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‘अमीर आरोपी मुकदमों से नहीं बच सकते’, PMLA मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की चेतावनी; याचिका कर दी खारिज

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संवैधानिक अदालतों के बढ़ते दुरुपयोग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अमीर और धनी लोगों द्वारा दंडात्मक कानूनों से बचने के लिए उनकी संवैधानिक वैधता को चुनौती देने की दिशा चिंताजनक है. अदालत ने साफ शब्दों में चेताया कि केवल रिट याचिका के सहारे आपराधिक मुकदमों से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

Supreme Court said woman pyjama string is tantamount attempted rape
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Supreme Court

( Image Source:  ANI )

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को संवैधानिक अदालतों के बढ़ते दुरुपयोग पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि अमीर और धनी लोगों द्वारा दंडात्मक कानूनों से बचने के लिए उनकी संवैधानिक वैधता को चुनौती देने की दिशा चिंताजनक है. अदालत ने साफ शब्दों में चेताया कि केवल रिट याचिका के सहारे आपराधिक मुकदमों से बचने की अनुमति नहीं दी जा सकती.

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है और आर्थिक या सामाजिक हैसियत के आधार पर किसी को विशेष छूट नहीं दी जा सकती. कोर्ट की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) से जुड़े मामलों में लगातार संवैधानिक चुनौतियां सामने आ रही हैं.

किस मामले में आई सख्त टिप्पणी

भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ दिल्ली के वकील गौतम खैतान की ओर से दायर रिट याचिका पर सुनवाई कर रही थी. इस याचिका में PMLA की धारा 44(1)(c) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी. यह प्रावधान कहता है कि जब किसी विशेष अदालत में मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चलता है, तो वही अदालत उससे जुड़े अनुसूचित अपराध की भी सुनवाई कर सकती है, ताकि अलग-अलग अदालतों में समानांतर मुकदमे न चलें.

धनी लोग मुकदमे से बचना चाहते हैं: CJI

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी करते हुए कहा “यह एक अनोखी प्रवृत्ति बन गई है. जब मुकदमा चल रहा होता है, तो धनी और संपन्न लोग कानून की वैधता को चुनौती देने के लिए अदालत का रुख करते हैं. उन्हें भी अन्य नागरिकों की तरह मुकदमे का सामना करना चाहिए. ये धनी आवेदक सोचते हैं कि वे किसी भी मुकदमे से बच सकते हैं.”

अगस्तावेस्टलैंड केस से जुड़ा है मामला

गौरतलब है कि गौतम खैतान अगस्तावेस्टलैंड VVIP हेलीकॉप्टर सौदे से जुड़े उन आरोपियों में शामिल हैं, जिनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने PMLA के तहत मामला दर्ज किया है. उन पर मनी लॉन्ड्रिंग के अलावा काला धन एवं कर अधिरोपण अधिनियम 2015 के तहत भी आरोप हैं. खैतान की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लूथरा ने दलील दी कि याचिका में एक महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रश्न उठाया गया है, जो विशेष अदालतों के अधिकार क्षेत्र से जुड़ा है. हालांकि, पीठ इस दलील से सहमत नहीं हुई. कोर्ट ने कहा कि PMLA के प्रमुख प्रावधानों की वैधता पहले से ही विजय मदनलाल चौधरी बनाम भारत संघ (2022) फैसले से जुड़ी पुनर्विचार याचिकाओं में विचाराधीन है.

कोर्ट ने याचिका खारिज की

अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा “चूंकि विजय मदनलाल मामले में दायर कुछ समीक्षा याचिकाओं में PMLA के प्रावधानों की पात्रता का मुद्दा विचाराधीन है, इसलिए हमें लगता है कि धारा 44(1)(c) की वैधता की जांच उसी दौरान की जानी चाहिए.”

PMLA पर पुनर्विचार की पृष्ठभूमि

2022 के ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने PMLA के मूल ढांचे को बरकरार रखा था, जिसमें ED की गिरफ्तारी, तलाशी, संपत्ति कुर्की और बयान दर्ज करने की शक्तियां शामिल हैं. हालांकि, इस फैसले के खिलाफ दाखिल पुनर्विचार याचिकाओं में कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं. कोर्ट ने संकेत दिया है कि जनवरी के अंत तक शेष PMLA मामलों की सुनवाई शुरू हो सकती है.

1. मनी लॉन्ड्रिंग की परिभाषा को कमजोर करने का आरोप

2. कानून को पूर्वव्यापी रूप से लागू करने की वैधता

3. आत्म-अपराध के खिलाफ संवैधानिक संरक्षण

4. धारा 50 के तहत बयान देने के लिए मजबूर करने की ED की शक्ति

5. कठोर जमानत शर्तें और सबूत का उल्टा बोझ

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