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असम में बाढ़ बनी महाविनाश, अब तक 61 लोगों की मौत, 856 गांव पानी में डूबे, हालात पर सीएम हिमंता ने क्या बताया?

असम में बाढ़ से हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं. अब तक 61 लोगों की मौत हो चुकी है, 7.05 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं और पिछले 24 घंटे में 17,107 पशु व पोल्ट्री बाढ़ में बह गए. मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने स्थिति को गंभीर बताया है.

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असम में बाढ़ से अब तक 61 लोगों की मौत

( Image Source:  ANI )
हेमा पंत
Edited By: हेमा पंत5 Mins Read

Updated on: 25 July 2026 4:16 PM IST

असम में बाढ़ ने एक बार फिर भयावह रूप ले लिया है. पिछले 24 घंटे में 14 और लोगों की मौत के बाद मृतकों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है. राज्य के 12 जिले बाढ़ की चपेट में हैं और 7.05 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं. 856 गांव जलमग्न हैं, जबकि 3.15 लाख से ज्यादा लोगों को राहत शिविरों में शरण लेनी पड़ी है. बाढ़ का असर खेती और पशुधन पर भी पड़ा है. 56 हजार हेक्टेयर से ज्यादा फसलें पानी में डूबी हैं और पिछले 24 घंटे में 17,107 पशु व पोल्ट्री बह गए हैं.

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने हालात को गंभीर बताते हुए कहा कि मृतकों की संख्या बढ़ सकती है. सीएम ने कहा पड़ोसी नागालैंड में बादल फटने और लगातार हो रही भारी बारिश के कारण ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है. यही वजह है कि असम में हर साल मानसून के दौरान बाढ़ की स्थिति बन जाती है.

कितने लोगों की हुई बाढ़ से मौत?

ANI

असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, पिछले 24 घंटे में 14 और लोगों की मौत के बाद बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है. राज्य के 12 जिले इस समय बाढ़ की चपेट में हैं और 7.05 लाख से अधिक लोग प्रभावित हैं. वहीं, शिवसागर जिले में अब भी एक व्यक्ति लापता बताया जा रहा है.

कौन-से जिले सबसे ज्यादा प्रभावित?

बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट शामिल हैं. अकेले शिवसागर में 3.48 लाख से ज्यादा लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि चराईदेव में 1.88 लाख और जोरहाट में 1.26 लाख से अधिक लोगों पर इसका असर पड़ा है.

बाढ़ से कितने गांव जलमग्न?

ANI

बाढ़ का असर 37 राजस्व सर्किल और 856 गांवों तक पहुंच चुका है. हालात ऐसे हैं कि बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं. प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में 363 राहत शिविर और वितरण केंद्र बनाए हैं, जहां 3.15 लाख से ज्यादा लोग शरण लिए हुए हैं. बचाव अभियान भी लगातार जारी है. एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमों ने संयुक्त अभियान चलाकर करीब 1,000 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया है.

खेती और पोल्ट्री को भी भारी नुकसान

इस बाढ़ ने केवल लोगों की जिंदगी ही नहीं, बल्कि किसानों की आजीविका पर भी गहरी चोट पहुंचाई है. 56,606 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि अब भी पानी में डूबी हुई है, जिससे फसलों को भारी नुकसान हुआ है. पशुधन भी बाढ़ की चपेट में आया है. पिछले 24 घंटे में 17,107 पशु और पोल्ट्री बह गए, जबकि कुल 3.34 लाख से अधिक पशु और पोल्ट्री बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. ग्रामीण इलाकों में यह नुकसान आर्थिक संकट को और बढ़ा सकता है.

मुख्यमंत्री ने क्या कहा?

बाढ़ की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने डेरगांव के एक राहत शिविर का दौरा किया. उन्होंने हालात को चिंताजनक बताते हुए आशंका जताई कि मृतकों की संख्या आगे बढ़ सकती है. मुख्यमंत्री के अनुसार, पड़ोसी नागालैंड में बादल फटने की घटना के कारण कई जिलों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हुई है. इस बीच लगातार बारिश के चलते ब्रह्मपुत्र और उसकी कई सहायक नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे राहत कार्यों के सामने नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं.

आखिर हर साल असम में क्यों आती है बाढ़?

असम में हर साल बाढ़ आने की सबसे बड़ी वजह इसकी भौगोलिक स्थिति और ब्रह्मपुत्र नदी का विशाल जलग्रहण क्षेत्र है. मानसून के दौरान असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, भूटान और आसपास के पहाड़ी इलाकों में भारी बारिश होती है. इन क्षेत्रों का पानी तेजी से ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियों में पहुंचता है, जिससे नदी का जलस्तर अचानक बढ़ जाता है.

ब्रह्मपुत्र अपने साथ बड़ी मात्रा में गाद (सिल्ट) भी लाती है. यह गाद हर साल नदी के तल में जमा होती रहती है, जिससे नदी की गहराई कम हो जाती है और पानी जल्दी किनारों से बाहर निकलने लगता है. विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कम समय में अत्यधिक बारिश की घटनाएं बढ़ रही हैं, जिससे बाढ़ पहले की तुलना में अधिक विनाशकारी होती जा रही है. ऐसे में हर मानसून में असम के लिए बाढ़ एक बड़ी चुनौती बन जाती है.

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