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अनशन के खिलाफ क्यों है समाजवादी पार्टी, भूख हड़ताल को लेकर क्या है राममनोहर लोहिया का फॉर्मूला?

सोनम वांगचुक ने केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद 26 दिन का आमरण अनशन समाप्त कर दिया. इसके बाद समाजवादी पार्टी के महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने कहा कि पार्टी कभी इसके पक्ष में नहीं रही है.

अनशन के खिलाफ क्यों है समाजवादी पार्टी, भूख हड़ताल को लेकर क्या है राममनोहर लोहिया का फॉर्मूला?
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समी सिद्दीकी
By: समी सिद्दीकी6 Mins Read

Updated on: 25 July 2026 12:39 PM IST

पिछले 26 दिनों से अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना आमरण अनशन खत्म कर दिया है. शुक्रवार सुबह केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने अस्पताल पहुंचकर उन्हें सूप पिलाया, जिसके बाद उनका अनशन समाप्त हुआ. अनशन खत्म करने के बाद सोनम वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर बताया कि केंद्र सरकार ने पेपर लीक के मुद्दे पर ठोस कार्रवाई करने और इस विषय पर संसद में चर्चा कराने का लिखित आश्वासन दिया है.

हालांकि, उनके अनशन खत्म करने के फैसले पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आ रही हैं. समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव ने कहा कि उनकी पार्टी कभी भी अनशन की राजनीति के पक्ष में नहीं रही है.

रामगोपाल यादव ने क्या कहा?

रामगोपाल यादव ने कहा, "समाजवादी पार्टी कभी अनशन के पक्ष में नहीं है. जब लोगों ने इस बारे में ज्यादा कहा तो हमने सुझाव दिया कि अगर अनशन करना है तो ऐसा किया जाए, जिसमें एक व्यक्ति 24 घंटे बैठे और फिर दूसरा उसकी जगह ले ले." उन्होंने आगे बताया कि एक बार उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता ने डॉ. राम मनोहर लोहिया से कहा था कि वह आमरण अनशन पर बैठना चाहता है. इस पर लोहिया ने कहा था, "अगर मांग नहीं मानी जाए तो मर जाना, लेकिन अनशन से उठना मत."

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अनशन और भूख हड़ताल पर क्या थी डॉ. लोहिया की सोच?

डॉ. राम मनोहर लोहिया आमरण या अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल को राजनीतिक हथियार के रूप में आमतौर पर सही नहीं मानते थे. उनका मानना था कि यदि अनशन करना ही हो, तो वह क्रमिक रूप से होना चाहिए, यानी 24-24 घंटे की बारी के आधार पर अलग-अलग लोग अनशन करें. वहीं, यदि कोई आमरण अनशन करता है, तो उसकी शर्त यह होनी चाहिए कि मांग पूरी न होने पर वह अनशन बीच में छोड़कर न उठे, बल्कि अपने संकल्प पर कायम रहे.

समाजवादी पार्टी सुप्रीमो अखिलेश का क्या है मानना?

समाजवादी पार्टी चीफ अखिलेश यादव ने भी एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि भूख हड़ताल के लिए राम मनोहर लोहिया ने मना किया है. जब मैंने सबसे पहले उनसे मुलाकात की थी तो मैंने उन्हें कहा था कि आप भूख हड़ताल पर मत बैठिए और सरकार से संघर्ष कराइये. आप बबूल के पेड़ पर आम मांगने का काम कर रहे हैं.

पेपर लीक कानून पर पीएम मोदी के बयान पर क्या बोले रामगोपाल यादव?

जब रामगोपाल यादव से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बनाने वाले संदेश पर सवाल पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं किसी का संदेश नहीं सुनता, मैं अपना संदेश देता हूं." उन्होंने कहा, "क्या अपराधियों को सजा देने के लिए पहले से कानून नहीं था? कानून लागू करने वाली एजेंसियां कौन हैं? क्या किसी के खिलाफ कार्रवाई हुई? इसी NEET मामले के कथित किंगपिन को कल सीबीआई ने क्लीन चिट दे दी. अब ये नया कानून क्या बनाएंगे?"

सोनम वांगचुक ने क्यों खत्म किया अनशन?

सोनम वांगचुक ने बताया कि उन्होंने केंद्र सरकार से लिखित आश्वासन मिलने के बाद अपना 26 दिन का अनशन समाप्त किया. उन्होंने कहा कि उनका फैसला किसी राजनीतिक समझौते का हिस्सा नहीं था, बल्कि प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया. उन्होंने कहा कि उन्हें डर था कि प्रदर्शनकारियों पर बड़ी कार्रवाई हो सकती है और हालात हिंसक हो सकते हैं.

'सरकार से कोई समझौता नहीं हुआ'

शुक्रवार देर रात यूट्यूब पर जारी अपने वीडियो संदेश में सोनम वांगचुक ने उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने सरकार के साथ कोई समझौता किया है. उन्होंने कहा कि उनका फैसला केवल प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं को हिंसा और कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए था.

2025 की घटना का किया जिक्र

सोनम वांगचुक ने कहा कि उन्हें 24 सितंबर 2025 की घटना याद आ गई थी, जब लद्दाख के युवाओं पर पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने गोली चलाई थी. उन्होंने कहा कि उन्हें डर था कि दिल्ली में भी वैसी ही स्थिति बन सकती है. उन्होंने बताया, "गुरुवार रात करीब आधी रात को मुझे बताया गया कि मंत्रियों ने लिखित आश्वासन देने पर सहमति दे दी है. मैं जल्दी फैसला लेना चाहता था क्योंकि दिल्ली की स्थिति को देखकर लग रहा था कि कभी भी बड़ी कार्रवाई हो सकती है. मुझे 24 सितंबर 2025 की घटना याद आ रही थी. मुझे लगा कि अगर मैं अनशन खत्म कर शांति की अपील करूं, तो शायद तनाव कम हो सके."

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