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वंदे मातरम पर संसद में मचेगा बवाल, केंद्र लाएगी राष्ट्रगान पर रोक को हटाने का प्रस्ताव; ममता और कांग्रेस लाल-क्या है पूरा विवाद?

केंद्र सरकार साल 2012 में यूपीए सरकार के दौरान वंदे मातरम पर लगी रोक को हटाने की मांग करेगी. ताकि 'वंदे मातरम/जय हिंद' को संसद व सार्वजनिक मामलों में यूज करने की लोगों को आजादी मिले. सरकार का कहना है कि “राष्ट्र गान के नारे स्वतंत्रता संग्राम व राष्ट्र-भावना का प्रतीक थे और युवाओं को इसकी पूरी समझ होनी चाहिए.

वंदे मातरम पर संसद में मचेगा बवाल, केंद्र लाएगी राष्ट्रगान पर रोक को हटाने का प्रस्ताव; ममता और कांग्रेस लाल-क्या है पूरा विवाद?
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संसद का शीतकालीन सत्र एक दिसंबर से शुरू होगा. उससे पहले केंद्र और विपक्षी पार्टियों ने अपने-अपने म्यान से तलवार निकाल ली हैं. इस बार 'वंदे मातरम' और 'एसआईआर' पर बवाल के संकेत अभी मिलने लगे हैं. एक तरफ केंद्र सरकार संसद में वंदे मातरम पर यूपीए सरकार के रोक को हटाने के लिए बहस कराने की योजना बना रही है, दूसरी तरफ विपक्ष राज्यसभा की ओर से ‘वंदे मातरम’ व ‘जय हिंद’ जैसे नारे/गीतों पर लगी रोक हटाने का मुद्दा उठाएगी. विपक्ष की एसआईआर के मसले पर भी सरकार को घेरने की तैयारी है. यानी संसद का शुरुआती सत्र इस बार फिर विवाद की भेंट चढ़ सकता है. विपक्षी दलों ने इसे लोकतांत्रिक आजादी व संवेदनशीलता दोनों पर हमला बताया है. जबकि सरकार रविवार को सर्वदलीय बैठक में विपक्षी दलों के नेताओं से इस मसले पर चर्चा करेगी.

क्या है पूरा मुद्दा?

वंदे मातरम विवाद का संकेत उस समय ही मिल गया था, जब Rajya Sabha Secretariat ने सांसदों को निर्देश दिया था कि शीतकालीन सत्र के दौरान सांसद सदन के अंदर थैंक्यू, धन्यवाद, जय हिंद और वंदे मातरम या अन्य किसी भी नारे नहीं लगाएंगे. इस पर रोक लगाने की बात कही गई. इस निर्देश का विपक्ष ने विरोध किया. विपक्षी दलों ने कहा कि यह व्यवस्था लोकतांत्रिक स्वतंत्रता व अभिव्यक्ति की आजादी पर चोट है.

वंदे मातरम - सरकार बहस के लिए लाएगी प्रस्ताव

अब खबर है कि शीतकालीन सत्र में सरकार वंदे मातरम के मसले पर बहस कराएगी. इसके लिए सत्ता पक्ष की ओर से एक प्रस्ताव लाई जा सकती है, जिसके साल 2012 में यूपीए सरकार के दौरान वंदे मातरम पर लगी रोक को हटाने की मांग होगी. ताकि 'वंदे मातरम/जय हिंद' को संसद व सार्वजनिक मामलों में यूज करने की लोगों को आजादी मिले. सरकार का कहना है कि “राष्ट्र गान के नारे स्वतंत्रता संग्राम व राष्ट्र-भावना का प्रतीक थे और युवाओं को इसकी पूरी समझ होनी चाहिए.

दरअसल, शीतकालीन सत्र के दौरान केंद्र सरकार यूपीए सरकार के दौरान 2012 में 'वंदे मातरम' पर लगी रोक को ऑब्जेक्शन लिस्ट से हटाने का प्लान बना रही है. UPA की सरकार ने वंदे मातरम को 'क्या करें और क्या न करें' के नियमों में डाला था. वंदे मातरम नेशनल सॉन्ग है जो अंग्रेजों के खिलाफ भारत की लड़ाई की पहचान थी. अब यही मसला सरकार और विपक्ष के बीच लड़ाई का सेंटर बन गया है.

इससे पहले 2012 में यूनाइटेड प्रोग्रेसिव अलायंस (UPA) ने 'क्या करें और क्या न करें' के नियमों में डाला था. उस समय राज्यसभा के चेयरमैन हामिद अंसारी थे और TMC भी UPA का हिस्सा थी.

केंद्र के लिए कमिटमेंट दिखाने का मौका

दूसरी तरफ सरकारी पक्ष का कहना है कि किसी भी हाल में सदन की कार्यवाही वंदे मातरम गाकर खत्म होती है, लेकिन राष्ट्रगीत को बैन लिस्ट में शामिल करना भी गलत है और रेलिवेंट भी नहीं है. सरकार का तर्क है कि संविधान दिवस के 75 साल पूरे होने पर, यह बदलाव संविधान का सम्मान करने और उसे महत्व देने के सरकार के कमिटमेंट को दिखाएगा.

