Telegram से NEET पेपर खरीदकर बेचने वाला कौन है शुभम खैरनार? मंदिर जाते वक्त पुलिस ने ऐसे किया गिरफ्तार- Updates
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में महाराष्ट्र के नासिक से गिरफ्तार शुभम खैरनार का नाम सामने आने के बाद बड़ा खुलासा हुआ है. आरोप है कि BAMS छात्र शुभम ने Telegram के जरिए लीक पेपर खरीदा और फिर उसे हरियाणा तक पहुंचाया. पुलिस ने उसे मंदिर जाते समय पुराने फोटो के आधार पर पहचानकर दबोचा.
NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब जांच सिर्फ एक एग्जाम घोटाले तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह देश के सबसे बड़े ‘एजुकेशन अंडरवर्ल्ड’ की कहानी बनती जा रही है. 22 लाख छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ करने वाले इस नेटवर्क में अब एक ऐसा नाम सामने आया है, जिसने जांच एजेंसियों की नींद उड़ा दी है. शुभम खैरनार. महाराष्ट्र के नासिक से गिरफ्तार हुआ यह युवक अब पूरे पेपर लीक सिंडिकेट की अहम कड़ी माना जा रहा है.
राजस्थान पुलिस के इनपुट पर नासिक क्राइम ब्रांच ने जिस तरह शुभम को पकड़ा, उसने साफ कर दिया कि यह खेल सिर्फ WhatsApp और Telegram तक सीमित नहीं था. जांच एजेंसियों को शक है कि मेडिकल स्टूडेंट्स, कोचिंग लॉबी, डिजिटल चैनल और अंदरूनी सिस्टम के लोग मिलकर करोड़ों रुपये का नेटवर्क चला रहे थे. अब इस केस के तार मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी तक पहुंचने की आशंका जताई जा रही है.
कौन है शुभम खैरनार, जिसने NEET पेपर लीक केस में मचा दी हलचल?
शुभम खैरनार महाराष्ट्र के नासिक जिले के इंदिरानगर इलाके का रहने वाला है. करीब 30 वर्षीय शुभम मेडिकल फील्ड से जुड़ा छात्र बताया जा रहा है. जांच एजेंसियों के मुताबिक, उसका संबंध मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मेडिकल साइंसेज से भी जुड़ा हुआ है, जहां मेडिकल और आयुष से जुड़े कई कोर्स संचालित होते हैं. सूत्रों का दावा है कि शुभम ने NEET परीक्षा से पहले कथित 'गेस पेपर' हासिल किया था. बाद में उसी पेपर की डिजिटल कॉपी हरियाणा तक पहुंचाई गई. जांच एजेंसियों को शक है कि यही पेपर बाद में Telegram और WhatsApp ग्रुप्स में वायरल हुआ.
कैसे पकड़ा गया शुभम? मंदिर जा रहा था, तभी घेर लिया गया
जांच में सामने आया कि शुभम खैरनार को भनक लग चुकी थी कि पुलिस उसके करीब पहुंच चुकी है. खुद को बचाने के लिए उसने अपना हुलिया बदल लिया. बाल कटवा लिए, लुक बदल लिया और कथित तौर पर नकली पहचान का भी इस्तेमाल करने लगा. लेकिन तकनीकी सर्विलांस और पुराने फोटोग्राफ्स के जरिए क्राइम ब्रांच ने उसकी पहचान कर ली. बताया जा रहा है कि जब वह देवदर्शन के लिए जा रहा था, उसी दौरान पुलिस टीम ने उसे हिरासत में ले लिया.
क्या सीहोर यूनिवर्सिटी से जुड़े हैं इस केस के तार?
शुभम के श्री सत्यसाई यूनिवर्सिटी, सीहोर से जुड़े होने की जानकारी सामने आने के बाद अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या इस नेटवर्क में और भी मेडिकल छात्र या संस्थान जुड़े हुए हैं. यह यूनिवर्सिटी मेडिकल और आयुष कोर्सेस के लिए जानी जाती है. हालांकि, अब तक यूनिवर्सिटी की किसी प्रत्यक्ष भूमिका की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस इस एंगल से भी जांच कर रही है कि क्या आरोपी के संपर्क किसी बड़े नेटवर्क से जुड़े थे.
पेपर आखिर लीक कैसे हुआ?
3 मई को आयोजित हुई NEET-UG 2026 परीक्षा के बाद अचानक सोशल मीडिया पर एक “गेस पेपर” वायरल हुआ. जब छात्रों ने सवाल मिलाए, तो कई प्रश्न हूबहू असली परीक्षा से मैच करते पाए गए. आरोप है कि पेपर परीक्षा से करीब 42 घंटे पहले Telegram और WhatsApp चैनलों पर पहुंच चुका था. इसी के बाद पूरे देश में हड़कंप मच गया. छात्रों ने विरोध शुरू किया और आखिरकार NTA को परीक्षा रद्द करनी पड़ी.
क्या नासिक की प्रिंटिंग प्रेस से हुआ था लीक?
शुरुआत में यह आशंका जताई गई थी कि पेपर नासिक की किसी प्रिंटिंग प्रेस से लीक हुआ. लेकिन बाद में पुलिस सूत्रों ने कहा कि प्रश्नपत्र वहां प्रिंट ही नहीं हुआ था. अब जांच एजेंसियां इस बात का पता लगाने में जुटी हैं कि पेपर सबसे पहले किसके पास पहुंचा और किस चैन के जरिए उसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक फैलाया गया.
कौन है इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड?
सूत्रों के मुताबिक, मनीष यादव नाम का एक व्यक्ति इस पूरे नेटवर्क का कथित मास्टरमाइंड माना जा रहा है. जांच एजेंसियों का दावा है कि वही अलग-अलग राज्यों में पेपर सप्लाई और नेटवर्किंग संभाल रहा था. इसके अलावा राकेश मंडावरिया नाम के एक अन्य आरोपी को भी हिरासत में लिया गया है. उस पर लीक पेपर अलग-अलग लोगों तक पहुंचाने का आरोप है.
CBI की एंट्री के बाद क्या बदला?
केंद्र सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंप दी. अब तक 5 राज्यों से 9 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और करीब 45 लोगों से पूछताछ की गई है. CBI की चार टीमें नासिक पहुंच चुकी हैं और राजस्थान पुलिस के साथ मिलकर डिजिटल डेटा, Telegram चैट्स, बैंक ट्रांजैक्शन और कॉल रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं.
22 लाख छात्रों के भविष्य पर संकट
NEET-UG देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है. इस साल करीब 22 लाख छात्रों ने परीक्षा दी थी. परीक्षा रद्द होने के बाद लाखों छात्र नई तारीख, एडमिशन प्रोसेस और तैयारी को लेकर असमंजस में हैं. छात्रों का कहना है कि कुछ लोगों के लालच ने मेहनत करने वाले उम्मीदवारों के सपनों को बर्बाद कर दिया.




