प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दो दिवसीय इजरायल यात्रा को पश्चिम एशिया के मौजूदा तनाव के बीच बेहद रणनीतिक माना जा रहा है. इस दौरे से भारत-इजरायल संबंध और मजबूत होने के साथ कई महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर की उम्मीद है. भारत इस पहल के जरिए क्षेत्र में संतुलन बनाते हुए अरब देशों और इजराइल के बीच 'ब्रिज' की भूमिका निभाना चाहता है. यह यात्रा भारत की 'डी-हाइफनेशन नीति' की परिपक्वता भी दिखाती है, जिसमें भारत फिलिस्तीन, यूएई और सऊदी अरब — सभी के साथ स्वतंत्र और मजबूत रिश्ते रखता है. रक्षा सहयोग से आगे बढ़कर अब AI और क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में 'टेक-एलायंस' की दिशा में भी नई शुरुआत संभव मानी जा रही है. इस पर इजरायल मामले की जानकार मंजरी सिंह ने कहा कि पीएम मोदी की इस यात्रा को प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने एतिहासिक साबित कर दिया. भारत के लिए इजरायल के साथ संबंध रखना बहुत जरूरी है. प्रधानमंत्री की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच संबंध पहले से और मजबूत होंगे.