खिलौने से खेलने की उम्र में 5 साल के राज सौरभ बने भारत के सबसे छोटे Snake Rescuer, बिहू सम्मेलन में मिला बड़ा सम्मान
असम के 5 वर्षीय राज सौरभ बोरकोटोकी को देश का सबसे छोटा snake rescuer घोषित किया गया है. वे बचपन से ही अपने पिता के साथ सांपों को बचाकर वन्यजीव संरक्षण का संदेश दे रहे हैं.
असम के सोनितपुर जिले में रहने वाले पांच साल के छोटे बच्चे राज सौरभ बोरकोटोकी को हाल ही में एक बहुत खास सम्मान मिला है. उन्हें तेजपुर के बाम-परबतिया इलाके में आयोजित 60वें लुइट पर रोंगाली बिहू सम्मेलन के दौरान देश का सबसे छोटी उम्र का सांप बचावकर्ता (snake rescuer) घोषित किया गया. यह सम्मान उन्हें इसलिए दिया गया क्योंकि उन्होंने इतनी छोटी उम्र में सांपों को बचाने और वन्यजीवों की रक्षा करने का अद्भुत काम शुरू कर दिया है.
मीडिया में उनकी बहादुरी की खबरें आने के बाद बहुत से लोग उनकी तारीफ कर रहे हैं. राज सौरभ अभी सीनियर केजी (किंडरगार्टन) के छात्र हैं. वे सांपों को देखकर बिल्कुल नहीं डरते. बल्कि वे बहुत सावधानी से सांप को पकड़ते हैं, उसे सुरक्षित जगह पर ले जाते हैं और फिर जंगल या उसके प्राकृतिक घर में छोड़ देते हैं. उन्होंने पूरे इलाके में लोगों का ध्यान अपनी तरफ खींच लिया है. स्थानीय लोग बताते हैं कि राज सांप को देखते ही घबरा नहीं जाते. उल्टा, वे बहुत शांत रहकर सांप को बचाने की कोशिश करते हैं. साथ ही वे लोगों को सांपों के बारे में गलतफहमियां दूर करने में भी मदद करते हैं.
क्या सांपों से डरना चाहिए?
वे बताते हैं कि सांपों से डरने की जरूरत नहीं है, बल्कि उन्हें सही तरीके से बचाना और छोड़ना चाहिए. इससे पर्यावरण और वन्यजीवों की रक्षा होती है. राज के पिता सौरव बोरकोटोकी एक प्रसिद्ध सर्प विशेषज्ञ (snake expert) हैं. राज अपने पिता के साथ बहुत छोटी उम्र से ही सांप बचाने का काम सीख रहे हैं. पिता-पुत्र अक्सर साथ-साथ सोनितपुर जिले के अलग-अलग इलाकों जैसे ढेकियाजुली, तेजपुर और बोरसोला में सांप बचाने के लिए जाते हैं. दोनों मिलकर कई सांपों की जान बचा चुके हैं.
सम्मानित हुए नन्हे सौरभ
यह खास सम्मान रोंगाली बिहू सम्मेलन के मुख्य कार्यक्रम के दौरान दिया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता सत्यदेव शर्मा ने की. मुख्य सलाहकार द्विजेंद्रनाथ शर्मा और आमंत्रित वक्ता शांतनु बरुआ भी वहां मौजूद थे. लुइट पर महिला समिति की अध्यक्ष अनुरापा बोरा और शिलोरखुटा नामघर विकास समिति की रीता बोरकोटोकी ने भी राज की सराहना की. उन्होंने कहा कि इतनी छोटी उम्र में वन्यजीव संरक्षण के लिए काम करना बहुत बड़ी बात है. सभी ने यह भी कहा कि प्रकृति और जानवरों की रक्षा करना हर किसी की जिम्मेदारी है. उसी दिन तेजपुर के एक प्रकृति प्रेमी समूह 'प्रकृति' के सदस्य राज के घर गए. समूह के अध्यक्ष तुतुमोनी कलिता और सचिव मोहसिनुर रहमान ने राज से मिलकर सांप बचाने और वन्यजीव संरक्षण के बारे में विस्तार से बात की.
गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में शमील हो नाम
उन्होंने राज को विशेष प्रशंसा पत्र भी दिया. स्थानीय लोगों में बहुत उत्साह है। वे चाहते हैं कि राज को लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी शामिल किया जाए क्योंकि पांच साल की उम्र में इतना साहस और जागरूकता दिखाना वाकई बहुत कमाल की बात है. राज सौरभ की यह कहानी हमें सिखाती है कि वन्यजीव संरक्षण की शुरुआत बचपन से ही की जा सकती है. अगर बच्चों को सही शिक्षा और प्रोत्साहन मिले तो वे पर्यावरण की रक्षा में बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं. राज जैसे बच्चे पूरे समाज के लिए प्रेरणा बन रहे हैं और लोग अब सांपों को मारने के बजाय बचाने की सोच रहे हैं.




