रिलायंस पर क्यों भड़के टेलीग्राम के ओनर? आखिर क्या बला है BGP Hijacking, जिसका लगाया इल्जाम, डिटेल में जानें पूरा मामला
टेलीग्राम के संस्थापक और CEO पावेल ड्यूरोव ने रिलायंस पर गंभीर आरोप लगाते हुए दावा किया है कि कंपनी हाइजैकिंग के जरिए लाखों लोगों को प्रभावित कर रही है.
टेलीग्राम के संस्थापक और सीईओ पावेल ड्यूरोव ने सार्वजनिक रूप से रिलायंस पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने दावा किया है कि रिलायंस भारत के बाहर कई देशों में टेलीग्राम की इंटरनेट कनेक्टिविटी को प्रभावित कर रहा है. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर किए गए एक पोस्ट में ड्यूरोव ने कहा कि रिलायंस कथित तौर पर "बॉर्डर गेटवे प्रोटोकॉल (BGP) हाईजैकिंग" नाम की तकनीक का इस्तेमाल कर टेलीग्राम के नेटवर्क रूट्स में बाधा डाल रहा है.
ड्यूरोव के मुताबिक, यह समस्या केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (UAE) समेत कई अन्य देशों के यूजर्स भी इससे प्रभावित हुए हैं. उन्होंने लिखा, "भारतीय टेलीकॉम कंपनी रिलायंस BGP हाईजैकिंग जैसी गलत तकनीक का इस्तेमाल करके भारत के बाहर लाखों टेलीग्राम यूजर्स की पहुंच को बाधित कर रही है."
क्या है BGP हाईजैकिंग?
BGP (Border Gateway Protocol) इंटरनेट का एक महत्वपूर्ण रूटिंग सिस्टम है, जो दुनिया भर में डेटा को सही नेटवर्क तक पहुंचाने का काम करता है. साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई नेटवर्क गलत या अनधिकृत तरीके से रूट की घोषणा करता है, तो इंटरनेट ट्रैफिक अपने सही रास्ते से भटक सकता है. इसे गंभीर सुरक्षा समस्या माना जाता है.
ड्यूरोव ने क्या लगाया इल्जाम?
ड्यूरोव ने दावा किया कि यह बाधा जानबूझकर पैदा की गई लगती है. उनका कहना है कि इस मामले में कई शिकायतें और रिपोर्ट भेजे जाने के बावजूद रिलायंस ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. टेलीग्राम प्रमुख ने इस विवाद को मैसेजिंग प्लेटफॉर्म्स के बीच प्रतिस्पर्धा से भी जोड़ा. उन्होंने दावा किया कि रिलायंस के मेटा के साथ कारोबारी संबंध हैं, जो व्हाट्सऐप, फेसबुक और इंस्टाग्राम की मालिक कंपनी है. ड्यूरोव ने कहा, "यह प्रतिस्पर्धी लड़ाई का हिस्सा हो सकता है, क्योंकि रिलायंस में मेटा की हिस्सेदारी है."
ये आरोप ऐसे समय में सामने आए हैं जब भारत में टेलीग्राम पहले से ही चुनौतियों का सामना कर रहा है. हाल ही में भारतीय अधिकारियों ने 22 जून तक टेलीग्राम की सेवाओं पर अस्थायी रोक लगाने का फैसला लिया था.
सरकार ने क्यों उठाया ये कदम?
सरकार का कहना है कि यह कदम परीक्षा से जुड़े पेपर लीक और नकल गिरोहों की गतिविधियों को रोकने के लिए उठाया गया है. राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के अनुसार, NEET 2026 पुनर्परीक्षा से जुड़े कुछ कथित पेपर लीक नेटवर्क टेलीग्राम ग्रुप्स का इस्तेमाल कर रहे थे. अधिकारियों ने टेलीग्राम को यह निर्देश भी दिया था कि प्रतिबंध अवधि के दौरान पहले से पोस्ट किए गए संदेशों को एडिट करने की सुविधा बंद की जाए.
गौरतलब है कि इसी साल NEET का दोबारा एग्जाम होना है, क्योंकि जांच में प्रश्नपत्र लीक होने की बात सामने आई है. इस घटना के बाद देशभर में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया था और परीक्षा सुरक्षा को लेकर कई सवाल उठे थे.
टेलीग्राम बैन पर पावेल ने क्या कहा था?
पावेल ड्यूरोव ने भारत सरकार के इस फैसले की आलोचना की है. उनका कहना है कि टेलीग्राम पर रोक लगाने से पेपर लीक करने वाले लोगों पर कोई असर नहीं पड़ेगा. उन्होंने कहा, "इससे भारत के 15 करोड़ से अधिक आम टेलीग्राम यूजर्स प्रभावित होंगे, जबकि पेपर लीक करने वाले लोग आसानी से दूसरे प्लेटफॉर्म पर चले जाएंगे."
ड्यूरोव ने अपने ताजा बयान में यह भी कहा कि अगर भारत में टेलीग्राम पर प्रतिबंध लगाने की कोशिशों के पीछे रिलायंस और व्हाट्सऐप की कोई भूमिका हो, तो उन्हें हैरानी नहीं होगी. हालांकि, उन्होंने इस दावे के समर्थन में कोई सबूत पेश नहीं किया. उन्होंने दुनिया भर के नेटवर्क ऑपरेटरों से अपील की कि वे रिलायंस के नेटवर्क से आने वाली किसी भी अनधिकृत BGP घोषणा को स्वीकार न करें, ताकि इंटरनेट रूट हाईजैकिंग जैसी घटनाओं को रोका जा सके और इंटरनेट सेवाएं सुचारु बनी रहें.




