30 दिन जेल में रहे तो हटेंगे PM-CM! मानसून सत्र में 130वां संविधान संशोधन बिल ला सकती है सरकार, क्या जुटा पाएगी दो-तिहाई बहुमत?
केंद्र सरकार मानसून सत्र में 130वें संविधान संशोधन विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी कर सकती है. इस बिल में प्रस्ताव है कि अगर कोई प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री गंभीर अपराधों के मामले में 30 दिन या उससे ज्यादा समय तक जेल में रहता है, तो उसकी कुर्सी अपने आप चली जाएगी.
PM-CM Removal Bill: केंद्र सरकार आगामी मानसून सत्र में 130वें संविधान संशोधन विधेयक को संसद से पास कराने की कोशिश कर सकती है. सूत्रों के मुताबिक, संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट आने के बाद सरकार इस बिल को चर्चा और मंजूरी के लिए आगे बढ़ा सकती है. यह वही बिल है जिसे 2025 के मानसून सत्र में संसद में पेश किया गया था और विपक्ष के विरोध के बाद इसे JPC के पास भेज दिया गया था.
क्या है 130वां संविधान संशोधन विधेयक?
इस प्रस्तावित बिल में प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्रियों के पद को लेकर बड़ा बदलाव सुझाया गया है. इसके तहत अगर कोई प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री किसी गंभीर अपराध, जिसमें भ्रष्टाचार जैसे मामले शामिल हैं, में गिरफ्तार होकर लगातार 30 दिनों तक जेल में रहता है तो उसे पद से हटाने का प्रावधान किया जा सकता है. अगर यह कानून बनता है तो देश के सबसे बड़े निर्वाचित पदों पर रहने वाले नेताओं के कार्यकाल और पद पर बने रहने के नियमों में बड़ा बदलाव आएगा.
बिल पास कराने के लिए चाहिए विशेष बहुमत
चूंकि यह बिल संविधान संशोधन से जुड़ा मामला है, इसलिए इसे सामान्य कानून की तरह साधारण बहुमत से पास नहीं किया जा सकता. संविधान के अनुच्छेद 368 के तहत इसे लोकसभा और राज्यसभा दोनों में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत से मंजूरी लेनी होगी. पिछली बार बिल पेश होने के बाद विपक्षी दलों ने इसका विरोध किया था और इसे विस्तार से जांच के लिए JPC को भेजने की मांग की थी।
क्या बदला है संसद का गणित?
- पिछले मानसून सत्र के मुकाबले अब संसद का राजनीतिक समीकरण कुछ बदला हुआ नजर आ रहा है. NDA की ताकत में कुछ बढ़ोतरी हुई है.
- पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद BJP की बड़ी जीत के बाद कुछ राजनीतिक बदलाव हुए. वहीं शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे वाली शिवसेना में शामिल होने से NDA की संख्या बढ़ी है.
- मौजूदा स्थिति में NDA के पास लोकसभा में करीब 330 सांसदों का समर्थन बताया जा रहा है, लेकिन संविधान संशोधन बिल पास कराने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत तक पहुंचने के लिए अभी भी उसे अतिरिक्त समर्थन की जरूरत होगी.
अब सबकी नजर मानसून सत्र और JPC की रिपोर्ट पर है, क्योंकि इसके बाद तय होगा कि सरकार इस बड़े संवैधानिक बदलाव को संसद में कितनी तेजी से आगे बढ़ाती है.




