मैट्रिक की जगह UPSC स्तर के सवाल? सवालों के घेरे में JSSC परीक्षा! संथाली अभ्यर्थी बोले- 40 फीसदी सवाल सिलेबस से बाहर, री-एग्जाम हो
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा में शामिल संथाली भाषा के अभ्यर्थियों ने दोबारा परीक्षा कराने की मांग की है. उनका आरोप है कि करीब 40 फीसदी प्रश्न निर्धारित मैट्रिक स्तर के सिलेबस से बाहर थे और कई सवालों में त्रुटियां भी थीं.
JSSC Field Worker Exam Controversy
झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की फील्ड वर्कर भर्ती परीक्षा 2024 एक नए विवाद में घिर गई है. संथाली भाषा के अभ्यर्थियों और संथाल समुदाय के प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया है कि परीक्षा में पूछे गए करीब 40 फीसदी प्रश्न निर्धारित सिलेबस से बाहर थे. उनका कहना है कि भर्ती अधिसूचना में परीक्षा का स्तर मैट्रिक (कक्षा 10) बताया गया था, लेकिन कई सवाल UPSC सिविल सेवा परीक्षा और UGC-NET जैसे उच्च स्तर की परीक्षाओं के अनुरूप पूछे गए.
यह परीक्षा 19 जुलाई को राज्य में 510 फील्ड वर्कर पदों पर भर्ती के लिए आयोजित की गई थी. परीक्षा के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने पेपर की कठिनाई और प्रश्नों की गुणवत्ता पर सवाल उठाए हैं. इससे पहले भी परीक्षा कम उपस्थिति, दूर-दराज के परीक्षा केंद्र आवंटित किए जाने और एडमिट कार्ड की सूचना देर से मिलने जैसी शिकायतों को लेकर चर्चा में रही थी.
संथाली अभ्यर्थियों ने क्या आरोप लगाए?
- संथाली अभ्यर्थियों का कहना है कि भाषा पेपर में ऐसे विषयों से प्रश्न पूछे गए जिनका निर्धारित पाठ्यक्रम से कोई संबंध नहीं था.
- उदाहरण के तौर पर एक प्रश्न में 'महुआ' का संस्कृत अनुवाद पूछा गया, जबकि दूसरे प्रश्न में 'हिंदी' शब्द की उत्पत्ति के बारे में सवाल था.
- अभ्यर्थियों का कहना है कि संथाली भाषा के मैट्रिक स्तर के पेपर में इस तरह के प्रश्न नहीं होने चाहिए थे.
- झारखंड संथाल छात्र संघ के सचिव और बोकारो निवासी हरीश मरांडी ने आरोप लगाया कि करीब 40 फीसदी प्रश्न सिलेबस से बाहर थे. उन्होंने कहा कि भर्ती अधिसूचना में स्पष्ट रूप से मैट्रिक स्तर का सिलेबस दिया गया था, लेकिन कई प्रश्न UPSC और UGC-NET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के स्तर के थे.
- मरांडी ने यह भी दावा किया कि प्रश्नपत्र में चार प्रश्नों में त्रुटियां थीं। कुछ सवालों में प्रश्न ही गलत थे, जबकि कुछ में उत्तर विकल्पों में गलती बताई गई. इस संबंध में राज्य सरकार को ज्ञापन सौंपकर दोबारा परीक्षा कराने की मांग की गई है.
- कुछ अभ्यर्थियों ने कहा कि परीक्षा में ऐसे लेखकों की जीवनी और साहित्य से जुड़े प्रश्न पूछे गए जिनका नाम मैट्रिक स्तर के संथाली पाठ्यक्रम में शामिल ही नहीं है. उन्होंने कहा कि अभ्यर्थियों की आपत्ति उत्तर कुंजी (Answer Key) पर नहीं, बल्कि स्वयं प्रश्नपत्र पर है.
- अभ्यर्थियों का कहना है कि पेपर देखते ही स्पष्ट हो गया था कि कई प्रश्न निर्धारित पाठ्यक्रम से बाहर हैं. JSSC अधिकारियों ने फिलहाल उम्मीदवारों से उत्तर कुंजी जारी होने का इंतजार करने और उसके बाद औपचारिक आपत्ति दर्ज कराने को कहा है.
- अभ्यर्थियों ने सवाल उठाया कि यदि परीक्षा में मनमाने ढंग से किसी भी स्तर के प्रश्न पूछने थे, तो भर्ती अधिसूचना में मैट्रिक स्तर का सिलेबस घोषित करने का क्या औचित्य था.
- एक अभ्यर्थी ने कहा कि सभी उम्मीदवारों ने JSSC द्वारा जारी सिलेबस के अनुसार तैयारी की थी। लेकिन परीक्षा में संथाली भाषा और साहित्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों से प्रश्न नहीं पूछे गए, जबकि अपेक्षा से कहीं अधिक कठिन सवाल शामिल कर दिए गए.
- एक अभ्यर्थी ने आरोप लगाया कि झारखंड की अन्य जनजातीय भाषाओं के अभ्यर्थियों को ऐसी समस्या का सामना नहीं करना पड़ा, जबकि संथाली भाषा का पेपर असामान्य रूप से कठिन था. इससे संथाल समुदाय के उम्मीदवारों को नुकसान हो सकता है.
JSSC ने क्या कहा?
इस पूरे विवाद पर JSSC के सचिव सुधीर गुप्ता ने कहा कि उम्मीदवारों को घबराने की जरूरत नहीं है. आयोग पहले उत्तर कुंजी जारी करेगा, जिसके बाद अभ्यर्थी प्रमाणों के साथ अपनी आपत्तियां दर्ज करा सकेंगे. उन्होंने कहा कि उत्तर कुंजी पर प्राप्त सभी आपत्तियों की जांच की जाएगी. यदि कोई गलती पाई जाती है तो नियमानुसार उचित कार्रवाई की जाएगी.




