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शादीशुदा महिला शादी के झूठे वादे पर रेप केस नहीं कर सकती, सुप्रीम कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि शादीशुदा महिला सहमति से बने शारीरिक संबंध के बाद ‘शादी के झूठे वादे’ के आधार पर रेप केस दर्ज नहीं करा सकती. कोर्ट ने इसे सहमति से शुरू हुआ रिश्ता बताया, जो बाद में बिगड़ गया.

शादीशुदा महिला शादी के झूठे वादे पर रेप केस नहीं कर सकती, सुप्रीम कोर्ट ने क्या सुनाया फैसला
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( Image Source:  Sora_ AI )
सागर द्विवेदी
Edited By: सागर द्विवेदी

Published on: 6 Feb 2026 8:20 AM

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को एक अहम और संवेदनशील मुद्दे पर बड़ा फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया कि अगर कोई शादीशुदा महिला किसी अन्य पुरुष के साथ सहमति से शारीरिक संबंध बनाती है, तो बाद में ‘शादी का झूठा वादा’ बताकर रेप का मामला दर्ज नहीं कराया जा सकता. कोर्ट ने इसे क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम के दुरुपयोग से जोड़ते हुए कहा कि ऐसे मामलों में अदालतों को बेहद सतर्क रहने की ज़रूरत है.

यह टिप्पणी उस वक्त आई, जब सुप्रीम कोर्ट ने एक महिला वकील की शिकायत पर दर्ज रेप केस को रद्द कर दिया. महिला ने आरोप लगाया था कि एक पुरुष वकील ने शादी का झूठा वादा कर उसके साथ संबंध बनाए. कोर्ट ने माना कि यह मामला 'सहमति से शुरू हुआ रिश्ता, जो बाद में बिगड़ गया' का क्लासिक उदाहरण है.

शादीशुदा महिला झूठे शादी के वादे पर रेप केस क्यों नहीं कर सकती?

जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने कहा कि जब महिला पहले से विवाहित है, तो वह ‘false promise of marriage’ का आधार नहीं ले सकती. कोर्टने कहा कि, 'ऐसे मामलों में महिला का विवाह पहले से अस्तित्व में होता है, इसलिए शादी का कोई भी वादा न तो कानूनी रूप से लागू हो सकता है और न ही उस पर अमल किया जा सकता है.'

इस केस में सुप्रीम कोर्ट ने क्या अहम बात कही?

कोर्ट ने साफ कहा कि शिकायतकर्ता उस समय भी शादीशुदा थी, जब कथित संबंध बने, और FIR दर्ज होने तक भी उसकी शादी कायम थी. इसलिए यह मामला रेप नहीं, बल्कि 'consensual relationship turning acrimonious' यानी सहमति से बना रिश्ता, जो बाद में कड़वाहट में बदल गया का उदाहरण है.

Hindu Marriage Act का इसमें क्या रोल है?

बेंच ने हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 5(i) का हवाला देते हुए कहा कि यह धारा साफ तौर पर दो व्यक्तियों के बीच विवाह को प्रतिबंधित करती है, यदि उनमें से किसी का जीवनसाथी जीवित हो.' मतलब, जब कानून खुद शादी को इजाज़त नहीं देता, तो शादी का वादा अपने आप में अवैध हो जाता है.

क्या कोर्ट ने रेप कानून के दुरुपयोग पर भी कुछ कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि आज के समय में रेप कानून का गलत इस्तेमाल भी एक गंभीर समस्या बन चुका है. कोर्ट की टिप्पणी कि अदालतों को आज के दौर में बेहद सतर्क रहना होगा और यह देखना होगा कि किसी मामले में अपराध के जरूरी तत्व वास्तव में मौजूद हैं या नहीं.' नहीं. कोर्ट ने यह नहीं कहा कि हर ऐसा मामला झूठा है. लेकिन साफ कर दिया कि जहां रिश्ता सहमति से हो, और शादी कानूनी रूप से संभव ही न हो, वहां रेप का केस टिक नहीं सकता.

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