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धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे या नहीं! CJP की मागों के बीच मोदी सरकार में क्या चल रहा? जानिए 10 उलझे सवालों के जवाब

NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर शुरू हुआ CJP का आंदोलन अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है. एक ओर केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार, फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कड़े कानून की बात कर रही है, वहीं प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की मांग पर कायम हैं.

धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा देंगे या नहीं! CJP की मागों के बीच मोदी सरकार में क्या चल रहा? जानिए 10 उलझे सवालों के जवाब
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सागर द्विवेदी
By: सागर द्विवेदी1 Mins Read

Updated on: 24 July 2026 8:27 PM IST

दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ छात्र आंदोलन अब राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है. NEET पेपर लीक विवाद को लेकर शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब कई राज्यों तक फैल गया है और राजनीतिक हलचल भी लगातार तेज हो रही है. केंद्र सरकार परीक्षा प्रणाली में सुधार और कार्रवाई का दावा कर रही है, जबकि विपक्ष और प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं.

इसी बीच NTA के 47 अधिकारियों को हटाए जाने की खबर सामने आई है, लेकिन आंदोलन का नेतृत्व कर रहे CJP का कहना है कि केवल अधिकारियों पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं है. संगठन अपनी तीन प्रमुख मांगों- केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा, छात्रों पर दर्ज मामलों की वापसी और प्रभावित परिवारों को मुआवजा- पर अब भी कायम है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच आखिर क्या चल रहा है और इन मांगों पर अब तक क्या स्थिति बनी है? आइए, हर सवाल का जवाब जानते हैं.

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और CJP आंदोलन पर 10 बड़े सवाल

NEET-UG पेपर लीक मामले के बाद CJP और आंदोलनकारी छात्र केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की जवाबदेही तय करने की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि परीक्षा प्रणाली में हुई कथित गड़बड़ियों की नैतिक जिम्मेदारी मंत्री की है, इसलिए उन्हें इस्तीफा देना चाहिए.

फिलहाल सरकार की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं दिया गया है. सरकारी सूत्र लगातार कह रहे हैं कि इस्तीफे का सवाल नहीं उठता. हालांकि CJP का दावा है कि सरकार ने इस मांग पर शीर्ष नेतृत्व से चर्चा करने के लिए समय मांगा है. इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

CJP वह संगठन है जिसने जंतर-मंतर पर छात्र आंदोलन शुरू किया. संगठन की सबसे बड़ी मांग धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है. इसके अलावा पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई, छात्रों पर दर्ज मामलों को वापस लेने और प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने की भी मांग की जा रही है.

यह आंदोलन 6 जून को दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ. शुरुआत में प्रदर्शन सीमित था, लेकिन बाद में छात्र संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कई अन्य समूहों के जुड़ने से आंदोलन का दायरा बढ़ता गया और यह राष्ट्रीय चर्चा का विषय बन गया.

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आंदोलन के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी. स्वास्थ्य बिगड़ने के बाद उन्होंने अस्पताल में केंद्रीय मंत्रियों से मुलाकात के बाद 26 दिन बाद अनशन समाप्त किया, लेकिन आंदोलन की अन्य मांगों पर चर्चा जारी रहने की बात कही.

केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह ने CJP प्रतिनिधियों से संविधान क्लब में मुलाकात की. CJP का दावा है कि बातचीत में कई मांगों पर चर्चा हुई और सरकार ने कुछ मुद्दों पर सकारात्मक रुख दिखाया. सरकार ने बैठक की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है.

केंद्र सरकार ने पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट और कड़ी सजा वाले नए कानून की तैयारी की घोषणा की है. साथ ही प्रशासनिक स्तर पर बदलाव और परीक्षा प्रणाली में सुधार के कदम उठाने की भी बात कही गई है.

CJP का कहना है कि बातचीत में छात्रों पर दर्ज एफआईआर और अन्य मामलों को वापस लेने पर सकारात्मक चर्चा हुई. हालांकि अब तक सरकार की ओर से इस संबंध में कोई आधिकारिक आदेश या घोषणा जारी नहीं की गई है.

दिल्ली के जंतर-मंतर के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, कर्नाटक, तमिलनाडु, पंजाब, हरियाणा और अन्य राज्यों में भी छात्र संगठनों और विभिन्न समूहों द्वारा विरोध प्रदर्शन, रैलियां और ज्ञापन सौंपने जैसी गतिविधियां देखने को मिली हैं.

CJP का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी सबसे प्रमुख और गैर-समझौतावादी मांग है. यदि सरकार इस पर कोई फैसला नहीं लेती है तो संगठन देशभर में आंदोलन को और व्यापक करने की चेतावनी दे चुका है. दूसरी ओर सरकार सुधारों और कानूनी कार्रवाई पर जोर दे रही है.

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