कब और कहां पर हुए विवाद

साल 2017 में उत्तर प्रदेश में वंदे मातरम को लेकर विवाद हुआ था. कई शहरों में इसको गाए जाने को लेकर वाद-विवाद होने लगा था. खासकर इलाहाबाद (अब प्रयागराज) और मेरठ नगर निगम में इसको गाने को लेकर विवाद हुआ था.

साल 2023 में भी महाराष्ट्र में वंदे मातरम को लेकर विवाद हुआ था. तब भी अबु आजमी ने ही राज्य विधानसभा में वंदे मातरम गाने से इनकार किया था. उनका तर्क वही था कि अल्लाह के अलावा इस्लाम में किसी और के आगे झुकने की इजाजत नहीं है.

किरेन रिजिजू ने क्या कहा?

27 नवंबर को द इंडियन एक्सप्रेस के आइडिया एक्सचेंज सेशन में केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा, 'किसी भी संवैधानिक अथॉरिटी, जो साफ तौर पर एक ऑटोनॉमस बॉडी (EC) है, उसके बारे में चर्चा करना ठीक नहीं है. पहली बात तो यह है कि सरकार उस अथॉरिटी की तरफ से बात नहीं कर सकती. मान लीजिए आप सुप्रीम कोर्ट के कामकाज पर चर्चा करना चाहते हैं, यह ज्यूडिशियल रिफॉर्म्स से अलग है. इसलिए, जब मामले सब-ज्यूडिस हों या इलेक्शन कमीशन और कोर्ट से जुड़े मामले हों, तो स्टैंड यह रहा है कि क्योंकि वे ऑटोनॉमस संवैधानिक बॉडी हैं, इसलिए उन पर सदन में तब तक चर्चा नहीं की जा सकती जब तक कि यह किसी रिफॉर्म से संबंधित न हो, जिसे सरकार हमेशा ला सकती है. किरण रिजिजू ने आगे कहा, 'अगर इस मामले (SIR) पर चर्चा करनी है, तो विषय को और बढ़ाना होगा, (जैसे) एक सुधार हम इस बारे में सोच सकते हैं.'

सरकार के पास एक नहीं कई एजेंडा

किरेन रिजिजू ने कहा कि सरकार के पास शीतकालीन सत्र के लिए एक भारी सुधार एजेंडा है. BJP और उसके सहयोगी परमाणु ऊर्जा, उच्च शिक्षा, राष्ट्रीय राजमार्ग और बीमा जैसे क्षेत्रों में सुधारों को आगे बढ़ाने की उम्मीद कर रहे हैं. जबकि हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बिल 2025, एक हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया बनाने के लिए है जो उच्च शिक्षा, अनुसंधान और वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों में मानकों का समन्वय और निर्धारण करेगा, इंश्योरेंस लॉज (अमेंडमेंट) बिल का मकसद बीमा क्षेत्र की पहुंच को गहरा करना, विकास को तेज़ करना और व्यापार करने में आसानी को बढ़ाना है.

नेशनल हाईवे बिल में संशोधन का मकसद राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए तेज और पारदर्शी भूमि अधिग्रहण को आसान बनाना है, जबकि एटॉमिक एनर्जी बिल में प्रस्तावित बदलावों का मकसद गैर-सरकारी संस्थाओं को न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया के साथ परमाणु ऊर्जा संयंत्र चलाने की अनुमति देना है.

हमसे जो टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा - ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से जब राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी बुलेटिन पर राय पूछी गई तो वह भड़क गईं। वंदे मातरम और जय हिंद के नारे को लेकर पूछे जाने पर उन्होंने कहा- क्यों नहीं बोलेंगे? मुख्यमंत्री ममता ने वंदे मातरम और जय हिंद को लेकर सवाल पर कहा, क्यों नहीं बोलेंगे? हम जय बांग्ला, बांग्ला में बोलते हैं. वंदे मातरम कहते हैं। यह हमारा आजादी का नारा है। राष्ट्रगीत है. जय हिंद नेताजी (सुभाष चंद्र बोस) का नारा ह. जिस नारे को लेकर हम लोगों ने लड़ा है. यह हमारे देश का नारा है. इससे जो टकराएगा, चूर-चूर हो जाएगा. राष्ट्रीय गीत एक बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लिखा था, जिस पर सदन में नारे लगाने पर रोक लगाकर बीजेपी ने ममता बनर्जी को खुद पर बंगाल विरोधी होने का आरोप लगाने का मौका दे दिया.

इस बार कांग्रेस का दिखेगा अलग रुख

कांग्रेस जो अक्सर राष्ट्रवाद की बहस में गलत पक्ष पर रही है, वह भी इस पर सरकार पर हमला करने के मूड में है. लेकिन सरकार के पास एक प्लान है. वह एक छोटी अवधि की चर्चा करने की योजना बना रही है, ताकि वो विपक्ष के झांसे को भी बेनकाब कर सके.

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