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Iran से लेकर Russia तक, तेल खरीदने पर US में क्या बोल गए Ram Madhav? बाद में मांगी माफी

RSS से जुड़े राम माधव ने रूस से तेल आयात रोकने वाले अपने बयान को गलत बताया और कहा कि भारत ने ऐसा कोई फैसला नहीं लिया. उन्होंने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए यह भी कहा कि अमेरिका के टैरिफ का भारत ने विरोध किया था.

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राम माधव
( Image Source:  x.com/rammadhav_ )

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े नेता राम माधव (Ram Madhav) ने अपने उस बयान पर सफाई दी है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत ने रूस से तेल आयात रोकने पर सहमति जताई थी. शुक्रवार को उन्होंने खुद स्वीकार किया कि उनका यह बयान 'तथ्यात्मक रूप से गलत' था और भारत ने रूस से तेल खरीदना बंद करने पर कभी सहमति नहीं दी.

दरअसल, यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब हडसन इंस्टीट्यूट (Hudson Institute) में आयोजित New India Conference के दौरान वॉशिंगटन डीसी में राम माधव ने भारत-अमेरिका संबंधों पर बोलते हुए कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए कई कदम उठाए हैं, जिनमें ईरान और रूस से तेल आयात रोकना भी शामिल है.

राम माधव ने सफाई देते हुए क्या कहा?

राम माधव के इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई, खासकर विपक्ष ने इसे लेकर सरकार पर सवाल उठाए. इसके बाद राम माधव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अपनी बात स्पष्ट की. उन्होंने लिखा, “जो मैंने कहा, वह गलत था. भारत ने रूस से तेल आयात रोकने पर कभी सहमति नहीं दी. साथ ही, अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ का भारत ने जोरदार विरोध किया था. मैं केवल एक सीमित संदर्भ में बात रख रहा था, लेकिन तथ्यात्मक रूप से यह सही नहीं था.”

राम माधव ने क्या कहा था?

अपने मूल भाषण में राम माधव ने यह भी कहा था कि भारत ने अमेरिका के साथ संबंध मजबूत करने के लिए कई मुश्किल फैसले लिए, जिनमें ईरान से तेल खरीदना बंद करना और अमेरिका के टैरिफ को लेकर संयम दिखाना शामिल है. इस पैनल चर्चा में अमेरिकी राजनयिक Kurt Campbell और स्टिमसन सेंटर की Elizabeth Threlkeld भी मौजूद थीं.

राम माधव के बयान में रूस से तेल आयात रोकने की बात सामने आने के बाद विवाद बढ़ गया, क्योंकि भारत लगातार Russia से तेल खरीदता रहा है, खासकर यूक्रेन युद्ध के बाद जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में बदलाव आया. अब राम माधव की सफाई के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि भारत की आधिकारिक नीति में रूस से तेल आयात रोकने का कोई फैसला नहीं लिया गया है.

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