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क्या फिर बढ़ने वाले हैं पेट्रोल-डीजल के दाम, सरकार ने क्यों बढ़ाई एक्सपोर्ट ड्यूटी? FAQ से जानें हर सवाल का जवाब

कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है.

Diesel Export Duty Increased
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Diesel Export Duty Increased

( Image Source:  ANI )

कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को लेकर बड़ा फैसला लिया है. सरकार ने डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स में बढ़ोतरी कर दी है. नई दरें 16 जून से लागू हो चुकी हैं और अगले 15 दिनों तक प्रभावी रहेंगी.

सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती कीमतों और अनिश्चितता को देखते हुए देश में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना जरूरी है. हालांकि इस बदलाव के बीच पेट्रोल के निर्यात शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया गया है, जिससे तेल कंपनियों को कुछ राहत मिल सकती है.

FAQ से जानें हर सवाल का जवाब

केंद्र सरकार ने डीजल और ATF के निर्यात पर लगने वाली स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी (SAED) में बढ़ोतरी की है. वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें तत्काल प्रभाव से लागू कर दी गई हैं.

सरकार ने डीजल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क को 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया है. यानी कंपनियों को अब हर लीटर डीजल के निर्यात पर पहले से अधिक टैक्स देना होगा.

एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर सबसे ज्यादा बढ़ोतरी की गई है. इसका शुल्क 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 12.5 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है.

सरकार ने पेट्रोल के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है. यह पहले की तरह 1.5 रुपये प्रति लीटर पर ही बना हुआ है.

सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में पेट्रोलियम उत्पादों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करना है. अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें बढ़ने पर कंपनियां अधिक मुनाफे के लिए निर्यात बढ़ा सकती हैं.

विंडफॉल टैक्स वह अतिरिक्त कर होता है जो सरकार उन कंपनियों पर लगाती है जिन्हें वैश्विक परिस्थितियों के कारण असामान्य या अतिरिक्त मुनाफा होता ह.। तेल और गैस कंपनियों पर यह टैक्स तब लगाया जाता है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज बढ़ोतरी होती है.

केंद्र सरकार हर 15 दिन में कच्चे तेल, पेट्रोल, डीजल और ATF की औसत अंतरराष्ट्रीय कीमतों का आकलन करती है. इसी आधार पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी को बढ़ाने, घटाने या यथावत रखने का फैसला लिया जाता है.

फिलहाल यह फैसला निर्यात शुल्क से जुड़ा है, इसलिए सीधे तौर पर घरेलू पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर तत्काल असर पड़ने की संभावना कम है.

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