करीब 36 साल पहले कश्मीर घाटी में आतंक के दौर के बीच एक ऐसी घटना हुई थी, जिसने इंसानियत को झकझोर दिया था. शेर-ए-कश्मीर इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में नर्स के रूप में काम करने वाली कश्मीरी पंडित सरला भट्ट का अपहरण किया गया, उनके साथ कथित तौर पर बर्बर अत्याचार किए गए और फिर बेरहमी से हत्या कर दी गई. आतंकियों ने उनके शव पर 'मुखबिर' लिखी तख्ती टांग दी थी, ताकि हत्या को सही ठहराया जा सके. अब, तीन दशक से ज्यादा समय बाद इस मामले में बड़ा मोड़ आया है. जांच एजेंसी ने पहली बार विस्तृत चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें प्रतिबंधित संगठन के पूर्व प्रमुख Yasin Malik समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है. जांच एजेंसी का दावा है कि सरला भट्ट को मुखबिर बताने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला और यह आरोप उनकी हत्या को उचित ठहराने के लिए गढ़ा गया था. अब यह मामला एक बार फिर कश्मीर में 1990 के दौर और कश्मीरी पंडितों पर हुए हमलों की दर्दनाक यादों को ताजा कर रहा है.