बार-बार होता है पीठ दर्द? हो सकता है Spinal Fracture, 22 लाख ब्रिटिश लोग हो चुके हैं शिकार
पीठ दर्द को अक्सर उम्र, थकान या गलत पोस्चर का नतीजा मानकर नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है, लेकिन ब्रिटेन में सामने आए नए आंकड़े चौंकाने वाले हैं. अनुमान है कि करीब 22 लाख लोग ऐसे “छुपे हुए” स्पाइनल फ्रैक्चर से जूझ रहे हैं, जिनकी पहचान आम जांचों में नहीं हो पाती. ये फ्रैक्चर धीरे-धीरे दर्द, झुकाव और जीवन की गुणवत्ता पर गहरा असर डालते हैं.
अगर आपको बार-बार पीठ दर्द होता है और आराम या दवा लेने के बाद भी राहत नहीं मिल रही, तो इसे हल्के में लेना भारी पड़ सकता है. हालिया आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेन में करीब 22 लाख लोग ऐसे स्पाइनल फ्रैक्चर से जूझ रहे हैं, जिनका पता आम जांचों में नहीं चल पाता है.
ये फ्रैक्चर धीरे-धीरे दर्द बढ़ाते हैं और अक्सर उम्र, थकान या गलत पोस्चर समझकर नज़रअंदाज़ कर दिए जाते हैं. अब NHS ने इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए एक अहम कदम उठाया है. चलिए जानते हैं क्यों होता है स्पाइनल फ्रैक्चर और कैसे इसका पता लगा सकते हैं.
क्यों पकड़ में नहीं आते रीढ़ के फ्रैक्चर?
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, गिरने और हड्डियों के कमजोर होने का खतरा बढ़ जाता है. ऐसे में X-ray स्कैन आमतौर पर किए जाते हैं, खासकर उन लोगों में जिन्हें गिरने का जोखिम ज्यादा होता है या जो Osteoporosis से पीड़ित होते हैं. लेकिन समस्या यह है कि रीढ़ की हड्डी की नियमित जांच का कोई तय सिस्टम नहीं था. नतीजतन, Osteoporosis के कारण होने वाले करीब 70 प्रतिशत वर्टिब्रल फ्रैक्चर बिना पहचाने रह जाते हैं, और मरीज लंबे समय तक दर्द सहते रहते हैं.
NHS का नया कदम क्या बदलेगा?
अब NHS ने 50 साल से अधिक उम्र के लोगों के लिए होने वाले बोन डेंसिटी टेस्ट में वर्टिब्रल फ्रैक्चर असेसमेंट को नियमित रूप से शामिल करने का फैसला किया है. हर साल 86 हजार से ज्यादा बुज़ुर्गों में रीढ़ की हड्डी में फ्रैक्चर होता है. नई जांच प्रक्रिया से इन मामलों की पहचान जल्दी हो सकेगी, जिससे समय पर इलाज शुरू किया जा सकेगा. National Institute of Health and Care Excellence (NICE) के मुताबिक, ऐसे फ्रैक्चर जीवन की गुणवत्ता को बुरी तरह प्रभावित करते हैं और शुरुआती पहचान बेहद ज़रूरी है.
बुजर्गों में Osteoporosis है फ्रैक्चर का कारण
ब्रिटेन में करीब 80 प्रतिशत लोग जीवन में कभी न कभी पीठ दर्द का एक्सपीरियंस करते हैं. कई मामलों में इसका कारण मांसपेशियों की थकान नहीं, बल्कि रीढ़ में मौजूद अनदेखा फ्रैक्चर होता है. बुज़ुर्गों में यह समस्या अक्सर गिरने या Osteoporosis के चलते होती है. चूंकि ये फ्रैक्चर हमेशा तेज़ दर्द के साथ सामने नहीं आते, इसलिए समय पर पकड़ में नहीं आते हैं.
क्या है Osteoporosis?
Osteoporosis एक मेडिकल कंडीशन है, न कि उम्र बढ़ने की सामान्य प्रक्रिया. इसमें हड्डियों के अंदर का घनत्व धीरे-धीरे कम होने लगता है, जिससे वे पतली और कमजोर हो जाती हैं. शुरुआती लेवल पर इसे Osteopenia कहा जाता है, लेकिन जब हड्डियों का नुकसान ज्यादा बढ़ जाता है तो स्थिति Osteoporosis में बदल जाती है. इस बीमारी में मामूली गिरावट से भी हड्डी टूटने का खतरा बढ़ जाता है. कलाई और कूल्हे के फ्रैक्चर आम हैं, लेकिन रीढ़ के फ्रैक्चर अक्सर बिना पता चले रह जाते हैं.
Osteoporosis के लक्षण
- लगातार या बढ़ता हुआ पीठ दर्द
- कद का धीरे-धीरे कम होना
- पीठ का झुक जाना
- हल्की चोट में भी दर्द का लंबे समय तक बने रहना
इलाज और बचाव के तरीके
Osteoporosis का इलाज दवाओं, लाइफस्टाइल में बदलाव और नियमित निगरानी पर आधारित होता है.
- नियमित वेट-बेयरिंग और स्ट्रेंथ एक्सरसाइज़
- कैल्शियम से भरपूर संतुलित आहार
- पर्याप्त विटामिन D (ज़रूरत पड़ने पर सप्लीमेंट)
- गिरने से बचाव के उपाय
- समय-समय पर बोन डेंसिटी और स्पाइन जांच





