वायरल ट्रेंड या डिजिटल ट्रैप? Marry 7 Min 11 Sec Viral Video नहीं, नया साइबर हमला; एक क्लिक में खाली हो सकता है बैंक अकाउंट
सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा “Marry 7 Min 11 Sec Viral Video” असल में कोई MMS स्कैंडल नहीं, बल्कि एक खतरनाक साइबर ट्रैप है. फर्जी स्क्रीनशॉट, टूटे लिंक और नकली वीडियो प्लेयर के ज़रिए यूज़र्स को मालवेयर डाउनलोड करने के लिए फंसाया जा रहा है. साइबर एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि ऐसे लिंक पर क्लिक करने से फोन हैक, बैंक डिटेल चोरी और डेटा लीक का खतरा बढ़ जाता है.
दिल्ली–मेरठ RRTS और '19 मिनट वीडियो' विवाद के बाद सोशल मीडिया पर एक नया सर्च ट्रेंड तेज़ी से उभरा 'Marry 7 Min 11 Sec Viral Video'. पहली नज़र में यह किसी नए MMS स्कैंडल जैसा लगता है, लेकिन शुरुआती जांच में इसकी सच्चाई कुछ और ही सामने आई है. दरअसल, यह नाम एक कीवर्ड ट्रैप बन चुका है, जिसे यूज़र्स की जिज्ञासा भुनाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है. बीते 48 घंटों में X, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम पर हजारों फेक अकाउंट्स ने धुंधली तस्वीरें और टूटे लिंक शेयर किए हैं.
इस ट्रेंड का तरीका बेहद शातिर है. यूज़र को लो-रिज़ॉल्यूशन स्क्रीनशॉट या ब्लर GIF दिखाए जाते हैं, जिन पर 'Uncensored' या 'Exclusive Clip' जैसे शब्द लिखे होते हैं. वीडियो प्लेयर जैसा इंटरफेस, टाइमस्टैम्प और 'Live' आइकन इसे असली दिखाते हैं. लेकिन जैसे ही यूज़र क्लिक करता है, वीडियो नहीं चलता बल्कि वह किसी थर्ड-पार्टी वेबसाइट पर पहुंच जाता है.
क्लिक करते ही शुरू होता है साइबर अटैक
इन वेबसाइट्स पर यूज़र से कहा जाता है कि “वीडियो देखने के लिए” एक खास प्लेयर या ऐप डाउनलोड करें. असल में ये फर्जी APK फाइल्स होती हैं, जो फोन में इंस्टॉल होते ही खतरनाक कोड एक्टिव कर देती हैं. कई मामलों में यूज़र को बार-बार रीडायरेक्ट किया जाता है, ताकि वह भ्रम में बना रहे और अंततः कोई न कोई फाइल डाउनलोड कर ले.
लिंक के अंदर क्या छिपा है खतरा?
साइबर एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इन फर्जी “लीक वीडियो” फाइल्स में कई तरह के मालवेयर होते हैं. कुछ मामलों में Remote Access Trojan (RAT) इंस्टॉल हो जाता है, जिससे हैकर फोन का कैमरा और माइक्रोफोन कंट्रोल कर सकता है. कहीं बैंकिंग ऐप्स, पासवर्ड और OTP चुराने वाले Info-Stealers छिपे होते हैं. हल्के मामलों में भी यूज़र महंगे प्रीमियम SMS या नॉन-स्टॉप स्पैम में फंस जाता है.
क्यों फंस जाते हैं लोग?
इस पूरे खेल की जड़ है डिजिटल वॉययूरिज़्म यानी “देख लेने की बेचैनी”. जैसे ही कोई चीज़ “लीक” या “बैन होने से पहले” टैग के साथ आती है, दिमाग की सतर्कता कम हो जाती है. यूज़र सोचता है कि मौका हाथ से निकल न जाए. यही वह पल होता है, जब साइबर अपराधी हमला करते हैं.
‘19 मिनट वीडियो’ ने कैसे माहौल बनाया?
हालिया “19 मिनट” जैसे मामलों ने इंटरनेट यूज़र्स को एक तरह की आदत में डाल दिया है. हर कुछ दिन में नया स्कैंडल आने की उम्मीद बन गई है. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और वायरल चर्चाओं ने इस मनोविज्ञान को और मज़बूत किया है. नतीजा यह कि लोग बिना जांचे-परखे लिंक पर क्लिक कर देते हैं और खुद को खतरे में डाल लेते हैं.
साइबर एक्सपर्ट्स की साफ चेतावनी
साइबर सुरक्षा सलाहकारों का कहना है कि यह अब सिर्फ “वीडियो देखने” का मामला नहीं रहा. ऐसे लिंक पर क्लिक करना अपनी पूरी डिजिटल ज़िंदगी की चाबी किसी अनजान को सौंपने जैसा है. “Marry 7 Min 11 Sec” जैसे ट्रेंड फिलहाल डिजिटल माइनफील्ड बन चुके हैं. जहां एक असली लिंक मिलने की संभावना लगभग शून्य है.
खुद को कैसे बचाएं?
अगर कोई वीडियो सच में लीक हुआ होता, तो वह किसी भरोसेमंद न्यूज़ या आधिकारिक प्लेटफॉर्म पर सामने आता. अनजान लिंक, शॉर्ट URL और “ऐप डाउनलोड करो” जैसे संदेशों से दूरी बनाएं. किसी भी हाल में थर्ड-पार्टी ऐप इंस्टॉल न करें. याद रखें वायरल कंटेंट की दुनिया में जिज्ञासा अक्सर भारी कीमत वसूलती है.





