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जिस पर कुंडी मारकर बैठी थी Mamata, उसी Chicken Neck पर शुभेंदु की बड़ी स्ट्राइक! अब चीन और बांग्लादेश का होगा इलाज

टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी की तत्कालीन सरकार ने जिस चिकननेक प्रोजेक्ट को रोके रखा था, उसे शुभेंदु सरकार ने मंजूरी दे दी. जानें चीन-बांग्लादेश सीमा पर इसका असर.

जिस पर कुंडी मारकर बैठी थी Mamata, उसी Chicken Neck पर शुभेंदु की बड़ी स्ट्राइक! अब चीन और बांग्लादेश का होगा इलाज
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( Image Source:  ChatGpt )

पश्चिम बंगाल में सत्ता बदलते ही सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकननेक’ को लेकर बड़ा रणनीतिक फैसला सीएम शुभेंदु सरकार ने आठ दिन के अंदर ले लिया है. जिस प्रोजेक्ट पर पूर्व मुख्यमंत्री Mamata Banerjee की सरकार लंबे समय से कुंडी मारकर बैठी हुई थी, उसी को नई Suvendu Adhikari सरकार ने केंद्र के हवाले कर दिया. अब इस बेहद संवेदनशील कॉरिडोर की 7 अहम सड़कों का विकास NHAI और NHIDCL जैसी केंद्रीय एजेंसियां करेंगी. यानी इस प्रोजेक्ट पर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी मोर्चा संभालेंगे. माना जा रहा है कि यह कदम चीन और बांग्लादेश बॉर्डर के पास भारत की सैन्य ताकत, लॉजिस्टिक्स और निगरानी क्षमता को कई गुना मजबूत करेगा. साथ ही बांग्लादेश और चीन के गुप्त एजेंडे को भी ध्वस्त करेगा.

आखिर क्या है ‘चिकननेक’ और क्यों है इतना अहम?

सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे ‘चिकननेक’ कहा जाता है, भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा का सबसे संवेदनशील गलियारा माना जाता है. करीब 22 किलोमीटर चौड़ा यह कॉरिडोर मुख्य भूमि भारत को पूर्वोत्तर के आठ राज्यों से जोड़ता है. यह इलाका सिक्किम, भूटान, नेपाल और बांग्लादेश के बेहद करीब पड़ता है. सामरिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर कभी चीन चुम्बी घाटी की ओर से सैन्य दबाव बनाता है तो यह कॉरिडोर सबसे बड़ा टारगेट बन सकता है. यही वजह है कि लंबे समय से केंद्र सरकार, इस क्षेत्र में मजबूत सड़क नेटवर्क और सैन्य इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करना चाहती थी.

ममता सरकार ने क्यों रोके रखा प्रोजेक्ट?

सूत्रों के मुताबिक, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय पिछले करीब एक साल से पश्चिम बंगाल सरकार से इन 7 सड़क हिस्सों को केंद्र के अधीन देने की मांग कर रहा था, लेकिन तत्कालीन ममता दीदी की सरकार ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया. आरोप लगते रहे कि राजनीतिक और प्रशासनिक अड़चनों की वजह से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण यह प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ पा रहा था. सत्ता परिवर्तन के बाद नई सरकार ने तेजी दिखाते हुए इन सड़क हिस्सों को NHAI और NHIDCL को सौंप दिया, ताकि उनका विकास राष्ट्रीय सुरक्षा मानकों के अनुसार हो सके.

किन इलाकों में होगा सबसे बड़ा असर?

केंद्र को सौंपी गई सड़कें दार्जिलिंग की पहाड़ियों, डुआर्स और उत्तरी बंगाल को राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क से जोड़ती हैं. ये सड़कें मालदा और मुर्शिदाबाद के जरिए बिहार-बंगाल कॉरिडोर को मजबूत करेंगी. इसके अलावा नदिया, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना होते हुए घोजाडांगा बॉर्डर तक पहुंचने वाले मार्ग भी बेहतर किए जाएंगे. इससे भारत-बांग्लादेश सीमा तक तेज कनेक्टिविटी बनेगी. सरकार की योजना इन सड़कों को ऑल-वेदर हाईवे, मजबूत पुलों और स्मार्ट निगरानी सिस्टम से लैस करने की है.

सेना के लिए यह फैसला गेमचेंजर कैसे?

डिफेंस एक्सपर्ट का मानना है कि इन सड़कों के विकास से भारतीय सेना की तैनाती, लॉजिस्टिक्स सप्लाई और रीइन्फोर्समेंट की गति कई गुना बढ़ जाएगी. संकट की स्थिति में भारी तोपें, टैंक और सैन्य वाहन तेजी से बॉर्डर तक पहुंचाए जा सकेंगे. चीन पिछले कुछ वर्षों में चुम्बी घाटी और तिब्बत क्षेत्र में तेजी से इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित कर रहा है. ऐसे में भारत के लिए चिकननेक को मजबूत करना बेहद जरूरी माना जा रहा था. अब केंद्रीय एजेंसियों के नियंत्रण में आने से सुरक्षा मानकों के हिसाब से तेजी से काम हो सकेगा और राज्य स्तर की राजनीतिक बाधाएं भी कम होंगी.

चीन और बांग्लादेश के लिए क्यों बढ़ सकती है परेशानी?

रणनीतिक जानकारों के मुताबिक, मजबूत सड़क नेटवर्क बनने के बाद चीन के लिए भविष्य में इस कॉरिडोर पर दबाव बनाना आसान नहीं रहेगा. बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए भारतीय सेना पूर्वोत्तर और सिक्किम-भूटान सेक्टर में तेजी से सैनिक और हथियार पहुंचा सकेगी. इसके साथ ही भारत की ‘Act East Policy’ को भी नई ताकत मिलेगी. स्थानीय अर्थव्यवस्था, व्यापार और बॉर्डर निगरानी मजबूत होने से चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के प्रभाव को संतुलित करने में भी मदद मिलेगी. सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अब ‘चिकननेक’ भारत की कमजोर कड़ी नहीं, बल्कि रणनीतिक सुरक्षा कवच बनने की दिशा में बढ़ रहा है.

केंद्र की चिकननेक को लेकर क्या है प्लान?

केंद्र सरकार सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी ‘चिकननेक’ को देश के सबसे मजबूत रणनीतिक और लॉजिस्टिक कॉरिडोर में बदलने की तैयारी में है. योजना के तहत इस 22 किलोमीटर चौड़े संवेदनशील गलियारे में आने वाली सड़कों को NHAI और NHIDCL के जरिए ऑल-वेदर हाईवे में बदला जाएगा. कई हिस्सों में सड़क चौड़ीकरण, मजबूत पुल, स्मार्ट सर्विलांस सिस्टम और तेज सैन्य मूवमेंट के लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा.

सरकार का फोकस दार्जिलिंग, डुआर्स, सिक्किम-भूटान बॉर्डर और भारत-बांग्लादेश सीमा तक कनेक्टिविटी मजबूत करने पर है. इस प्रोजेक्ट का मकसद संकट की स्थिति में सेना की तैनाती, हथियारों और लॉजिस्टिक्स सप्लाई को तेज करना है. साथ ही ‘Act East Policy’, बॉर्डर ट्रेड और पूर्वोत्तर राज्यों की कनेक्टिविटी को भी नई मजबूती देने की रणनीति बनाई गई है.

शुभेंदु अधिकारीममता बनर्जीनरेंद्र मोदी
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