बुलेटप्रूफ कार, डमी व्हीकल और जैमर...ऐसा होता है PM Modi का सुपर सिक्योर काफिला, जिसे खुद प्रधानमंत्री ने घटाने के दिए निर्देश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का काफिला दुनिया की सबसे हाई-सिक्योरिटी व्यवस्थाओं में गिना जाता है. पीएम ने काफिले में अब गाड़ियों की संख्या कम करने के निर्देश दिए गए हैं.
PM Modi Convoy Detail: देश में बढ़ती वैश्विक अनिश्चितताओं और ईंधन बचत को लेकर अब केंद्र और राज्य सरकारें सक्रिय होती नजर आ रही हैं. हाल ही में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देशवासियों से ईंधन की खपत कम करने की अपील की थी. अब सूत्रों के हवाले से जानकारी सामने आई है कि प्रधानमंत्री ने अपने काफिले में शामिल वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं.
जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री मोदी ने अपने काफिले में इस्तेमाल होने वाले वाहनों की संख्या लगभग आधी करने को कहा है. इस संबंध में Special Protection Group (SPG) को निर्देश जारी किए गए हैं. साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की संख्या बढ़ाई जाए, लेकिन इसके लिए नए वाहन नहीं खरीदे जाएं.
क्या एसपीजी उठा रहा है कदम?
सूत्रों का कहना है कि SPG ने इन निर्देशों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. हालांकि यह भी सुनिश्चित किया जा रहा है कि सुरक्षा से जुड़े “ब्लू बुक” दिशा-निर्देशों का पूरी तरह पालन हो और प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था में किसी तरह की कमी न आए. बताया जा रहा है कि सिर्फ प्रधानमंत्री कार्यालय ही नहीं, बल्कि केंद्र सरकार के कई मंत्रालय भी अब ईंधन बचत को लेकर अलग-अलग स्तर पर कदम उठाने की तैयारी कर रहे हैं.
कैसा होता है प्रधानमंत्री का काफिला?
भारत के प्रधानमंत्री की सुरक्षा व्यवस्था दुनिया की सबसे हाई-प्रोफाइल और जटिल सुरक्षा प्रणालियों में मानी जाती है. प्रधानमंत्री की सुरक्षा का पूरा जिम्मा Special Protection Group यानी एसपीजी के पास होता है. इस विशेष सुरक्षा बल का गठन वर्ष 1988 में किया गया था. एसपीजी का मुख्य काम प्रधानमंत्री और उनके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
कैसे काम करती है एसपीजी?
एसपीजी चार अलग-अलग हिस्सों में काम करती है. इनमें ऑपरेशन्स, ट्रेनिंग, इंटेलिजेंस एंड टूर्स और एडमिनिस्ट्रेशन शामिल हैं. प्रधानमंत्री की यात्रा, सुरक्षा रूट, भीड़ नियंत्रण, खुफिया जानकारी और काफिले की सुरक्षा से जुड़े सभी पहलुओं पर यही एजेंसी निगरानी रखती है.
कैसी होती हैं काफिले की गाड़ियां?
प्रधानमंत्री Narendra Modi जिन गाड़ियों में सफर करते हैं, वे अत्याधुनिक सुरक्षा तकनीकों से लैस होती हैं. उनके काफिले में बुलेटप्रूफ रेंज रोवर, मर्सडीज और BMW 7 Series 760Li जैसी हाई सिक्योरिटी गाड़ियां शामिल रहती हैं. हाल के समय में काफिले में Mercedes-Maybach S650 Guard को भी शामिल किया गया था, जिसे दुनिया की सबसे सुरक्षित लग्जरी कारों में गिना जाता है.
Mercedes-Maybach S650 Guard में VR10 लेवल की सुरक्षा दी गई है. इसकी पूरी बॉडी विशेष बख्तरबंद धातु से तैयार की गई है, जिससे यह किसी चलते-फिरते सुरक्षित बंकर की तरह काम करती है. बताया जाता है कि यह कार 2 मीटर की दूरी पर हुए करीब 15 किलोग्राम TNT विस्फोट को भी झेल सकती है. कार पर पॉलीकार्बोनेट की विशेष कोटिंग की गई है, जो धमाके की स्थिति में अंदर बैठे लोगों को अतिरिक्त सुरक्षा देती है.
प्रधानमंत्री के काफिले में सिर्फ एक मुख्य कार नहीं होती, बल्कि उसी मॉडल की दो डमी कारें भी साथ चलती हैं. सुरक्षा एजेंसियां इसे संभावित हमले की स्थिति में भ्रम पैदा करने की रणनीति मानती हैं.
क्या-क्या सेफ्टी के होते हैं इतजाम?
- प्रधानमंत्री के कारकेड में जैमर वाहन भी शामिल होते हैं. इन वाहनों पर लगे एंटीना सड़क के आसपास मौजूद संदिग्ध इलेक्ट्रॉनिक सिग्नल और विस्फोटकों को निष्क्रिय करने की क्षमता रखते हैं.
