Begin typing your search...

चौथी पंक्ति से CM कुर्सी तक की कहानी: जिस नेहरू स्टेडियम में जयललिता के सामने हुए ‘अपमानित’, विजय ने ली वहीं CM पद की शपथ

13 साल पहले जिस जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में 2013 में विजय को पीछे बैठाया गया था, उसी मंच पर उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर इतिहास रच दिया.

चौथी पंक्ति से CM कुर्सी तक की कहानी: जिस नेहरू स्टेडियम में जयललिता के सामने हुए ‘अपमानित’, विजय ने ली वहीं CM पद की शपथ
X

तमिलनाडु की पूर्व सीएम J. Jayalalithaa और C. Joseph Vijay के बीच 2013 में जो दूरी दिखी थी, उसे उस समय बहुत लोगों ने सिर्फ फिल्म इंडस्ट्री का एक छोटा विवाद माना था. लेकिन समय बीतने के साथ वही घटना तमिलनाडु की राजनीति और सिनेमा के रिश्ते की सबसे चर्चित कहानियों में बदल गई. आज जब विजय ने चेन्नई के उसी जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तो 13 साल पुरानी वह तस्वीर फिर चर्चा में आ गई, जिसमें उन्हें पीछे की पंक्ति में बैठा देखा गया था.

दरअसल, सितंबर 2013 में भारतीय और तमिल सिनेमा के 100 वर्ष पूरे होने के मौके पर चेन्नई में भव्य समारोह आयोजित किया गया था. यह सिर्फ फिल्मी कार्यक्रम नहीं था, बल्कि दक्षिण भारत की सांस्कृतिक और राजनीतिक ताकत का प्रदर्शन भी माना जा रहा था. देशभर की बड़ी फिल्म हस्तियां वहां मौजूद थीं. उस समय जयललिता तमिलनाडु की सबसे ताकतवर नेता थीं और पूरा आयोजन लगभग सत्ता और सिनेमा के मेल का प्रतीक बन गया था.

सिनेमा का शताब्दी वर्ष क्यों बना था विवाद का विषय?

इसी समारोह में विजय की सीटिंग को लेकर विवाद खड़ा हुआ. मीडिया रिपोर्ट्स और फैंस के दावों के मुताबिक, विजय को आगे की VIP कतारों की बजाय पीछे की पंक्तियों में बैठाया गया. उनके समर्थकों ने इसे सामान्य प्रोटोकॉल नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया राजनीतिक अपमान का संकेत माना. खास बात यह रही कि उस समय विजय लगातार सुपरस्टार बन रहे थे और युवाओं के बीच उनकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही थी.

उस दौर में विजय और AIADMK सरकार के बीच तनाव पहले से चल रहा था. इसकी सबसे बड़ी वजह उनकी फिल्म Thalaivaa थी. फिल्म के पोस्टर और कहानी में नेतृत्व तथा राजनीतिक उभार की झलक देखी जा रही थी. तमिलनाडु में फिल्म की रिलीज को लेकर कई बाधाएं सामने आईं. थिएटर मालिकों और वितरकों पर दबाव की चर्चाएं भी हुईं. विजय ने उस समय खुलकर टकराव का रास्ता नहीं चुना, लेकिन राजनीतिक गलियारों में यह संदेश साफ चला गया कि सत्ता उन्हें लेकर सहज नहीं है.

घटना क्यों बना सिस्टम बनाम विजय के अपमान का प्रतीक?

नेहरू स्टेडियम वाले कार्यक्रम ने इस धारणा को और मजबूत किया. कहा जाता है कि जब अभिनेता विक्रम ने विजय को पीछे बैठा देखा, तो वह खुद आगे की सीट छोड़कर उनके पास जाकर बैठे. कुछ रिपोर्ट्स में सिमरन और ऐश्वर्या रजनीकांत के भी उनके समर्थन में पीछे बैठने की चर्चा हुई. भले ही इन दावों की आधिकारिक पुष्टि कभी नहीं हुई, लेकिन सोशल मीडिया और फैन कल्चर में यह घटना “सिस्टम बनाम विजय” के प्रतीक की तरह याद की जाने लगी.

तमिलनाडु में सिनेमा सिर्फ मनोरंजन क्यों नहीं?

उसी समारोह में जयललिता ने अपने भाषण में बिना नाम लिए DMK और करुणानिधि परिवार पर हमला बोला. उन्होंने कहा कि तमिल फिल्म उद्योग लंबे समय तक “एक परिवार के प्रभाव” में रहा, लेकिन AIADMK सरकार आने के बाद उद्योग को स्वतंत्र माहौल मिला. उनके बयान को सीधे तौर पर एम करुणानिधि परिवार पर निशाना माना गया. इससे यह साफ दिखा कि तमिलनाडु में सिनेमा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि सीधी राजनीतिक ताकत भी है.

क्या विजय के मन में तभी से है सत्ता विरोधी लहर?

विजय ने उस दौर में सार्वजनिक तौर पर बहुत कम प्रतिक्रिया दी. लेकिन उनकी फिल्मों, भाषणों और बाद की राजनीतिक गतिविधियों में धीरे-धीरे सत्ता विरोधी स्वर दिखाई देने लगे. उन्होंने खुद को “एंटी-एस्टैब्लिशमेंट” चेहरे के रूप में तैयार किया. युवाओं और पहली बार वोट देने वाले वर्ग में उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई.

समय बदला, राजनीति बदली और तमिलनाडु का पूरा पावर स्ट्रक्चर भी बदल गया. जयललिता अब इस दुनिया में नहीं हैं. All India Anna Dravida Munnetra Kazhagam लगातार कमजोर हुई और द्रविड़ राजनीति के पारंपरिक समीकरणों में दरारें दिखने लगीं. इसी बीच विजय ने अपनी राजनीतिक जमीन तैयार की और खुद को सिर्फ अभिनेता नहीं, बल्कि वैकल्पिक नेतृत्व के रूप में पेश करना शुरू किया.

आज उसी नेहरू स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते हुए विजय की तस्वीर को उनके समर्थक “राजनीतिक रिडेम्प्शन” की तरह देख रहे हैं. जिस मंच पर कभी उन्हें पीछे बैठाने की चर्चा हुई थी, उसी मंच पर अब वह सत्ता के केंद्र में खड़े दिखाई दिए. तमिल राजनीति में यह सिर्फ एक शपथ ग्रहण नहीं, बल्कि सिनेमा, सत्ता और समय के बदलते समीकरणों का प्रतीक बन गया है.

अगला लेख