तमिलनाडु का बदल गया पावर बैलेंस: क्या करेंगे DMK और AIADMK नेता, अब राजनीति में किसकी चलेगी चाल?
तमिलनाडु में बदले सत्ता समीकरण के बाद DMK, AIADMK और TVK की रणनीति क्या होगी और नए राजनीतिक माहौल में किसका असर ज्यादा रहेगा.
विधानसभा चुनाव 2026 ने Tamil Nadu की राजनीति को पूरी तरह से बदलकर रख दिया. हाल के सत्ता परिवर्तन और नए नेतृत्व के उभार की वजह से ऐसा हुआ है. 59 साल बाद गैर द्रविडियन पार्टी TVK को सरकार बनाने का मौका मिला है. शनिवार को थलापति विजय तमिलनाडु के सीएम बन गए. पारंपरिक रूप से राज्य की राजनीति दो ध्रुवों - डीएमके (DMK) और एआईएडीएमके (AIADMK) के बीच घूमती रही है, लेकिन अब नए राजनीतिक खिलाड़ी और बदलते सामाजिक समीकरणों ने स्थिति को और जटिल बना दिया. विधानसभा में विधायकों का झुकाव पहले की तुलना में ज्यादा अस्थिर और मुद्दा- आधारित दिख रहा है, जिससे गठबंधन राजनीति की भूमिका बढ़ गई है.
DMK के पास मजबूत संगठन और शहरी-ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में पकड़ है. जबकि AIADMK के भीतर नेतृत्व संकट और गुटबाजी ने उसकी ताकत को कमजोर किया है. इसी बीच नए क्षेत्रीय और युवा नेतृत्व ने वोट बैंक को और विभाजित कर दिया है, जिससे किसी एक पार्टी के लिए स्पष्ट बहुमत बनाना चुनौतीपूर्ण हो गया. इसका लाभ टीवीके को मिला और उसके नेता विजय ने आज तमिलनाडु के सीएम के रूप में शपथ ली. प्रदेश में राज्यपाल ने उन्हें शपथ दिलाई.
अब क्या है तमिलनाडु में सत्ता का समीकरण?
तमिलनाडु विधानसभा का मौजूदा सत्ता समीकरण पूरी तरह बहु-ध्रुवीय बन चुका है. DMK के पास अभी भी राज्य का सबसे बड़ा एकीकृत विधायकों का आधार माना जाता है. खासकर चेन्नई, डेल्टा और दक्षिणी जिलों में. वहीं AIADMK का आधार पश्चिमी और कुछ ग्रामीण क्षेत्रों में बचा हुआ है, लेकिन लगातार टूटन और नेताओं के अलग होने से उसकी संख्या में गिरावट आई है. इसके अलावा, छोटे दल जैसे कांग्रेस, वामपंथी दल और क्षेत्रीय पार्टियां किंगमेकर की भूमिका में आ गई हैं.
विधानसभा में किसी भी बड़े फैसले के लिए अब केवल दो प्रमुख दलों का समर्थन पर्याप्त नहीं रह गया है, बल्कि गठबंधन संतुलन बेहद जरूरी हो गया है. विधायकों का झुकाव अब पूरी तरह पार्टी अनुशासन पर आधारित नहीं रहकर स्थानीय विकास, फंडिंग और क्षेत्रीय प्रभाव पर निर्भर करता दिख रहा है. यही वजह है कि सत्ता समीकरण बार-बार बदलने की स्थिति में रहता है और कोई भी पार्टी स्थायी बढ़त नहीं बना पा रही है.
सीएम विजय की पांच चुनौतियां?
नए मुख्यमंत्री M. K. Stalin या बदलते नेतृत्व के संदर्भ में प्रशासनिक प्राथमिकताएं मुख्य रूप से विकास, रोजगार, सामाजिक न्याय, इंफ्रास्ट्रक्चर और कानून-व्यवस्था पर केंद्रित मानी जाती हैं. सरकार की पहली प्राथमिकता प्रदेश में निवेश आकर्षित करना और उद्योगों को स्थिर माहौल देना है. दूसरी प्राथमिकता ग्रामीण विकास और कृषि सुधार है. तीसरी प्राथमिकता शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करना है. चौथी प्राथमिकता शहरी विकास और ट्रैफिक-इंफ्रास्ट्रक्चर सुधार है. पांचवीं प्राथमिकता कल्याणकारी योजनाओं को जारी रखना है.
चुनौतियों में सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी दबाव और गठबंधन अस्थिरता है. दूसरी चुनौती वित्तीय संसाधनों की कमी है. तीसरी चुनौती बेरोजगारी और युवाओं की असंतुष्टि है. चौथी चुनौती कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा की आशंका है. पांचवीं चुनौती केंद्र-राज्य संबंधों में संतुलन बनाए रखना है.
AIADMK की आगामी रणनीति क्या?
