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नॉन स्टॉप होगी बिजली की सप्लाई, लेकिन खतरे भी कम नहीं, मोदी सरकार के Atomic Energy Bill 2025 में क्या-क्या?

Atomic Energy Bill 2025 से निजी कंपनियों की एंट्री के साथ बिजली सप्लाई नॉन-स्टॉप होगी, लेकिन सुरक्षा, दायित्व और रेडियोएक्टिव कचरे पर चिंताएं भी बढ़ेंगी. हालांकि, मोदी सरकार का Atomic Energy Bill 2025 परमाणु क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलेगा, जिससे लोगों को निर्बाध बिजली मिलेगी. इस बिल के बारे में जानें सबकुछ .

नॉन स्टॉप होगी बिजली की सप्लाई, लेकिन खतरे भी कम नहीं, मोदी सरकार के Atomic Energy Bill 2025 में क्या-क्या?
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मोदी सरकार शीतकालीन सत्र के दौरान संसद में Atomic Energy Bill 2025 लाने की तैयारी में है, जिसके बाद भारत का परमाणु ऊर्जा सेक्टर बड़े बदलावों की दहलीज पर खड़ा हो जाएगा. दावा है कि इस कदम से देश को 24×7 नॉन-स्टॉप बिजली मिलेगी, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी और निजी निवेश से SMR जैसे आधुनिक रिएक्टर तेजी से तैयार होंगे. लेकिन दूसरी ओर सुरक्षा मानकों, रेडियोएक्टिव कचरे, मुआवजा कानून और विदेशी कंपनियों की भागीदारी को लेकर गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं. सरकार का तर्क है कि यह एनर्जी ट्रांजिशन की दिशा में ऐतिहासिक कदम है, जबकि विपक्ष इसे खतरों और अस्पष्टताओं से भरा निर्णय बता रहा है.

Atomic Energy Bill 2025 क्या है?

एटॉमिक एनर्जी बिल केंद्र सरकार की ओर से एक प्रस्तावित कानून है, जिसे 2025 के संसदीय सत्र (शीतकालीन सत्र) में पेश किया जाना है. इसे पेश करने के पीछे मुख्य मकसद भारत में परमाणु ऊर्जा (atomic energy) के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर बदलाव और निजी क्षेत्र (private sector) को काम करने की इजाजत देना है. वर्तमान में, पुराने कानून Atomic Energy Act 1962 के तहत केवल राज्य या केंद्र सरकार से सम्बद्ध सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को परमाणु पावर प्लांट चलाने की इजाजत है. इस Bill में यह व्यवस्था बदलने का प्रस्ताव है. ताकि निजी कंपनियां और विदेशी कंपनियां भी परमाणु ऊर्जा परियोजनाओं में भाग ले सकें.

एटॉमिक एनर्जी बिल के 15 प्रमुख बिंदु

1. एटॉमिक एनर्जी सेक्टर निजी क्षेत्र के लिए खोलना: पहले केवल सार्वजनिक (सरकारी) कंपनियां परमाणु ऊर्जा उत्पादन कर सकती थीं। इस Bill के बाद निजी कंपनियां भी परमाणु पावर प्लांट चला सकेंगी. इससे इस क्षेत्र में निवेश, प्रतिस्पर्धा, प्रौद्योगिकी के विस्तार में तेजी आएगी.

2. स्वदेशी और छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर: इस Bill से निजी व सार्वजनिक कंपनियों के लिए SMRs (Small Modular Reactors) स्थापित करने और उनका विकास करने की इजाजत देगा. सरकार ने 2025-26 के बजट में इसके लिए 20,000 करोड़ रुपये का परमाणु ऊर्जा मिशन (Nuclear Energy Mission) घोषित किया है.

3. ऊर्जा लक्ष्य : भारत सरकार का लक्ष्य है कि 2047 तक देश में 100 गिगावाट (GW) परमाणु ऊर्जा क्षमता हो। Bill इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए है. इसके तहत न सिर्फ बड़े पावर प्लांट बल्कि SMRs और अन्य आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा मिलेगा.

4. कानूनी ढांचे में संशोधन : 1962 के पुराने Atomic Energy Act में संशोधन प्रस्तावित है. ताकि निजी निवेश व भागीदारी को वैध बनाया जा सके. साथ ही, पहले से लागू Civil Liability for Nuclear Damage Act, 2010 (CLND Act) में संशोधन की आवश्यकता जताई गई है. ताकि जिम्मेदारी, सुरक्षा व मुआवजे का यथासंभव स्पष्ट ढांचा हो.

5. स्वच्छ ऊर्जा में बढ़ावा : परमाणु ऊर्जा, पारंपरिक जीवाश्म ईंधन (कोयला, गैस आदि) के मुकाबले कम कार्बन उत्सर्जन वाली है. निजी निवेश व विस्तार से स्वच्छ ऊर्जा (clean energy) लक्ष्य को बढ़ावा मिलेगा.

6. बिजली आपूर्ति में स्थिरता: परमाणु ऊर्जा प्लांट अधिकांश base-load बिजली देते हैं. मतलब है कि बिजली की मांग-पूर्ति में निरंतरता बनी रहेगी. विशेषकर रात या गर्मी के दिनों में.

