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केतन हत्याकांड के 13 दिन में पुलिस के हाथ क्या लगा, सोनम की जमानत जैसा क्यों सता रहा डर? कैफे से लेकर पब तक का देखिए VIDEO

लोनावला केतन अग्रवाल हत्याकांड में पुलिस ने 13 दिन के भीतर कई वैज्ञानिक तकनीकों का इस्तेमाल किया है. केस पूरी तरह परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है और अब अदालत में मजबूत चेन ऑफ एविडेंस बनाने की कोशिश चल रही है.

केतन हत्याकांड के 13 दिन में पुलिस के हाथ क्या लगा, सोनम की जमानत जैसा क्यों सता रहा डर? कैफे से लेकर पब तक का देखिए VIDEO
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पुणे के लोणावाला इलाके में हुए युवा व्यापारी केतन अग्रवाल की संदिग्ध हत्या ने जांच एजेंसियों को एक जटिल केस में उलझा दिया है. न कोई चश्मदीद गवाह, न सीसीटीवी का साफ सबूत. ऐसे में पूरा मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्य और डिजिटल फॉरेंसिक पर टिक गया है. पुलिस ने इस केस में आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी को गिरफ्तार कर क्राइम सीन रीक्रिएशन से लेकर गैट एनालिसिस और पॉलीग्राफ टेस्ट तक कई वैज्ञानिक तरीकों का सहारा लिया है.

इसी के साथ सिया और चेतन की लव स्टोरी के वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहे हैं इसी बीच सिया और चेतन का एक और वीडियो सामने आया है जिसमें वह दोनों गले मिलते हुए नजर आ रहे हैं तो वहीं दूसरे वीडियो में सिया फोन पर बात कर रही है तो एक हाथ में फोन तो दूसरे हाथ में बियर की बोतल ली है जो कि सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

1. लोणावाला फोर्ट पर क्राइम सीन रीक्रिएशन

पुलिस ने दोनों आरोपियों को लोहगढ़ किले ले जाकर पूरे घटनाक्रम को दोहराया. इस दौरान यह समझने की कोशिश की गई कि आरोपी किस रास्ते से आए, पीड़ित केतन किस स्थान पर मौजूद था. घटना कैसे और किस स्थिति में हुई. पूरी प्रक्रिया को वीडियो रिकॉर्डिंग और पुलिस गवाहों की मौजूदगी में दस्तावेज किया गया ताकि अदालत में इसका इस्तेमाल किया जा सके.

2. 25 पुलिसकर्मियों की सुरक्षा में अलग-अलग ले जाए गए आरोपी

जांच के दौरान चेतन चौधरी को सुबह करीब 7 बजे भारी सुरक्षा में फोर्ट ले जाया गया. सिया गोयल को एक दिन पहले उसी जगह ले जाकर पूछताछ की गई. पूरे ऑपरेशन में 25 से अधिक पुलिसकर्मी शामिल रहे ताकि किसी भी तरह की चूक या सुरक्षा जोखिम न हो.

3. गैट एनालिसिस से पहचान की कोशिश: ‘हुडी वाला शख्स’ कौन?

पुलिस इस केस में गैट एनालिसिस का इस्तेमाल कर रही है. इस तकनीक में जांच होती है, चलने का तरीका, शरीर का झुकाव और मूवमेंट. हाइट और स्ट्राइड (कदमों की दूरी) मकसद यह साबित करना है कि CCTV में दिखा हुडी पहने संदिग्ध व्यक्ति वास्तव में चेतन चौधरी ही था या नहीं.

सिया और चेतन का रोमांस वाला वीडियो

4. CCTV और डिजिटल सबूत: हत्या की सबसे कमजोर लेकिन अहम कड़ी हालांकि CCTV में कुछ संदिग्ध मूवमेंट दिखे हैं, लेकिन किसी भी फुटेज में सीधे हत्या नहीं दिखती, कोई प्रत्यक्ष गवाह मौजूद नहीं है. इसलिए पुलिस अब फोकस कर रही है-

  • मोबाइल लोकेशन डेटा
  • कॉल रिकॉर्ड्स
  • डिलीट किए गए मैसेज
  • सर्च हिस्ट्री
  • यही डेटा इस केस की सबसे मजबूत कड़ी (digital chain of evidence) बन सकता है.

5. पॉलीग्राफ टेस्ट की तैयारी: जांच को मिल सकती है नई दिशा

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस ने सिया गोयल का पॉलीग्राफ कराने की तैयारी शुरू कर दी है. हालांकि यह कोर्ट में सीधे सबूत नहीं माना जाता. लेकिन जांच को दिशा देने में मदद करता है. अगर पूछताछ में कोई अहम जानकारी सामने आती है, तो पुलिस डिजिटल फॉरेंसिक के जरिए और गहराई से जांच कर सकती है.

6. ‘पंचशील सिद्धांत’ पर टिका पूरा केस

यह केस सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले Sharad Birdhi Chand Sarda vs State of Maharashtra (1984) के आधार पर आगे बढ़ रहा है.

इसमें 5 जरूरी शर्तें हैं

  1. हर परिस्थिति पूरी तरह साबित हो
  2. सभी तथ्य सिर्फ आरोपी की ओर इशारा करें
  3. सबूत मजबूत और बिना शक के हों
  4. किसी भी दूसरी संभावना को पूरी तरह खारिज किया जाए
  5. पूरी कड़ी एक ही निष्कर्ष तक पहुंचे

7. ‘एक भी लिंक टूटा तो केस कमजोर’:

कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक अगर साक्ष्यों की श्रृंखला में एक भी कड़ी टूटती है तो आरोपी को फायदा मिल सकता है. कानून के अनुसार, अगर 1% भी संदेह बचता है, तो आरोपी को benefit of doubt मिल सकता है.

8. सोनम रघुवंशी केस से सबक: पुलिस क्यों है ज्यादा सतर्क?

पुलिस सूत्रों का कहना है कि हाल ही के कुछ मामलों में तकनीकी या कानूनी चूक के कारण आरोपियों को राहत मिल चुकी है. इसलिए इस केस में हर सबूत को वैज्ञानिक तरीके से जांचा जा रहा है. गिरफ्तारी से लेकर चार्जशीट तक हर स्टेप सावधानी से लिया जा रहा है.

9. हत्या की साजिश या परिस्थितिजन्य ट्रिगर?

पुलिस को शक है कि सिया गोयल शादी नहीं करना चाहती थी. इसी को लेकर तनाव बढ़ा और चेतन चौधरी के साथ मिलकर साजिश की गई हालांकि, यह अभी केवल जांच का हिस्सा है और किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा गया है.

10. अब केस की सबसे बड़ी लड़ाई: कोर्ट में सबूतों की मजबूती

पूरा केस अब इस बात पर टिक गया है कि क्या डिजिटल और फॉरेंसिक सबूत मजबूत चेन बनाते हैं? क्या पुलिस हर कड़ी को बिना टूटे कोर्ट में साबित कर पाती है? यही तय करेगा कि यह केस सजा तक पहुंचता है या संदेह की वजह से कमजोर पड़ता है.

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