हिमालय की गोद में एक जादुई झील, जहां ज़मीन पर उतर आते हैं रात में तारे; जानिए कैसे पहुंचें, नियम और पूरी ट्रैवल गाइड
हिमाचल प्रदेश की चंद्रताल झील हिमालय की सबसे खूबसूरत हाई-एल्टीट्यूड झीलों में गिनी जाती है. यहां जाने से पहले रूट, मौसम, नियम और AMS से जुड़ी जरूरी जानकारी जानना बेहद जरूरी है.
क्या आपने कभी किसी ऐसी जगह की कल्पना की है जहां आसमान इतना साफ़ हो कि आकाशगंगा नंगी आंखों से तैरती हुई दिखे? एक ऐसी झील, जिसका पानी दिन के अलग-अलग पहर में अपना रंग बदलता हो कभी गहरा नीला, कभी पन्ना हरा, तो कभी चांदी जैसा चमकीला?. हिमालय की गोद में, समंदर की सतह से करीब 14,100 फीट की ऊंचाई पर एक ऐसा ही अजूबा छिपा है, जिसे दुनिया 'चंद्रताल' (Chandratal Lake) के नाम से जानती है. आधा चांद जैसे आकार की इस झील को देखना किसी जादू से कम नहीं है. लेकिन इस जन्नत तक पहुंचना उतना आसान भी नहीं है. यह सफर जितना खूबसूरत है, उतना ही एडवेंचर और रोमांच से भरा है. अगर आप भी इस साल रोज़मर्रा की भागदौड़ से दूर, पहाड़ों की इस रहस्यमयी झील को अपनी आंखों में बसाना चाहते हैं, तो यह कंपलीट ट्रैवल गाइड सिर्फ आपके लिए है.
क्यों खास है यह 'मून लेक'?
कहानियों और लोककथाओं के बिना हिमालय का कोई भी सफर अधूरा है. चंद्रताल को लेकर भी स्थानीय लोगों में कई मान्यताएं हैं. 'चंद्र' यानी चांद और 'ताल' यानी झील. अपने अनोखे आकार के कारण इसे 'मून लेक' भी कहा जाता है. स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, यह वही पवित्र स्थान है जहां महाभारत काल में इंद्र देव का रथ युधिष्ठिर को सशरीर स्वर्ग ले जाने के लिए उतरा था. वहीं, स्थानीय गद्दी चरवाहे मानते हैं कि इस झील में रात के वक्त परियां उतरती हैं. यह झील लाहौल और स्पीति जिले में स्पीति घाटी के 'समुद्र टापू' पठार पर स्थित है. सबसे दिलचस्प बात यह है कि इस झील में पानी आने का कोई विज़िबल सोर्स दिखाई नहीं देता, बल्कि पानी ज़मीन के नीचे से ही इसमें आता. वहीं, इससे निकलने वाली एक छोटी सी धारा आगे चलकर चंद्रा नदी का रूप ले लेती है.
चंद्रताल कैसे पहुंचें?
चंद्रताल पहुंचना अपने आप में एक बड़ा एडवेंचर है क्योंकि यहां के रास्ते कच्चे, पथरीले और 'वॉटर क्रॉसिंग्स' से भरे हुए हैं. चंद्रताल पहुंचने के दो मुख्य रास्ते हैं:
1. मनाली के रास्ते
अगर आप दिल्ली या यूपी से आ रहे हैं, तो मनाली वाला रूट सबसे छोटा और रोमांचक है.
मनाली से अटल टनल: सबसे पहले आप मनाली से अटल टनल होते हुए सिस्सू और कोकसर पहुंचेंगे
ग्रामफू से बातल: कोकसर के बाद ग्रामफू से रास्ता बदलता है. यहां से आपको पक्के रास्तों को अलविदा कहना होगा. ग्रामफू से बातल तक का रास्ता 'ऑफ-रोडिंग' के शौकीनों के लिए किसी इम्तिहान से कम नहीं है
बातल से चंद्रताल: बातल पहुंच कर आप थोड़ा आराम कर सकते हैं यहां 'चाचा-चाची' का ढाबा यहां बहुत मशहूर है. बातल से चंद्रताल महज 14 किलोमीटर दूर है, लेकिन रास्ता बेहद संकरा और कच्चा है
2. शिमला-काजा के रास्ते
अगर आप 'एल्टीट्यूड सिकनेस' (AMS) से बचना चाहते हैं, तो शिमला, किन्नौर और काजा होते हुए चंद्रताल पहुंच सकते हैं. यह रास्ता लंबा है लेकिन आपकी बॉडी को पहाड़ों के मौसम में ढलने का पूरा मौका देता है. काजा से लोसर होते हुए आप कुंजुम पास पहुंचेंगे और वहां से चंद्रताल का रास्ता कटता है.
नोट: गाड़ी सिर्फ चंद्रताल के आधिकारिक पार्किंग स्थल तक ही जा सकती है. पार्किंग से मुख्य झील तक पहुंचने के लिए आपको लगभग 1 से 1.5 किलोमीटर का एक आसान और खूबसूरत वॉक/ट्रेक करना होता है.
