'अमेरिका मत बनाओ', UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, CJI ने कहा - हो सकता है दुरुपयोग
शिक्षण संस्थानों में बढ़ते ध्रुवीकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि भारत को अमेरिका जैसा नहीं बनना चाहिए. कोर्ट ने जोर दिया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एकता, समानता और समावेश की भावना दिखनी चाहिए, न कि पहचान आधारित विभाजन.
शिक्षण संस्थानों में बढ़ते ध्रुवीकरण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि भारत को अमेरिका जैसा नहीं बनना चाहिए. कोर्ट ने जोर दिया कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में एकता, समानता और समावेश की भावना दिखनी चाहिए, न कि पहचान आधारित विभाजन.
देश के शिक्षण संस्थानों में बढ़ती पहचान आधारित खाई और अलगाव की प्रवृत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त गुरुवार को टिप्पणी की है. शीर्ष अदालत ने साफ कहा है कि भारत को अमेरिका जैसा नहीं बनना चाहिए, जहां विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में पहचान के आधार पर ध्रुवीकरण गहराता जा रहा है. कोर्ट ने जोर देकर कहा कि शिक्षण संस्थान एकता, समानता और समावेश के केंद्र होने चाहिए, न कि विभाजन की प्रयोगशाला.
सुप्रीम कोर्ट ने इस मसले पर सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि छात्रों को साझा राष्ट्रीय मूल्यों, सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक सोच से जोड़ना है. अदालत की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब देशभर में कैंपस कल्चर, पहचान की राजनीति और शैक्षणिक माहौल को लेकर लगातार बहस तेज होती जा रही है.
UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत की टिप्पणियों और अहम संकेतों को 10 पॉइंट्स में इस तरह समझा जा सकता है.
1. “क्या हम उलटी दिशा में जा रहे हैं?”
सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या नए UGC नियम समाज को आगे ले जाने के बजाय विभाजन की ओर धकेल रहे हैं.
2. जातिविहीन समाज की जरूरत पर जोर
कोर्ट ने कहा कि भारत का लक्ष्य जातिविहीन समाज की ओर बढ़ना होना चाहिए, न कि पहचान आधारित खांचों को और गहरा करना.
3. सुरक्षा बनाम विभाजन का संतुलन जरूरी
अदालत ने स्पष्ट किया कि जिन्हें वास्तव में सुरक्षा की जरूरत है, उनके लिए व्यवस्था होनी चाहिए, लेकिन इससे सामाजिक एकता कमजोर नहीं होनी चाहिए.
4. शिक्षण संस्थानों में एकता दिखनी चाहिए
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय एकता और समावेश के केंद्र होने चाहिए, न कि अलगाव के.
5. “हमें अमेरिका नहीं बनना चाहिए”
कोर्ट ने अमेरिका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अश्वेत लोगों के लिए अलग स्कूलों जैसी स्थिति भारत में नहीं आनी चाहिए.
6. पहचान आधारित व्यवस्था पर चिंता
अदालत ने संकेत दिया कि अलग-अलग वर्गों के लिए विशेष संरचनाएं कहीं न कहीं समाज को बांट सकती हैं.
7. UGC के नए नियमों के दुरुपयोग की आशंका
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि इन नियमों का गलत इस्तेमाल होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
8. नियमों की समीक्षा के लिए कमिटी का सुझाव
कोर्ट ने कहा कि UGC के नए नियमों पर विचार करने के लिए एक समिति (कमिटी) बनाई जा सकती है.
9. केंद्र सरकार से जवाब तलब
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से इन नियमों को लेकर स्पष्ट जवाब मांगा है.
10. अंतिम उद्देश्य: सामाजिक सौहार्द
अदालत ने दोहराया कि शिक्षा व्यवस्था का मकसद सिर्फ सुरक्षा या शिकायत निवारण नहीं, बल्कि सामाजिक सौहार्द और संवैधानिक मूल्यों को मजबूत करना होना चाहिए.





