बंगाल में खेला शुरू! इन 6 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हुईं काकोली घोष, जानिए अब ममता के पास कितने बचे MLA
पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर देखने को मिला है. TMC की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार के साथ 6 विधायकों के बीजेपी खेमे में शामिल होने से ममता बनर्जी की पार्टी को बड़ा झटका लगा है. प्रशासनिक बैठक में उनकी मौजूदगी ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है. जहां 81 सीट मिली थी वहीं अब 6 विधायक भाजपा में शामिल होने के बाद 75 ही बचें.
पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनाव के बाद समीकरण अब असली खेल शुरु हो गया है और लगातार हालात बदलते नजर आ रहे हैं. मंगलवार को भाजपा द्वारा आयोजित कल्याणी स्थित एपीजे अब्दुल कलाम ऑडिटोरियम में एक प्रशासनिक समीक्षा बैठक ने राजनीतिक हलकों में नई बहस छेड़ दी. जब तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष दस्तिदार और पार्टी के छह विधायक मंच पर एक साथ नजर आए जिसके बाद हल्ला मच गया है कि सांसद काकोली घोष 6 विधायकों के साथ भाजपा में शामिल हो गई है.
बैठक के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनीं TMC सांसद काकोली घोष दस्तिदार, जो हाल ही में संगठनात्मक पद से इस्तीफा देने के बाद सुर्खियों में थीं. मंच पर उनकी सहज मौजूदगी ने राजनीतिक अटकलों को और हवा दे दी. हालांकि, उन्होंने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि 'प्रशासन सबका होता है.'
BJP में शामिल होने वाले 6 विधायक कौन?
इस प्रशासनिक समीक्षा बैठक में काकोली घोष के अलावा टीएमसी के कई विधायक भी मौजूद रहे, जिनमें शामिल हैं-
- देगंगा से विधायक अनिसुर रहमान बिस्वास
- स्वरूपनगर से विधायक बीना मंडल
- हरोआ से विधायक मोहम्मद अब्दुल मतीन
- बसीरहाट क्षेत्र के तीन अन्य विधायक
इन सभी विधायकों ने साफ कहा कि उनका उद्देश्य अपने-अपने क्षेत्रों के विकास मुद्दों को उठाना था. मैं अपने क्षेत्र के विकास के लिए आई हूं' – बीना मंडल. विधायकों ने अपनी मौजूदगी को पूरी तरह प्रशासनिक बताते हुए कहा कि वे विकास कार्यों के लिए बैठक में शामिल हुए हैं. बीना मंडल ने कहा कि मैं अपने विधानसभा क्षेत्र के विकास के लिए यहां आई हूं. हमारी पार्टी के कुल छह विधायक इस बैठक में शामिल हुए हैं."
सरकार ने हमें बुलाया था-TMC विधायक
मोहम्मद अब्दुल मतीन ने बैठक में अपनी मौजूदगी पर सफाई देते हुए कहा कि 'राज्य सरकार ने हमें आमंत्रित किया था, इसलिए मैं एक विधायक के तौर पर यहां आया हूं.' वहीं अनिसुर रहमान बिस्वास ने कहा कि उनके क्षेत्र में कई पिछड़े इलाके हैं और विकास के लिए सरकारी सहयोग जरूरी है.
बैठक के बाद बीजेपी सरकार की ओर से इसे नई प्रशासनिक संस्कृति बताया गया. मुख्यमंत्री ने कहा कि अब विपक्षी विधायकों को भी विकास योजनाओं में शामिल किया जा रहा है. उन्होंने कहा कि 'जब हम विपक्ष में थे, तब हमें प्रशासनिक बैठकों में नहीं बुलाया जाता था. हमने फैसला किया कि अब जनप्रतिनिधियों को इन बैठकों में आमंत्रित किया जाएगा.' उन्होंने आगे कहा कि हम चाहते हैं कि लोगों को डबल-इंजन सरकार का लाभ मिले. राजनीतिक गतिविधियाँ केवल चुनाव के समय होनी चाहिए; पूरे साल हम रचनात्मक विचारों के साथ काम करेंगे."
पिछले 15 सालों में यह परंपरा नहीं चली- TMC से भी मिला समर्थन
दिलचस्प बात यह रही कि टीएमसी के भीतर से भी इस पहल को समर्थन मिला. पार्टी विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि 'यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि पिछले 15 वर्षों में इस परंपरा का पालन नहीं किया गया.'
क्या बंगाल में बदल रहे हैं राजनीतिक समीकरण?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह पूरा घटनाक्रम केवल प्रशासनिक बैठक नहीं, बल्कि बंगाल की बदलती राजनीतिक हवा का संकेत है. TMC सांसद और छह विधायकों की एक साथ BJP सरकार के मंच पर मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं- क्या यह सिर्फ विकास की पहल है या फिर राजनीतिक समीकरणों में बड़े बदलाव की शुरुआत? फिलहाल सभी नेता इसे प्रशासनिक भागीदारी बता रहे हैं, लेकिन बंगाल की राजनीति में अक्सर बयान नहीं, बल्कि तस्वीरें ज्यादा बड़ा संदेश देती हैं.




