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क्या मिल गई मोदी-शाह को संजीवनी बूटी, First Phase के बाद सातवें आसमान पर क्यूं है कॉन्फिडेंस, Facts and Detailed

बंगाल चुनाव के पहले चरण में रिकॉर्ड वोटिंग के बाद बीजेपी का कॉन्फिडेंस क्यों बढ़ा? मोदी-शाह के दावों के पीछे का डेटा, रणनीति और सियासी गणित समझें.

क्या मिल गई मोदी-शाह को संजीवनी बूटी, First Phase के बाद सातवें आसमान पर क्यूं है कॉन्फिडेंस, Facts and Detailed
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बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के मतदान के बाद सियासी माहौल अचानक गरमा गया है. रिकॉर्ड स्तर के मतदान, जमीनी रिपोर्ट और आक्रामक चुनावी कैंपेन ने चुनाव को नई दिशा दे दी है. इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बयानों ने राजनीतिक हलकों में हलचल तेज कर दी है. बीजेपी खेमे में जिस तरह का आत्मविश्वास दिख रहा है, उसे विपक्ष ओवरकॉन्फिडेंस बता रहा है. जबकि पार्टी इसे जमीनी सच्चाई और डेटा पर आधारित दावा मान रही है. हाई वोटिंग प्रतिशत को बीजेपी बदलाव की लहर से जोड़ रही है. वहीं, तृणमूल कांग्रेस इसे अपने पक्ष में मजबूत लामबंदी बता रही है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या सच में बीजेपी को कोई “संजीवनी बूटी” मिल गई है, या यह सिर्फ चुनावी रणनीति और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने का हिस्सा है.

पीएम मोदी बोले - बंपर वोटिंग से बदलाव तय!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोलकात में एक सियासी जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, "बंगाल के पहले चरण का मतदान हो चुका है और पहले चरण में बंपर मतदान हुआ है. देश आजाद होने के बाद कभी ऐसा नहीं देखा, जो इस बार बंगाल के लोगों ने कर दिखाया. हर तरफ यही चर्चा है कि भाजपा को कितना बड़ा समर्थन बंगाल में मिला है. आज बंगाल के छोटे दूकानदारों से लेकर बड़े व्यापारी तक, सब भयमुक्त होकर भाजपा की सरकार के लिए समर्थन दे रहे हैं. हर कोई परिवर्तन के लिए भाजपा के भरोसे पर बंगाल का भाग्य बनाने के लिए तैयार हैं."

पीएम ने आगे कहा कि बंगाल की जनता ने 152 सीटों पर भारी संख्या में मतदान कर लोकतंत्र को मजबूत किया है और यह उत्साह बदलाव की स्पष्ट निशानी है. उन्होंने कहा कि लोगों का भरोसा विकास, पारदर्शिता और सुशासन की राजनीति पर बढ़ा है, और यही रुझान चुनाव के नतीजों में दिखाई देगा. उन्होंने विश्वास जताया कि राज्य में जनता एक स्थिर और विकास केंद्रित सरकार चाहती है, और आने वाले चरणों में यह समर्थन और स्पष्ट होता जाएगा.

शाह ने किस आधार पर किया 152 में से 110 पर जीत का दावा?

इस बीच केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के पहले चरण के बाद बड़ा दावा करते हुए कहा कि 152 सीटों में से भाजपा 110 से ज्यादा सीटें जीत रही है. उन्होंने इस आत्मविश्वास के पीछे मजबूत बूथ मैनेजमेंट, ग्राउंड रिपोर्ट और आंतरिक सर्वे को कारण बताया. शाह के अनुसार, जिन सीटों पर पिछली बार भाजपा दूसरे नंबर पर थी, वहां इस बार बढ़त मिली है. 2024 लोकसभा चुनाव के आंकड़ों और वोट शेयर में सुधार ने भी भाजपा को बढ़त दिलाई है. उन्होंने कहा कि कम अंतर वाली सीटों पर विशेष रणनीति अपनाई गई, जिससे जीत का रास्ता साफ हुआ और भाजपा इस बार बड़ा प्रदर्शन करने जा रही है.