चंद्रताल जाने के कड़े नियम और सावधानियां
चूंकि चंद्रताल एक अत्यधिक संवेदनशील और इको-सेंसिटिव ज़ोन है, इसलिए पर्यावरण और आपकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सरकार और स्थानीय प्रशासन ने कुछ कड़े नियम बनाए हैं:
1. झील के पास कैंपिंग पर पूरी तरह प्रतिबंध
हाई कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के आदेशानुसार, चंद्रताल झील के किनारे या उसके 4-5 किलोमीटर के दायरे में टेंट या कैंप लगाने की सख्त मनाही है. सभी कमर्शियल कैंपसाइट्स झील से लगभग 4 से 5 किलोमीटर पहले 'कैंपिंग साइट' पर ही बनाए जाते हैं. पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने पर भारी जुर्माने का प्रावधान है.
2. 'नो प्लास्टिक' और कचरा प्रबंधन नियम
चंद्रताल को 'रामसर साइट' घोषित किया गया है, जिसका मतलब है कि यह अंतरराष्ट्रीय महत्व की आर्द्रभूमि है. झील के पास प्लास्टिक की बोतलें, चिप्स के पैकेट या किसी भी तरह का कचरा फेंकना कानूनी अपराध है. आप जो भी सामान ले जाएं, उसे अपने बैग में वापस लाएं.
3. झील के पानी में उतरना या नहाना मना है
स्थानीय लोग चंद्रताल को बेहद पवित्र मानते हैं. झील के पानी में पैर डालना, नहाना या कपड़े धोना पूरी तरह से प्रतिबंधित है. इस नियम का उल्लंघन करने पर स्थानीय लोग और प्रशासन सख्त कार्रवाई कर सकते हैं
4. इनर लाइन परमिट
भारतीय नागरिकों को चंद्रताल या स्पीति घाटी जाने के लिए किसी विशेष इनर लाइन परमिट की आवश्यकता नहीं होती है. हालांकि, अगर आप मनाली के रास्ते अपनी गाड़ी चाहे बाइक हो या कार से जा रहे हैं, तो आपको रोहतांग पास/अटल टनल रूट के नियमों और ग्रीन टैक्स का ध्यान रखना होगा. विदेशी पर्यटकों को काजा या रिकांगपिओ से इनर लाइन परमिट लेना अनिवार्य है
चंद्रताल जाने का सबसे अच्छा समय
चंद्रताल साल के मुश्किल से 4 से 5 महीने ही सुलभ हो पाता है. सर्दियों में भारी बर्फबारी के कारण कुंजुम पास और बातल के रास्ते पूरी तरह बंद हो जाते हैं.
जून से सितंबर (सबसे बेस्ट समय): जून के मध्य में जब बर्फ हटाई जाती है, तब यह रास्ता खुलता है. जून और जुलाई में आपको रास्ते में बर्फ की ऊंची दीवारें देखने को मिल सकती हैं. अगस्त और सितंबर में मौसम साफ रहता है और झील का पानी सबसे खूबसूरत नीला दिखाई देता है.
अक्टूबर से मई (बंद): अक्टूबर की शुरुआत से ही यहां कड़ाके की ठंड और बर्फबारी शुरू हो जाती है, जिससे रास्ते बंद कर दिए जाते हैं.
एक प्रो-ट्रैवलर की सीक्रेट टिप्स
आप चंद्रताल की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो एक प्रोफेशनल ट्रैवलर के तौर पर मेरी इन बातों को अपनी डायरी में नोट कर लीजिए:
- चूंकि यह झील 14,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर है, इसलिए अचानक वहां जाने से सिरदर्द, उल्टी या सांस लेने में तकलीफ (AMS) हो सकती है. मनाली या काजा में कम से कम एक या दो रातें बिताकर ही आगे बढ़ें. अपने साथ कपूर, ओआरएस (ORS) और जरूरी दवाएं जरूर रखें
- चंद्रताल में दिन के समय तेज धूप हो सकती है, लेकिन सूरज डूबते ही तापमान शून्य या उससे भी नीचे चला जाता है. इसलिए, भारी जैकेट के बजाय परतों में कपड़े पहनें (थर्मल, टी-शर्ट, स्वेटर और फिर विंडप्रूफ जैकेट)
- अगर आप खुद ड्राइव कर रहे हैं, तो हाई ग्राउंड क्लीयरेंस वाली गाड़ी (4x4 हो तो सबसे बेहतर) ही ले जाएं. हैचबैक या कम क्लीयरेंस वाली गाड़ियां ग्रामफू से बातल के बीच के पत्थरों और पानी के नालों में फंस सकती हैं
- बातल पार करने के बाद आपके मोबाइल का नेटवर्क चाहे जियो हो, एयरटेल या बीएसएनएल पूरी तरह गायब हो जाएगा. इसलिए अपने परिवार को पहले ही सूचित कर दें कि आप कुछ समय के लिए 'आउट ऑफ रीच' रहने वाले हैं. कैश साथ रखें, क्योंकि वहां ऑनलाइन पेमेंट (UPI) काम नहीं करेगा




