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Ranveer Singh का बैन होना कितना लीगल? फरहान अख्तर ने क्यों नहीं किया कोर्ट रुख; खतरे में है फिल्म 'प्रलय'

रणवीर सिंह के ‘डॉन 3’ से बाहर होने के बाद FWICE ने उनके खिलाफ असहयोग नोटिस जारी कर दिया है. अब सवाल उठ रहा है कि क्या इसका असर उनकी आगामी फिल्म ‘प्रलय’ की शूटिंग पर पड़ेगा.

Ranveer Singh का बैन होना कितना लीगल? फरहान अख्तर ने क्यों नहीं किया कोर्ट रुख; खतरे में है फिल्म प्रलय
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( Image Source:  IMDB )
रूपाली राय
Edited By: रूपाली राय5 Mins Read

Published on: 26 May 2026 9:53 PM

हाल ही में बॉलीवुड में एक नया विवाद चर्चा का विषय बन गया है. पश्चिमी भारत सिनेमा कर्मचारी संघ (FWICE) के अध्यक्ष बीएन तिवारी ने मुंबई में मीडिया से बात करते हुए कहा कि 'कोई भी सुपरस्टार कानून से ऊपर नहीं है'. यह बयान एक्टर रणवीर सिंह के फरहान अख्तर की फिल्म 'डॉन 3' से अचानक बाहर निकल जाने के मामले से जुड़ा है. FWICE ने अब अपने चार लाख से ज्यादा सदस्यों जिनमें टेक्नीशियन, क्रू मेंबर्स और दूसरे स्टाफ शामिल हैं को निर्देश दिया है कि वे रणवीर सिंह के साथ तब तक कोई काम न करें, जब तक एक्टर खुद उनके सामने पेश होकर इस मुद्दे का हल नहीं निकाल लेते. इस फैसले से रणवीर सिंह की आने वाली फिल्म 'प्रलय' की शूटिंग प्रभावित हो सकती है. फिल्म की शूटिंग जल्द शुरू होने वाली है और क्रू जुटाना अब काफी मुश्किल हो सकता है.

FWICE वाकई रणवीर पर बैन लगा सकती है?

यह सबसे बड़ा सवाल है. FWICE एक ट्रेड यूनियन है, यानी फिल्म इंडस्ट्री के कर्मचारियों का संगठन. लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि वे किसी एक्टर पर पाबंदी लगा सकते हैं? मीडिया और मनोरंजन के मशहूर वकील संजय वासुदेवन ने इस बारे में साफ कहा है कि FWICE कोई सरकारी या वैधानिक संस्था नहीं है. यह सिर्फ शिल्प संघों (क्राफ्ट यूनियंस) का एक संघ है. इसका अधिकार केवल अपने सदस्यों तक सीमित है और यह सर्वसम्मति पर चलता है. रणवीर सिंह FWICE के सदस्य नहीं हैं, इसलिए यह निर्देश उन पर सीधे लागू नहीं होता. वकील साहब कहते हैं कि यह निर्देश रणवीर या किसी तीसरे पक्ष (जैसे प्रोडक्शन हाउस) पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है. मतलब, कानूनी तौर पर यह 'प्रतिबंध' नहीं माना जा सकता.

रणवीर को FWICE से जुड़ना जरूरी है?

नहीं....रणवीर सिंह कानूनी रूप से FWICE के साथ बातचीत करने के लिए मजबूर नहीं हैं. संगठन ने दावा किया है कि उन्होंने रणवीर को हर 10 दिन में तीन बार रिमाइंडर भेजे थे, लेकिन वासुदेवन के अनुसार यह सिर्फ अनुरोध था, कोई आदेश नहीं. किसी गैर-सरकारी संगठन के अनुरोध को मानने या न मानने का पूरा अधिकार व्यक्ति को है. हालांकि, एक्सपर्ट सलाह देते हैं कि ऐसे मामलों में बातचीत करना हमेशा बेहतर होता है. इंडस्ट्री में कई स्टेकहोल्डर होते हैं और लंबे समय तक मामलों के न सुलझाने पर स्थिति और खराब हो सकती है, लेकिन यह व्यावसायिक फैसला है, कानूनी मजबूरी नहीं.

