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'पहले ही कैसे समझ जाएं कि कुत्ता काटने के मूड में है', आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट - 10 बड़ी बातें

आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि जब कोई कुत्ता काटने के मूड में होता है, तो उसके व्यवहार को पहले से नहीं पढ़ा जा सकता. कोर्ट ने सवाल उठाया कि स्कूल, अस्पताल और अदालत जैसे संवेदनशील परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी क्यों होनी चाहिए. शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया कि उसका आदेश केवल संस्थागत क्षेत्रों पर लागू होगा, सड़कों पर नहीं, और रोकथाम को सबसे प्रभावी समाधान बताया.

पहले ही कैसे समझ जाएं कि कुत्ता काटने के मूड में है, आवारा कुत्तों के मामले पर सुप्रीम कोर्ट - 10 बड़ी बातें
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( Image Source:  Sora AI )
प्रवीण सिंह
Edited By: प्रवीण सिंह

Published on: 7 Jan 2026 1:14 PM

आवारा कुत्तों का मुद्दा अब सिर्फ पशु-कल्याण तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह मानव जीवन, सार्वजनिक सुरक्षा और संवैधानिक अधिकारों से सीधे जुड़ चुका है. इसी गंभीर पृष्ठभूमि में सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा है कि जब कोई कुत्ता काटने के मूड में हो, तो उसके व्यवहार को पहले से पढ़ा नहीं जा सकता. शीर्ष अदालत ने सवाल उठाया कि स्कूल, अस्पताल और अदालत जैसे संवेदनशील परिसरों में आवारा कुत्तों की मौजूदगी क्यों होनी चाहिए.

तीन-जजों की बेंच ने साफ कहा कि रोकथाम ही एकमात्र समाधान है, क्योंकि यह पहचानना असंभव है कि कौन-सा कुत्ता कब आक्रामक हो जाएगा. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसका आदेश सिर्फ संस्थागत परिसरों तक सीमित है, सड़कों पर नहीं. यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब देशभर में डॉग बाइट और सड़क हादसों के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, और प्रशासन की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं.

यहां पढ़ें सुनवाई की 10 बड़ी बातें...

  1. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कुत्ते के काटने से पहले उसके व्यवहार को समझना संभव नहीं है. इसलिए सिर्फ “आक्रामक” कुत्तों की पहचान कर कार्रवाई करना व्यावहारिक समाधान नहीं हो सकता.
  2. अदालत ने पूछा कि स्कूल, अस्पताल और कोर्ट परिसर जैसी जगहों पर आवारा कुत्तों की मौजूदगी का आखिर औचित्य क्या है, जब ये स्थान सीधे बच्चों, मरीजों और आम नागरिकों की सुरक्षा से जुड़े हैं.
  3. जस्टिस विक्रम नाथ ने कहा कि मामला सिर्फ काटने तक सीमित नहीं है, बल्कि कुत्तों से दुर्घटनाओं का खतरा भी उतना ही गंभीर है, जिसे अक्सर नजरअंदाज किया जाता है.
  4. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उसका संशोधित आदेश केवल संस्थागत क्षेत्रों पर लागू होगा, न कि सार्वजनिक सड़कों या रिहायशी इलाकों पर, ताकि अनावश्यक भ्रम न फैले.
  5. बेंच ने कहा कि रोकथाम सबसे अहम है, क्योंकि यह पहले से तय करना नामुमकिन है कि कोई कुत्ता सुबह शांत रहेगा या अचानक हिंसक हो जाएगा.
  6. जस्टिस संदीप मेहता ने संस्थानों और सड़कों के बीच फर्क करते हुए कहा कि संस्थान सड़क नहीं होते, और वहां सुरक्षा के मानक कहीं ज्यादा सख्त होने चाहिए.
  7. नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने संस्थागत परिसरों में डॉग बाइट की “चिंताजनक बढ़ोतरी” को देखते हुए आवारा कुत्तों को शेल्टर में शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे.
  8. कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि नसबंदी और टीकाकरण के बाद कुत्तों को उसी इलाके में छोड़ा जाए, जहां से उन्हें पकड़ा गया था, ताकि क्षेत्रीय संतुलन बना रहे.
  9. हालांकि, कोर्ट ने साफ किया कि रेबीज से संक्रमित या संदिग्ध कुत्तों पर यह नियम लागू नहीं होगा, क्योंकि वे सीधा जानलेवा खतरा बनते हैं.
  10. बेंच ने राज्यों को हाईवे, एक्सप्रेसवे और राष्ट्रीय राजमार्गों से सभी आवारा जानवर हटाने का भी निर्देश दिया, ताकि सड़क हादसों पर प्रभावी नियंत्रण हो सके.
सुप्रीम कोर्ट
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