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7 घंटे की मैराथन बैठक, OBC कार्ड और दिल्ली ऑफर...आखिर कैसे सिद्धारमैया को सीएम पद छोड़ने के लिए मना रही कांग्रेस?

दिल्ली में करीब सात घंटे चली बैठकों के बाद कर्नाटक में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाएं तेज हो गई हैं. बताया जा रहा है कि कांग्रेस सिद्दारमैया को बड़ा पद ऑफर कर रही है.

7 घंटे की मैराथन बैठक, OBC कार्ड और दिल्ली ऑफर...आखिर कैसे सिद्धारमैया को सीएम पद छोड़ने के लिए मना रही कांग्रेस?
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कर्नाटक की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, 2023 विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में अब तक का सबसे बड़ा राजनीतिक फेरबदल होने की संभावना बन गई है. बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री Siddaramaiah गुरुवार को इस्तीफा दे सकते हैं. यह घटनाक्रम दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान के साथ हुई लंबी बैठकों के बाद सामने आया है.

सूत्रों के अनुसार, सिद्धारमैया गुरुवार को बेंगलुरु में प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कर सकते हैं. इसी बीच नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं ने कर्नाटक कांग्रेस में हलचल बढ़ा दी है. बताया जा रहा है कि गुरुवार सुबह सिद्धारमैया अपने सरकारी आवास पर पूरे कर्नाटक कैबिनेट के साथ नाश्ते की बैठक करेंगे. इस बैठक को बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि कांग्रेस नेतृत्व राज्य इकाई में बढ़ते अंदरूनी तनाव और उत्तराधिकार की लड़ाई को संभालने में जुटा हुआ है.

दिल्ली में सात घंटे चली बैठक का क्या है मतलब?

दिल्ली में करीब सात घंटे तक चली बैठकों के दौरान कांग्रेस नेताओं ने सार्वजनिक तौर पर नेतृत्व परिवर्तन की किसी भी चर्चा से इनकार किया. पार्टी नेताओं ने कहा कि बैठकों का मकसद सिर्फ राज्यसभा और कर्नाटक विधान परिषद चुनावों को लेकर रणनीति बनाना था.

हालांकि सूत्रों का दावा है कि बंद कमरे में माहौल पूरी तरह अलग था. वहां लगातार कई दौर की बातचीत हुई, जिसमें सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद छोड़ने के लिए मनाने की कोशिश की गई. कांग्रेस नेतृत्व इस पूरी प्रक्रिया को टकराव की बजाय सम्मानजनक राजनीतिक बदलाव के रूप में पेश करना चाहता है.

सिद्धारमैया को कांग्रेस ने कैसे मनाया?

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस नेतृत्व ने सिद्धारमैया से कहा कि अब पार्टी को उनकी जरूरत राष्ट्रीय राजनीति में एक बड़े OBC चेहरे के रूप में है. खासकर ऐसे समय में जब Rahul Gandhi लगातार सामाजिक न्याय, जातीय जनगणना और पिछड़े वर्गों के मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठा रहे हैं.

बताया जा रहा है कि पार्टी ने सिद्धारमैया से कहा कि 2029 लोकसभा चुनाव से पहले उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में बड़ी भूमिका दी जा सकती है. सूत्रों के अनुसार, उन्हें भरोसा दिलाया गया कि अगर वे राज्यसभा के रास्ते दिल्ली जाने के लिए तैयार होते हैं, तो उनके बाकी राजनीतिक और व्यक्तिगत मुद्दों का भी ध्यान रखा जाएगा.

कांग्रेस नेतृत्व कथित तौर पर सिद्धारमैया को राज्यसभा भेजकर दिल्ली में बड़ी संगठनात्मक जिम्मेदारी देना चाहता है. पार्टी इस फॉर्मूले को इसलिए भी बेहतर मान रही है ताकि ऐसा न लगे कि उन्हें कर्नाटक की राजनीति से हटाया गया है. इसके बजाय इसे राष्ट्रीय राजनीति में “प्रमोशन” की तरह दिखाने की कोशिश की जा रही है.

कब भरे जाएंगे राज्यसभा के नामांकन?

राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन 8 जून तक दाखिल होने हैं. ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व के पास फैसला लेने के लिए ज्यादा समय नहीं बचा है.

दिल्ली की मीटिंग में क्या-क्या हुआ?

सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली में लगभग सात घंटे तक कई चरणों में बैठकें हुईं. इनमें एक अहम बैठक कांग्रेस अध्यक्ष Mallikarjun Kharge और राहुल गांधी के साथ हुई, जिसमें सिद्धारमैया से सीधे तौर पर कहा गया कि पार्टी उन्हें कर्नाटक की जगह केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी देना चाहती है.

कांग्रेस मुख्यालय में हुई व्यापक बैठक में सिद्धारमैया, उपमुख्यमंत्री DK Shivakumar, कांग्रेस महासचिव KC Venugopal और कर्नाटक प्रभारी Randeep Surjewala भी मौजूद थे.

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस नेतृत्व पूरी बातचीत के दौरान इस बात का खास ध्यान रख रहा था कि सिद्धारमैया खुद को अपमानित महसूस न करें. इसी वजह से पूरे प्रस्ताव को “राजनीतिक उन्नति” की तरह पेश किया गया.

क्या सिद्धारमैया ने जताई सहमति?

हालांकि बताया जा रहा है कि सिद्धारमैया ने तुरंत कोई अंतिम सहमति नहीं दी. सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने फैसला लेने के लिए कुछ और समय मांगा और दिल्ली से लौटने के बाद अपने करीबी मंत्रियों और भरोसेमंद सहयोगियों के साथ चर्चा शुरू कर दी.

कांग्रेस ने सार्वजनिक तौर पर क्या कहा?

बैठकों के बाद मीडिया से बात करते हुए KC वेणुगोपाल ने नेतृत्व परिवर्तन की खबरों को खारिज कर दिया. उन्होंने कहा, “आज की बैठक सिर्फ राज्यसभा और MLC चुनावों को लेकर थी. जो अटकलें लगाई जा रही हैं, वे सही नहीं हैं.”

उन्होंने कहा, “मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और रणदीप सुरजेवाला बैठक में मौजूद थे. पूरी चर्चा राज्यसभा और विधान परिषद सीटों पर केंद्रित रही. कृपया बेवजह की अटकलें न लगाएं. सिद्धारमैया और डीके शिवकुमार दोनों ने बैठक से बाहर निकलते समय नेतृत्व परिवर्तन के सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी.

क्या DK Shivakumar बनेंगे अगले मुख्यमंत्री?

हालांकि सूत्रों का कहना है कि बैठकों में औपचारिक तौर पर अगले मुख्यमंत्री के नाम पर चर्चा नहीं हुई, लेकिन पूरे घटनाक्रम के बाद एक बार फिर डीके शिवकुमार का नाम सबसे आगे माना जा रहा है. पिछले करीब दो साल से डीके शिवकुमार समर्थकों का दावा रहा है कि 2023 में कांग्रेस सरकार बनने के समय सत्ता साझा करने को लेकर एक अंदरूनी समझ बनी थी. इसके तहत पहले सिद्धारमैया मुख्यमंत्री बने और बाद में शिवकुमार को जिम्मेदारी देने की बात कही गई थी.

कांग्रेस नेतृत्व ने कभी सार्वजनिक तौर पर इस फॉर्मूले को स्वीकार नहीं किया, लेकिन यह चर्चा लगातार राजनीतिक गलियारों में बनी रही. अब अगर सिद्धारमैया इस्तीफा देते हैं, तो कर्नाटक कांग्रेस में डीके शिवकुमार के अगले मुख्यमंत्री बनने की अटकलें और तेज हो गई हैं.

हालांकि कांग्रेस नेतृत्व यह भी सुनिश्चित करना चाहता है कि यह बदलाव किसी एक गुट की जीत और दूसरे की हार की तरह न दिखे. पार्टी को डर है कि अगर सिद्धारमैया को अपमानित महसूस कराया गया, तो राज्य इकाई में गुटबाजी और बढ़ सकती है.

2029 चुनाव को लेकर कांग्रेस की क्या है रणनीति?

सिद्धारमैया को राष्ट्रीय राजनीति में लाने की कोशिश को कांग्रेस की 2029 लोकसभा चुनाव रणनीति का हिस्सा भी माना जा रहा है. राहुल गांधी लगातार OBC राजनीति, जातीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय को कांग्रेस की राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला रहे हैं. कई राज्यों में पिछड़े वर्गों के बीच पार्टी को मिले समर्थन के बाद कांग्रेस अब इस सामाजिक समीकरण को और मजबूत करना चाहती है.

इसी रणनीति के तहत सिद्धारमैया को सिर्फ कर्नाटक के नेता के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय OBC चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है. पार्टी को लगता है कि वह भाजपा के खिलाफ कांग्रेस के सामाजिक गठबंधन को मजबूत करने में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

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