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PM मोदी आधी रात को ही क्यों जारी कर रहे हैं Videos, कैमरा एंगल से लेकर Raw Style तक क्या है BJP की डिजिटल रणनीति? Detail

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आधी रात को सेल्फी स्टाइल वीडियो क्यों जारी कर रहे हैं? कैमरा एंगल, Raw Style, Instagram Reels और आधी रात पोस्ट करने के पीछे आखिर पूरी कहानी क्या है? Detail में समझें.

PM मोदी आधी रात को ही क्यों जारी कर रहे हैं Videos, कैमरा एंगल से लेकर Raw Style तक क्या है BJP की डिजिटल रणनीति? Detail
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रत में लंबे समय तक राजनीतिक संवाद का सबसे प्रभावी तरीका प्रधानमंत्री का राष्ट्र के नाम टेलीविजन पर संबोधन माना जाता रहा है. आमतौर पर ऐसे संबोधन रात 8 या 8:30 बजे प्रसारित किए जाते थे. 2016 में नोटबंदी की घोषणा और कोरोना महामारी के दौरान दिए गए संबोधनों में भी यही वर्जन देखने को मिला. इन भाषणों की खासियत फॉर्मल माहौल, स्टूडियो सेटअप और गंभीर अंदाज हुआ करता था, जिसे देशभर के लोग टीवी पर देखते थे.

लेकिन पीएम मोदी ने अब वीडियो देर रात जारी किया और खास बात यह है कि इस वीडियो को वर्टिकल फॉर्मेट में बनाया गया था. पूरे वीडियो की लेग्थ को छोड़ा और सटीक बात करने वाला रखा गया. आखिर पीएम ने ऐसा क्यों किया?

पीएम मोदी ने देर रात क्यों जारी किया वीडियो

अब मीडिया की दुनिया पूरी तरह बदल चुकी है. जिस वर्ग तक राजनीतिक दल और सरकारें सबसे ज्यादा पहुंचना चाहती हैं, यानी Gen Z, वह अब रात 8 बजे टीवी के सामने नहीं बैठता. देर रात में ये फोन हाथ में लेकर बेड पर लेटे होते हैं या फिर दोस्तों के साथ मिलकर स्क्रॉल कर रहे होते हैं. यह पीढ़ी 15 सेकंड के छोटे वीडियो, तेजी से बदलने वाले विजुअल कंटेंट और सोशल मीडिया एल्गोरिद्म के जरिए मिलने वाली जानकारी पर ज्यादा निर्भर करती है.

इसी बदलाव को देखते हुए प्रधानमंत्री ने पीएम मोदी ने पहला वीडियो गुरुवार रात 11:52 बजे तीन मिनट से भी कम समय का एक सेल्फी स्टाइल वीडियो जारी किया. इस वीडियो में उन्होंने हाथ में मोबाइल लेकर सीधे कैमरे में देखकर लोगों से बात की. इस तरह उन्होंने पारंपरिक टीवी प्रसारण के बजाय सीधे सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंचने का तरीका अपनाया. इसके बाद बीती रात भी पीए मोदी ने कुछ ऐसा ही किया.

क्यों बदला गया संवाद का तरीका?

यह बदलाव ऐसे समय में आया है, जब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चलने वाले आंदोलन तेजी से लोगों तक पहुंच रहे हैं. खासकर Gen Z से जुड़े आंदोलन छोटे वीडियो, वायरल कंटेंट और सोशल मीडिया ट्रेंड के जरिए अपनी बात रखते हैं.

जंतर-मंतर पर NEET परीक्षा पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए छात्र प्रदर्शन इसका एक उदाहरण बताया गया है. प्रदर्शनकारी ट्रेंडिंग ऑडियो, मीम्स और छोटे वीडियो के जरिए लगातार अपनी बात सोशल मीडिया पर पहुंचा रहे हैं.

सोशल मीडिया पर 'सीधी बातचीत' की रणनीति

रिपोर्ट के मुताबिक, इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म पर पारंपरिक स्टूडियो में रिकॉर्ड किए गए और ज्यादा एडिट किए गए वीडियो को कई बार लोग सरकारी प्रचार के तौर पर देखते हैं. इसके विपरीत, मोबाइल के फ्रंट कैमरे से रिकॉर्ड किया गया सेल्फी वीडियो लोगों को ज्यादा स्वाभाविक और सीधे संवाद जैसा महसूस होता है. इससे यह संदेश देने की कोशिश होती है कि नेता सीधे जनता से बात कर रहे हैं.

देर रात वीडियो जारी करने के पीछे भी रणनीति?

प्रधानमंत्री का वीडियो रात 11:52 बजे जारी किया गया. रिपोर्ट में कहा गया है कि यह समय भी सोच-समझकर चुना गया, क्योंकि देर रात सोशल मीडिया पर युवा सबसे ज्यादा सक्रिय रहते हैं. ऐसे समय वीडियो जारी करने से सुबह की न्यूज साइकिल शुरू होने से पहले ही उसे ज्यादा लोगों तक पहुंचाने में मदद मिलती है.

रिपोर्ट के अनुसार, यह वीडियो केवल एक प्रयोग नहीं था, बल्कि सरकार की नई डिजिटल रणनीति का हिस्सा है. वीडियो को करोड़ों व्यू मिलने के बाद केंद्रीय मंत्रियों को भी पारंपरिक प्रेस रिलीज पर कम निर्भर रहने और इंस्टाग्राम पर अपनी मौजूदगी बढ़ाने के निर्देश दिए गए.

मंत्रियों से कहा गया है कि वे वर्टिकल रील्स बनाएं, सोशल मीडिया के इंटरैक्टिव फीचर्स का इस्तेमाल करें और युवाओं से आसान तथा बातचीत वाले अंदाज में संवाद करें. सरकार का उद्देश्य सभी मंत्रालयों में डिजिटल-फर्स्ट कम्युनिकेशन को बढ़ावा देना बताया गया है.

नई रणनीति पर क्या उठ रहे हैं सवाल?

हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सेल्फी वीडियो जैसे छोटे डिजिटल संदेश लोगों का ध्यान तो खींच सकते हैं, लेकिन इन्हें लेकर सवाल भी उठ रहे हैं. कुछ लोगों का मानना है कि फ्रंट कैमरे से रिकॉर्ड किया गया वीडियो संसद में बहस या पत्रकारों के सवालों का विकल्प नहीं हो सकता.

राजनीतिक संवाद का नया दौर?

रिपोर्ट के अनुसार, सरकार का संदेश साफ है कि अब शासन केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर अपनी मौजूदगी बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण हो गया है. ऐसे में पारंपरिक टीवी संबोधनों से आगे बढ़कर मोबाइल फोन और सोशल मीडिया रील्स के जरिए संवाद करने का दौर तेजी से बढ़ रहा है.

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