- बताया जाता है कि ये सिस्टम सड़क के दोनों ओर लगभग 100 मीटर तक निगरानी और सुरक्षा देने में सक्षम होते हैं. काफिले की हर गाड़ी में National Security Guard (NSG) के प्रशिक्षित कमांडो तैनात रहते हैं. प्रधानमंत्री की सुरक्षा में करीब 100 लोगों की विशेष सुरक्षा टीम शामिल होती है.
- प्रधानमंत्री की यात्रा से पहले सुरक्षा एजेंसियां कई स्तरों पर तैयारी करती हैं. दिल्ली या किसी भी राज्य में दौरे के दौरान उनका रूट लगभग 7 घंटे पहले तय किया जाता है. इसके साथ ही दो वैकल्पिक मार्ग भी पहले से तैयार रखे जाते हैं.
- मुख्य मार्ग और वैकल्पिक रूट दोनों पर पहले से सुरक्षा अभ्यास और रिहर्सल की जाती है. प्रधानमंत्री जिस रास्ते से गुजरने वाले होते हैं, वहां कई घंटे पहले सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी जाती है.
- रास्ते के दोनों ओर हर 50 से 100 मीटर पर पुलिसकर्मी तैनात किए जाते हैं. प्रधानमंत्री के काफिले के गुजरने से करीब 10 से 15 मिनट पहले उस रूट पर आम लोगों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी जाती है.
- प्रधानमंत्री के काफिले के आगे स्थानीय पुलिस और दिल्ली पुलिस की गाड़ियां चलती हैं, जो रास्ता साफ कराती हैं. स्थानीय पुलिस लगातार एसपीजी को रूट की स्थिति की जानकारी देती रहती है, जिसके बाद काफिला आगे बढ़ता है.
- अगर मुख्य मार्ग में किसी तरह की तकनीकी या सुरक्षा समस्या सामने आती है, तो तुरंत वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल किया जाता है. यहां तक कि अगर प्रधानमंत्री विमान से यात्रा कर रहे हों और मौसम खराब हो जाए, तब भी पहले से तय वैकल्पिक सड़क मार्ग तैयार रखा जाता है.
प्रधानमंत्री के काफिले में कितने होते हैं वाहन?
प्रधानमंत्री का कारकेड कई तरह के सुरक्षा वाहनों से मिलकर बनता है. सबसे आगे एडवांस पायलट वार्निंग वाहन चलता है. इसके पीछे टेक्निकल कार, वीवीआईपी कार, जैमर वाहन, अतिरिक्त वीवीआईपी वाहन, एंबुलेंस और अन्य सुरक्षा गाड़ियां शामिल रहती हैं.
आमतौर पर प्रधानमंत्री के काफिले में कम से कम पांच मुख्य वाहन होते हैं. इनमें पायलट वाहन, एसपीजी एस्कॉर्ट कार, प्रधानमंत्री की मुख्य कार, दूसरी एस्कॉर्ट गाड़ी और एक स्पेयर वाहन शामिल होता है. इनके पीछे स्थानीय प्रशासन और पुलिस अधिकारियों की गाड़ियां चलती हैं.
क्या बीजेपी के मुख्यमंत्रियों ने भी दिए ये आदेश?
इसी बीच बीजेपी शासित कई राज्यों में भी इस दिशा में कार्रवाई शुरू हो गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और राजस्थान के मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिलों में वाहनों की संख्या कम करने के निर्देश दिए हैं.
योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?
Yogi Adityanath ने प्रधानमंत्री की अपील के बाद अधिकारियों के साथ बैठक कर अपने और अन्य मंत्रियों के काफिलों में 50 प्रतिशत तक कटौती करने के निर्देश दिए हैं. उन्होंने मुख्य सचिव, डीजीपी, अपर मुख्य सचिवों और प्रमुख सचिवों के साथ हुई बैठक में कहा कि गैरजरूरी वाहनों को तुरंत हटाया जाए.
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया में जिस तरह का उथल-पुथल भरा माहौल बना हुआ है, उसे देखते हुए सभी को सतर्क और जिम्मेदार रवैया अपनाने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के आह्वान के पालन के लिए सभी राज्यों को तैयार रहना चाहिए.
सीएम योगी ने जनप्रतिनिधियों से क्या की अपील?
मुख्यमंत्री ने मंत्रियों, सांसदों, विधायकों और अन्य जनप्रतिनिधियों से यह भी अपील की कि वे सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करें. इसके अलावा हफ्ते में एक दिन “नो व्हीकल डे” आयोजित करने का सुझाव भी दिया गया है ताकि ईंधन की बचत की जा सके. वहीं केंद्रीय मंत्री CR Patil ने भी अपने एस्कॉर्ट वाहन का इस्तेमाल नहीं करने का फैसला लिया है.
सरकारी स्तर पर उठाए जा रहे इन कदमों को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और भू-राजनीतिक तनाव लगातार बढ़ रहे हैं. ऐसे में सरकार ईंधन बचत और संसाधनों के सीमित उपयोग को लेकर गंभीर नजर आ रही है.