'प्रलय' फिल्म पर क्या असर पड़ेगा?

रणवीर सिंह ने जय मेहता की फिल्म 'प्रलय' (जॉम्बी एपोकैलिप्स थ्रिलर) के लिए हामी भर दी है. यह भारी बजट वाली फिल्म है और इस साल शूटिंग शुरू होने वाली है. निर्माता कंपनियां अप्लॉज़ एंटरटेनमेंट और ट्रू स्टोरी फिल्म्स अब चिंतित हो सकती हैं. वकील संजय वासुदेवन कहते हैं कि इस मामले में रिस्क ऑपरेशनल का है, कानूनी नहीं. अगर क्रू मेंबर्स काम करने से मना कर दें तो शूटिंग रुक सकती है, लेकिन निर्माताओं को पनिश करने का कोई कानूनी तरीका FWICE के पास नहीं है. FWICE ने निर्माताओं को चेतावनी दी है, लेकिन यह सिर्फ चेतावनी है, कानूनी रोक नहीं. फिर भी, यूनियन अगर सहयोग न करे तो प्रोडक्शन हाउस को परेशानी हो सकती है. यह दोनों तरफ से दबाव बनाने वाली स्थिति है.

फरहान अख्तर क्यों नहीं गए कोर्ट?

'डॉन 3' से रणवीर के बाहर होने पर एक्सेल एंटरटेनमेंट (फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी की कंपनी) ने अभी तक कोर्ट का रास्ता नहीं अपनाया है. पहले ऐसे मामलों में प्रोडक्शन हाउस कानूनी नोटिस भेजते रहे हैं. वासुदेवन का अनुमान है कि कॉन्ट्रैक्ट में कुछ ऐसे क्लॉज रहे होंगे जो यूनियनों के हस्तक्षेप को रोकते हों. साथ ही, कंपनसेशन का अमाउंट लिमिटेड हो सकता है. रणवीर और एक्सेल के बीच पहले दो सफल फिल्में 'दिल धड़कने दो' और 'गली बॉय' हो चुकी हैं, इसलिए कॉन्ट्रैक्ट में कई बातें पहले से तय रही होंगी.

रणवीर FWICE पर मुकदमा कर सकते हैं?

अगर स्थिति बिगड़ती है तो रणवीर सिंह FWICE के निर्देश को चुनौती दे सकते हैं. वे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19(1)(g) (व्यवसाय करने का अधिकार), प्रतिस्पर्धा अधिनियम और अनुबंध अधिनियम की धाराओं के तहत कोर्ट जा सकते हैं. वासुदेवन कहते हैं कि यह मामला भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में ट्रेड यूनियनों की सीमाओं को परखने वाला पहला औपचारिक केस बन सकता है. पहले ऐसे विवाद अनौपचारिक तरीके से, जैसे वरिष्ठों की मध्यस्थता से सुलझते थे.

इंडस्ट्री के लोगों की राय

ट्रेलर लॉन्च के मौके पर मनोज बाजपेयी ने कहा कि पूरा इंडस्ट्री सोशल मीडिया पर यह खबर पढ़ रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मामला जल्द सुलझ जाएगा. FWICE के मुख्य सलाहकार अशोक पंडित ने स्पष्ट किया कि यह बैन नहीं बल्कि 'असहयोग नोटिस' है. सदस्यों को रणवीर के साथ काम न करने की सलाह दी गई है, लेकिन अंतिम फैसला व्यक्तिगत सदस्यों का है. उन्होंने चिंता जताई कि एक्टर्स द्वारा अचानक प्रोजेक्ट छोड़ने की प्रवृत्ति छोटे-मोटे प्रोडक्शन हाउस को भारी नुकसान पहुंचा सकती है.

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