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कश्मीर की शादियों में छाया मटन का संकट, पंजाब की 'लेवी' से वाजवान की थाली मिलना हुआ मुश्किल; CM अब्दुल्ला ने मान को लिखा लेटर
कश्मीर में मटन की कमी से शादी समारोहों पर असर पड़ने लगा है. कारोबारियों का आरोप है कि पंजाब में पशु वाहनों से कथित लेवी वसूली के कारण सप्लाई बाधित हुई है. मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पंजाब सरकार से हस्तक्षेप कर समस्या दूर करने की मांग की है.
Omar Abdullah और Bhagwant Mann
( Image Source:
ANI )
Kashmir Mutton Shortage Crisis: कश्मीर में चल रहे शादी के सीजन पर मटन संकट का असर दिखाई देने लगा है. घाटी के मटन कारोबारियों का कहना है कि पंजाब में पशुओं की आवाजाही पर लगाई जा रही कथित अवैध लेवी के कारण राजस्थान और अन्य राज्यों से भेड़-बकरियों की सप्लाई प्रभावित हो गई है. इसका सीधा असर कश्मीर के पारंपरिक शादी समारोहों और मशहूर वाजवान (Wazwan) पर पड़ रहा है, जिसमें मटन सबसे अहम हिस्सा माना जाता है.
कश्मीर की शादियों में वाजवान के बिना आयोजन अधूरा माना जाता है. आमतौर पर एक सामान्य कश्मीरी शादी में करीब 500 किलो मटन और 150 किलो चिकन की खपत होती है, जबकि बड़े और भव्य आयोजनों में एक टन से ज्यादा मटन तक इस्तेमाल किया जाता है.
लेवी को लेकर क्यों मचा बवाल?
- बडगाम के एक मटन कारोबारी ने कहा कि पंजाब सरकार की वजह से मटन की भारी कमी पैदा हो गई है. उन्होंने दावा किया कि अगर स्थिति अगले 15 दिनों में नहीं सुधरी तो उन्हें लाखों रुपये का नुकसान उठाना पड़ सकता है. उनका कहना है कि उन्होंने राजस्थान के सप्लायर को भुगतान कर दिया है, लेकिन पिछले एक महीने से उन्हें भेड़ नहीं मिल पा रही है.
- ऑल कश्मीर होलसेल एंड रिटेल मटन डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष खाजिर मोहम्मद रिगू ने पंजाब में लगाई गई कथित 4 प्रतिशत लेवी को 'गुंडा टैक्स' बताया. उनका कहना है कि पशु राजस्थान या दिल्ली से खरीदे जाते हैं. इसलिए पंजाब सरकार द्वारा कोई अतिरिक्त टैक्स लगाने का औचित्य नहीं है.
- इस संकट का असर आम परिवारों पर भी पड़ रहा है. एक शख्स का कहना है कि उनके बेटे की शादी 25 जुलाई को तय है, लेकिन मटन की कमी के कारण वह शादी की दावत को लेकर असमंजस में हैं. उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ी तो शादी को टालने पर भी विचार करना पड़ सकता है.
- मामला सामने आने के बाद जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हस्तक्षेप किया है. उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान से बातचीत कर पशुओं से लदे वाहनों की आवाजाही सुचारू कराने का अनुरोध किया है.
- उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर जाने वाले पशु वाहनों को कथित तौर पर कुछ ठेकेदार समूह रोक रहे हैं और वैध परमिट व दस्तावेज होने के बावजूद उनसे अनधिकृत शुल्क वसूला जा रहा है.
- अब्दुल्ला ने पंजाब सरकार को लिखे पत्र में कहा कि इस तरह की रुकावटों से ट्रांसपोर्टरों को आर्थिक नुकसान हो रहा है और पशु व्यापार प्रभावित हो रहा है. उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामलों के विभाग की एक आंतरिक समिति इस मामले की जांच कर रही है.
- समिति की शुरुआती जानकारी के अनुसार, पशु परिवहन पर कथित रूप से प्रति वाहन बड़ी रकम वसूली जा रही है, जबकि पशुओं की आवाजाही GST से बाहर है. सरकार का कहना है कि इस तरह की अतिरिक्त वसूली से मटन की कीमतों पर भी असर पड़ सकता है.
- सीएम अब्दुल्ला ने मान को याद दिलाया कि पंजाब और जम्मू और कश्मीर के बीच दोस्ती, सहयोग और आर्थिक रूप से एक-दूसरे पर निर्भरता के पुराने रिश्ते हैं. उन्होंने लिखा कि अगर ऐसी कोई भी प्रैक्टिस होती पाई जाती है तो यह सहयोग की उस भावना के खिलाफ है जो पारंपरिक रूप से हमारे बीच रिश्तों की पहचान रही है. इससे ट्रेडिंग कम्युनिटी में चिंता पैदा हुई है.