एआईएडीएमके सत्ता से बाहर होने के बाद खुद को फिर से मजबूत विपक्ष के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रही है. उसकी रणनीति का मुख्य आधार संगठन पुनर्गठन, पुराने नेताओं को एकजुट करना और ग्रामीण वोट बैंक को वापस लाना है. पार्टी नए गठबंधन विकल्पों पर भी विचार कर रही है ताकि DMK के खिलाफ मजबूत मोर्चा बनाया जा सके.
पार्टी की चुनौतियों में सबसे बड़ी चुनौती नेतृत्व संकट है, क्योंकि पार्टी में स्थायी और सर्वमान्य चेहरा अभी तक नहीं उभर पाया है. दूसरी चुनौती गुटबाजी और आंतरिक टूटन है. तीसरी चुनौती DMK की मजबूत कल्याणकारी छवि को चुनौती देना है. चौथी चुनौती युवा वोटरों को आकर्षित करना है. पांचवीं चुनौती चुनावी फंडिंग और संगठन विस्तार की कमी है. अगर AIADMK इन चुनौतियों को पार नहीं कर पाती, तो उसका पारंपरिक वोट बैंक और कमजोर हो सकता है.
DMK प्रदेश की राजनीति में कैसे बनाए रखेगी पकड़?
Dravida Munnetra Kazhagam अपनी सत्ता बनाए रखने के लिए कल्याणकारी योजनाओं, सामाजिक न्याय और क्षेत्रीय विकास मॉडल पर ध्यान केंद्रित कर रही है. पार्टी का फोकस महिलाओं, पिछड़े वर्गों और शहरी गरीबों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर है. साथ ही DMK केंद्र सरकार के साथ राजनीतिक संतुलन बनाकर फंड और परियोजनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश करती है.
DMK की रणनीति में सबसे बड़ा हथियार उसका मजबूत संगठन और कैडर नेटवर्क है. लेकिन उसे भ्रष्टाचार के आरोप, एंटी-इनकम्बेंसी और विपक्ष के हमलों से लगातार चुनौती मिलती है. पार्टी का लक्ष्य है कि वह खुद को “स्थिर सरकार” और “विकास केंद्रित प्रशासन” के रूप में पेश करे ताकि मतदाताओं का भरोसा बनाए रखा जा सके.
तमिलनाडु में DMK, AIADMK और TVK का प्रभाव
तमिलनाडु की राजनीति में अब तीन प्रमुख ताकतें DMK, AIADMK और नई उभरती पार्टी Tamizhaga Vetri Kazhagam (TVK) उभर रही हैं. DMK के पास वर्तमान में सबसे मजबूत प्रशासनिक और संगठनात्मक पकड़ है. AIADMK अभी भी ग्रामीण और पश्चिमी क्षेत्रों में प्रभाव बनाए हुए है, लेकिन उसकी स्थिति कमजोर हुई है.
TVK युवाओं और नए मतदाताओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रही है, खासकर शहरी क्षेत्रों में इसका असर बढ़ रहा है. हालांकि उसके पास अभी संगठन और जमीनी नेटवर्क की कमी है. फिलहाल सबसे ज्यादा प्रभाव DMK का माना जा रहा है, लेकिन अगर TVK अपना संगठन मजबूत करती है तो आने वाले वर्षों में यह त्रिकोणीय मुकाबला बन सकता है. AIADMK के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण है क्योंकि उसे दोनों तरफ से दबाव का सामना करना पड़ रहा है.
बैसाखियों के सहारे टीवीके की सरकार कब तक?
तमिलनाडु में टीवीके प्रमुख विजय ने सरकार तो बना ली है, लेकिन अहम सवाल सरकार के स्थायित्व को लेकर है. विधानसभा चुनाव में टीवीके ने 234 में से तमिलनाडु की 107 सीटों पर जीत दर्ज की थी. राज्य में सरकार बनाने के लिए उन्हें 118 विधायक चाहिए थे. ऐसे में टीवीके को कांग्रेस (5 सीटें), CPI (2 सीटें), CPI-M (2 सीटें), VCK (2 सीटें) और IUML (2 सीटें) का समर्थन मिला. यानी विजय के पास 120 विधायकों को समर्थन है.
सरकार गठन के लिए विजय ने 9 मई को लोकभवन में तमिलनाडु के गवर्नर से मुलाकात की और उन्हें टीवीके के लीडर के तौर पर अपने चुनाव की जानकारी देते हुए एक लेटर दिया था. जिसके बाद तमिलनाडु के गवर्नर ने विजय को मुख्यमंत्री नियुक्त किया और उन्हें सरकार बनाने के लिए इनवाइट किया था. राज्यपाल ने विजय को 13 मई 2026 को या उससे पहले विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के लिए कहा है. शनिवार को विजय ने सीएम पद की शपथ ले ली. अब उनके पास चुनौती बहुमत साबित करने और सरकार को चलाने की है.