बंगाल में चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, "मैं चुनाव आयोग, CAPF, चुनाव आयोग के सहयोग में लगा पूरा तंत्र और बंगाल पुलिस को बहुत-बहुत अभिनंदन देना चाहता हूं क्योंकि बहुत लंबे अरसे बाद बंगाल के चुनाव में एक भी मृत्यु नहीं हुई, ऐसा चुनाव हुआ है."

फिलहाल, बंगाल चुनाव के पहले चरण में मतदान प्रतिशत में उम्मीद से ज्यादा इजाफा न केवल चौंकाने वाला है, बल्कि यह राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा के केंद्र में आ गया है. जहां आम मतदाता भारी वोटिंग को लोकतांत्रिक जागरूकता के संकेत के रूप में इसे देख रहे हैं तो सियासी जानकार इसके राजनीतिक मायने अपने अपने तरीके से निकाल रहे हैं. आमतौर पर ज्यादा मतदान को जनमत में बदलाव का संकेत माना जाता है. हालांकि, हर बार ऐसा नहीं होता. बंगाल में भी यही सवाल है कि क्या बढ़ी हुई वोटिंग सत्ता विरोधी लहर का संकेत है या सत्तारूढ़ दल के पक्ष में लामबंदी का परिणाम. फिलहाल, लोग यह भी जानना चाह रहे हैं, बंगाल के अलावा वो राज्य कौन-कौन से हैं, जहां परा मतदान में बढ़ोतरी का लाभ सत्ताधारी पार्टी को मिला. क्या इसमें बीजेपी शासित राज्य भी शामिल हैं. जानें पूरा डिटेल.

हरियाणा: विधानसभा चुनाव 2019 में वोटिंग करीब 68.5% रही, जो 2024 के चुनाव से लगभग 1% ज्यादा थी. इसके बावजूद बीजेपी ने सरकार बनाई और बीजेपी सत्ता बरकरार रखने में सफलता मिली.

महाराष्ट्र: विधानसभा चुनाव 2019 कुल मतदान लगभग 61.1% हुआ था. 2024 विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत करीब 65% रहा. यानी 3.5 प्रतिशत ज्यादा. बीजेपी गठबंधन प्रचंड बहुमत से चुनाव जीत कर सत्ता में वापसी की और देवेंद्र फडणवीस सीएम बने.

बिहार: विधानसभा चुनाव 2020 में कुल मतदान: लगभग 57.05% हुआ था. जबकि 2025 विधानसभा चुनाव 65 प्रतिशत से ज्यादा मतदान हुआ था. वहां भी एनडीए गठबंधन सरकार बनाने में कामयाब हुई. पहले नीतीश सीएम बने और अब वहां के सीएम सम्राट चौधरी हैं.

दिल्ली: विधानसभा चुनाव 2020 में कुल मतदान लगभग 62.6% हुआ था. आम आदमी पार्टी सरकार बनाने में सफल हुई थी. 2025 विधानसभा चुनाव मतदान करीब 60.4% ही हुआ, लेकिन बीजेपी दिल्ली की सत्ता में 27इ साल बाद वापसी करने में सफल हुई थी.

मध्य प्रदेश: साल 2018 में बीजेपी चुनाव हारी थी, लेकिन 2023 के चुनाव में रिकॉर्ड मतदान 76 प्रतिशत रहा और बीजेपी सरकार बनाने में सफल हुई. वहीं, त्रिपुरा में 2023 में वोटिंग प्रतिशत 89% रह जो 2018 से ज्यादा है. बीजेपी सत्ता में थी और दोबारा सरकार बनाने में सफली हुई.

मतदान प्रतिशत से साफ है कि ज्यादा वोटिंग हमेशा सत्ता परिवर्तन का संकेत नहीं होती. कई बार सत्तारूढ़ दल भी बेहतर संगठन और रणनीति के जरिए इसका लाभ उठा लेता है, जैसा कुछ राज्यों में बीजेपी के साथ देखने को मिला.

विधानसभा चुनाव 2026नरेंद्र मोदीअमित शाह
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