंस यहां भी काम करती है.
क्या यह खतरनाक है?
ज्यादातर डॉक्टर का कहना है कि यह खतरनाक हो सकता है. इसे ट्रांसइल्यूमिनेशन कहते हैं, जो पतली त्वचा या खिंचे हुए टिशू में हो सकता है. इम्प्लांट में कोई लाइट नहीं होती है. कोई रेडिएशन या खराबी नहीं है. यह सिर्फ रोशनी का पास होना है. कुछ डॉक्टरों का मानना है कि जिन लोगों की बॉडी पतली होती है और जिनके इम्प्लांट बड़े होते हैं, या इम्प्लांट मसल के ऊपर लगाए गए हों, उनमें यह असर ज्यादा दिख सकता है. हालांकि, कुछ सर्जन यह भी चेतावनी देते हैं कि बहुत बड़े इम्प्लांट त्वचा को जरूरत से ज्यादा खींच सकते हैं, जिससे स्किन बहुत पतली हो जाती है.