7. निवेश एवं आर्थिक वृद्धि : निजी कंपनियों की भागीदारी से पूंजी निवेश, रोजगार, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और स्थानीय उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा.

8. प्रौद्योगिकी और नवाचार : SMRs और नए रिएक्टर डिजाइन के लिए अतिरिक्त रिसर्च व विकास (R&D) होगी, जिससे भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में तकनीकी रूप से मजबूत बनेगा.

9. भूमि अधिग्रहण - जमीनी प्रक्रिया : न्यूक्लियर प्लांट के लिए भूमि, परमिट, पर्यावरण मंजूरी आदि प्रक्रियाओं में सुधार व पारदर्शिता हो सकती है. ताकि निजी कंपनियां सहजता पूर्वक शामिल हो सके.

10. सुरक्षा, आपदा प्रबंधन व आपराधिक दायित्व क्लीयरेंस : CLND Act में संशोधन की मांग इसलिए है ताकि किसी परमाणु दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा, जवाबदेही और जिम्मेदारी तय हो। यह निवेशकों और जनता दोनों के लिए अहम है।

11. रियल-एस्टेट व पर्यावरणीय निगरानी : पावर प्लांट व SMRs के निर्माण से पर्यावरण, भूमि उपयोग व स्थानीय समुदायों पर असर हो सकता है. Bill व नियमों के तहत इन पहलुओं की निगरानी व मानक स्थापित करना महत्वपूर्ण होगा.

12. नए संस्थागत मॉडल : सार्वजनिक + निजी की साझेदारी से परमाणु पावर प्रोजेक्ट (PPP मॉडल) को बढ़ावा मिलेगा. इससे फाइनेंस, दक्षता व गति में सुधार संभव होगा.

13. विदेशी भागीदारी और तकनीकी सहयोग: यदि Bill पास हुआ, तो विदेशी कंपनियां या अंतरराष्ट्रीय nuclear technology providers भारत में निवेश/सहयोग कर सकती हैं, जिससे टेक्नोलॉजी एक्सचेंज संभव.

14. ऊर्जा सुरक्षा व आत्मनिर्भरता : परमाणु ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ने से भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी, और जीवाश्म ईंधन आयात पर निर्भरता कम होगी.

15. समर्थन व विरोध : निजी क्षेत्र की भागीदारी इसमें बढ़ाने से सामाजिक और राजनीतिक सुरक्षा पर बहस को बढ़ावा मिलेगा. यह कदम स्वच्छ ऊर्जा व विकास के लिए सकारात्मक है, लेकिन सुरक्षा, परमाणु दुर्घटना, पर्यावरण, जमीन अधिग्रहण व सार्वजनिक संस्कृति जैसे पहलूओं पर बहस जरूरी होगी.

निजी क्षेत्र को साझीदार बनाने से कितना बढ़ेगा जोखिम?

परमाणु दुर्घटना का जोखिम हमेशा रहता है, चाहे निजी हो या सरकारी. जैसे चेर्नोबिल, फुकुशिमा दुर्घटना में सरकार क्षेत्र में हो चुके है, जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. प्राइवेट कंपनियां मुनाफे के लिए कॉस्ट-कटिंग कर सकती हैं.इससे सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है. भारत के पास अभी तक हाई-लेवल वेस्ट के निपटान की पुख्ता व्यवस्था सीमित है. ऐसे में खतरे की जिम्मेदारी कौन लेगा. किसी दुर्घटना में मुआवजा कौन देगा? निजी कंपनी, इंश्योरर या फिर यह विवादित मुद्दा होगा. रेडिएशन, जमीन का उपयोग, पानी की खपत, जैव विविधता पर प्रभाव भी प्रमुख खतरों में शामिल हैं. न्यूक्लियर प्लांट के लिए ज्यादा जमीन चाहिए, जिससे ग्रामीण विरोध या राजनीतिक तनाव पैदा हो सकता है. आतंकवादी हमलों साइबर हमलों का जोखिम बने रहेंगे.

विपक्ष ने प्राइवेट - विदेशी भागीदारी पर जताई सख्त आपत्ति

विपक्ष का कहना है कि परमाणु क्षेत्र को प्राइवेट/विदेशी कंपनियों को देना संवेदनशील क्षेत्र को खतरे में डाल सकता है. कुछ दल इसे सरकार की कॉर्पोरेट-फ्रेंडली पॉलिसी बताते हैं. कहते हैं कि राष्ट्रीय संसाधन निजी हाथों में जा रहे हैं. विपक्ष का कहना है कि निजी कंपनियों को बचाने के लिए CLND Act में छूट दी जा सकती है, जो जनता के हित के खिलाफ है. जमीन अधिग्रहण से लोगों के विस्थापन का समाधान सरकार के पास नहीं है. विपक्ष आरोप लगाता है कि Bill की ड्राफ्टिंग में खुली चर्चा/लोक सुनवाई नहीं कराई गई है. विरोधी दलों को विदेशी कंपनियों की भागीदारी पर भी आपत्ति है. न्यूक्लियर सेक्टर रणनीतिक मसला है. विदेशी कंपनियों को अनुमति देना खतरनाक है.

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