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7 दिन में कितना बदल गया बंगाल? चलाओगे पत्थर तो जाओगे अंदर, ये 'दीदी नहीं दादा की दादागिरी' है- लाउडस्पीकर बवाल के बड़े Updates

पश्चिम बंगाल में भाजपा की सरकार को बने हुए सात दिन हो चुके हैं और ऐसे में भाजपा सरकार हर दिन कोई न कोई बड़ा फैसला ले रही है वहीं इस बीच बंगाल के आसनसोल में लाउडस्पीकर को लेकर लिए गए फैसले पर बवाल मचा हुआ था जिसमें अब 15 लोगों की गिरफ्तारी हुई तो वहीं पुलिस आगे की जांच कर रही है.

7 दिन में कितना बदल गया बंगाल? चलाओगे पत्थर तो जाओगे अंदर, ये दीदी नहीं दादा की दादागिरी है- लाउडस्पीकर बवाल के बड़े Updates
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पश्चिम बंगाल की राजनीति में पिछले सात दिन किसी राजनीतिक थ्रिलर से कम नहीं रहे. 9 मई को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद शुभेंदु अधिकारी ने जिस रफ्तार से फैसले लेने शुरू किए, उसने पूरे राज्य का सियासी तापमान बदल दिया. कहीं 'वंदे मातरम्' को लेकर चर्चा है, कहीं BSF को जमीन देने का फैसला सुर्खियों में है, तो कहीं लाउडस्पीकर विवाद ने सड़क से सोशल मीडिया तक माहौल गरमा दिया है.

अब बंगाल में सबसे ज्यादा चर्चा उस संदेश की हो रही है, जिसे लोग 'दीदी नहीं, दादा की दादागिरी' कहकर वायरल कर रहे हैं. आसनसोल में लाउडस्पीकर विवाद के बाद पुलिस चौकी पर हमला, पथराव, लाठीचार्ज और गिरफ्तारियों ने यह साफ कर दिया कि नई सरकार कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाने के मूड में है.

क्या है पूरा लाउडस्पीकर विवाद?

दरअसल नई सरकार ने राज्यभर में धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर की आवाज तय सीमा के भीतर रखने के निर्देश दिए. प्रशासन ने मंदिरों और मस्जिदों के प्रतिनिधियों के साथ बैठकें शुरू कीं ताकि ध्वनि प्रदूषण नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा सके. लेकिन आसनसोल के रेलपार इलाके में यह मामला अचानक तनाव में बदल गया. प्रशासनिक टीम जब स्थानीय लोगों को नई गाइडलाइन समझाने पहुंची, तभी अफवाहों का दौर शुरू हो गया. देखते ही देखते भीड़ जमा हो गई और माहौल बेकाबू हो गया.

आखिर आसनसोल में उस रात क्या हुआ?

शाम होते-होते रेलपार इलाके की पुलिस चौकी के बाहर भारी भीड़ जमा हो गई. आरोप है कि गुस्साई भीड़ ने पुलिस चौकी पर पथराव किया, वाहनों में तोड़फोड़ की और इलाके में आगजनी जैसी घटनाएं भी हुईं. स्थिति बिगड़ने के बाद पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े. कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी खबर सामने आई. तनाव बढ़ने के बाद इलाके में पैरामिलिट्री फोर्स तैनात करनी पड़ी. पुलिस ने CCTV फुटेज के आधार पर कार्रवाई शुरू की और अब तक 15 लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. प्रशासन का साफ संदेश है कि कानून हाथ में लेने वालों को बख्शा नहीं जाएगा.

शुभेंदु अधिकारी ने पुलिस को क्या निर्देश दिए?

मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य सचिवालय ‘नबान्न’ में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर साफ कहा कि ध्वनि प्रदूषण नियमों में किसी भी तरह की ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सरकार का कहना है कि तेज आवाज वाले लाउडस्पीकरों से मरीजों, छात्रों और बुजुर्गों को परेशानी होती है. इसलिए धार्मिक स्थल हो या सार्वजनिक कार्यक्रम, सभी को तय डेसिबल सीमा के भीतर रहना होगा. एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, पुलिस को स्पष्ट आदेश दिए गए हैं कि नियम तोड़ने वालों के खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जाए.

बंगाल में लाउडस्पीकर को लेकर नियम क्या है?

पर्यावरण नियमों के मुताबिक आवासीय इलाकों में दिन के समय 55 डेसिबल तक की आवाज की अनुमति है, जबकि रात में यह सीमा 45 डेसिबल रहती है. औद्योगिक और वाणिज्यिक क्षेत्रों में यह सीमा थोड़ी ज्यादा हो सकती है. हालांकि त्योहारों और विशेष मौकों पर पहले कुछ राहत दी जाती थी, लेकिन नई सरकार अब नियमों को सख्ती से लागू करने पर जोर दे रही है.

देश में लाउडस्पीकर को लेकर क्या कहते हैं नियम?

भारत में लाउडस्पीकर और ध्वनि प्रदूषण से जुड़े नियम ‘Noise Pollution (Regulation and Control) Rules, 2000’ के तहत लागू होते हैं. इन नियमों के अनुसार अस्पताल, स्कूल, अदालत और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास के 100 मीटर क्षेत्र को “साइलेंस जोन” माना जाता है. यहां तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति नहीं होती. साथ ही रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक सार्वजनिक स्थानों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल पर रोक रहती है. किसी भी धार्मिक आयोजन, जुलूस या सार्वजनिक कार्यक्रम के लिए स्थानीय प्रशासन से अनुमति लेना अनिवार्य होता है.

क्यों कहा जा रहा है 'दीदी नहीं, दादा की दादागिरी'?

सोशल मीडिया पर नई सरकार की सख्ती को लेकर जमकर प्रतिक्रियाएं आ रही हैं. कई लोग इसे “कानून का राज” बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे “अत्यधिक सख्ती” करार दे रहा है. लेकिन समर्थकों का कहना है कि बंगाल में पहली बार प्रशासन सीधे एक्शन मोड में दिखाई दे रहा है. यही वजह है कि “चलाओगे पत्थर तो जाओगे अंदर” जैसे डायलॉग सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं.

7 दिन में लिए गए बड़े फैसले

1. आरजी कर केस में बड़ा एक्शन

नई सरकार ने आरजी कर रेप और मर्डर केस में कार्रवाई करते हुए तीन वरिष्ठ IPS अधिकारियों को निलंबित कर दिया.

2. आलू-प्याज बिक्री पर पुराना प्रतिबंध हटाया

राज्य से बाहर जरूरी सामान भेजने पर लगी रोक खत्म कर दी गई.

3. स्कूलों में “वंदे मातरम्” अनिवार्य

सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में राष्ट्रगीत को अनिवार्य कर दिया गया.

4. गोवंश हत्या और लाउडस्पीकर नियम सख्त

गोवंश वध के लिए अब प्रमाणपत्र जरूरी होगा, जबकि धार्मिक स्थलों पर ध्वनि सीमा तय कर दी गई.

5. BSF को जमीन देने का फैसला

सीमा पर फेंसिंग के लिए BSF को जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई.

6. आयुष्मान भारत समेत कई केंद्रीय योजनाएं लागू

पहले रोकी गई कई योजनाओं को राज्य में लागू कर दिया गया.

7. बंगाल में BNS लागू

भारतीय न्याय संहिता लागू करने के साथ IPS और IAS अधिकारियों को केंद्रीय ट्रेनिंग की अनुमति भी दी गई.

शुभेंदु अधिकारी
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