फास्ट फूड ने बिगाड़ी बच्चों की मुस्कान! समय पर क्यों नहीं टूट रहे दूध के दांत? जानें क्या है सही उम्र
आजकल बच्चों में दूध के दांत समय पर न गिरने की समस्या बढ़ती जा रही है. विशेषज्ञ मानते हैं कि फास्ट फूड खाने की वजह से यह समस्या हो रही है. वहीं, दूध के दांत आमतौर पर 6 से 12 साल की उम्र के बीच टूट जाने चाहिए.
कब तक गिरने चाहिए दूध के दांत
आजकल बच्चों में एक अजीब समस्या तेजी से देखने को मिल रही है. दूध के दांत समय पर नहीं गिर रहे हैं. आमतौर पर जिस उम्र में ये दांत धीरे-धीरे ढीले होकर गिर जाते हैं, वहां कई बच्चों में यह प्रोसेस देर से हो रही है. डेंटल एक्सपर्ट का मानना है कि बदलती खानपान की आदतें, खासकर फास्ट फूड खाना इस समस्या की एक बड़ी वजह बन रहा है.
बर्गर, पिज़्ज़ा, चॉकलेट और मीठे पैकेट वाले स्नैक्स बच्चों के दांतों पर गहरा असर डाल रहे हैं. ये न सिर्फ दांतों को कमजोर कर रहे हैं, बल्कि प्राकृतिक रूप से दूध के दांत गिरने की प्रक्रिया को भी प्रभावित कर रहे हैं. ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि बच्चों के दांत किस उम्र में गिरने चाहिए और किन आदतों से परेशानी हो सकती है.
बच्चों के दूध के दांत कब गिरने चाहिए?
डेंटल एक्सपर्ट के अनुसार बच्चों के दूध के दांत आमतौर पर 6 से 12 साल की उम्र के बीच धीरे-धीरे गिरते हैं और उनकी जगह परमानेंट दांत आ जाते हैं.
- 6–7 साल: आगे के दांत (Incisors) गिरना शुरू होते हैं.
- 9–11 साल: किनारे और पीछे के दांत बदलते हैं.
- 12 साल तक: अधिकतर दूध के दांत परमानेंट दांतों से बदल जाते हैं.
- अगर यह प्रोसेस काफी देर से हो रही है, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए.
फास्ट फूड और दांतों के विकास पर असर
- एक्सपर्ट के मुताबिक फास्ट फूड, ज्यादा शुगर और प्रोसेस्ड फूड बच्चों के दांतों पर कई तरह से असर डालते हैं.
- अधिक चीनी दांतों में सड़न (कैविटी) बढ़ाती है.
- चिपचिपे और कम हेल्दी चीजें खाने से दांत कमजोर हो सकते हैं.
- जरूरी पोषक तत्वों की कमी से दांतों के डेवलेपमेंट पर असर पड़ता है.
- लगातार ऐसी चीजें खाने से दांतों की जड़ें सही तरीके से विकसित नहीं हो पातीं, जिससे दूध के दांत समय पर नहीं गिरते या परमानेंट दांत आने में देरी हो सकती है.
फास्ट फूड ही नहीं, ये कारण भी जिम्मेदार
- दांतों के देर से टूटने के पीछे केवल खानपान ही नहीं, बल्कि कई अन्य कारण भी होते हैं:
- कैल्शियम, विटामिन D और फॉस्फोरस की कमी दांतों की मजबूती और डेवलपमेंट पर असर डालती है.
- कई मामलों में माता-पिता से मिली जेनेटिक स्ट्रक्चर भी दांतों के बदलाव की स्पीड तय करती है.
- अगर बच्चों की ब्रशिंग सही तरीके से नहीं होती, तो दांतों में इंफेक्शन और कैविटी बढ़ सकती है.
- कुछ बच्चों में हार्मोन असंतुलन के कारण भी दांतों के बदलने का प्रोसेस धीमा हो जाता है.
- दांतों पर चोट लगने या गलत तरीके से बढ़ने से भी प्राकृतिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है.
किन बातों का रखें ध्यान?
बच्चों के खानपान पर खास ध्यान दिया जाए. घर का न्यूट्रिशन से भरपूर खाना, हरी सब्जियां, दूध और कैल्शियम से भरपूर फूड दांतों के विकास में मदद करते हैं. साथ ही, नियमित ब्रशिंग और चेकअप जरूरी है ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता लगाया जा सके.




