NEET-UG 2026: यश यादव और बिवाल के बीच क्या कनेक्शन, किसने पेपर की हार्डकॉपी को PDF में किया कनवर्ट? नया खुलासा
NEET-UG पेपर लीक मामले में अब आए सीबीआई जांच कर रही है. वहीं जांच में आए दिन नए-नए खुलासे और नए-नए आरोपियों के नाम सामने निकलकर आ रहे हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक NEET-UG का पेपर यश यादव के जरिए राजस्थान पहुंचा.
NEET-UG Paper Leaked
NEET-UG 2026 Paper Leaked: देश में दिनों NEET-UG पेपर लीक का मामला गरमाया हुआ है, जब से 3 मई को पेपर लीक हुआ है छात्रों, अभिभावकों और टीचर्स में गुस्सा देखने को मिल रहा है. इसके बाद सिस्टम और NTA पर भी गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं. इस फैसले का असर उन करीब 23 लाख छात्रों पर पड़ा, जिन्होंने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए दिन-रात मेहनत की थी.
पेपर लीक मामले में अब आए सीबीआई जांच कर रही है. वहीं जांच में आए दिन नए-नए खुलासे और नए-नए आरोपियों के नाम सामने निकलकर आ रहे हैं. जांच एजेंसियों के मुताबिक NEET-UG का पेपर यश यादव के जरिए राजस्थान पहुंचा.
यश यादव और बिवाल के बीच क्या कनेक्शन?
सूत्रों के अनुसार, यश यादव की पहचान विकास बिवाल से थी और इसी कनेक्शन के माध्यम से पेपर लीक नेटवर्क सक्रिय हुआ. सीबीआई जांच में यह भी सामने आया है कि विकास बिवाल के पिता दिनेश बिवाल ने पेपर की हार्डकॉपी को स्कैन करके उसे पीडीएफ फाइल में बदला था. आरोप है कि इसके बाद यह लीक पेपर सीकर के कई कोचिंग सेंटरों तक पहुंचाया गया, जहां इसे छात्रों के बीच बांटा गया.
छात्रों से कितने रुपये वसूले गए?
सूत्रों के मुताबिक पूछताछ में कई छात्रों ने स्वीकार किया है कि लीक पेपर के बदले उनसे 2 लाख से 5 लाख रुपये तक लिए गए थे. वहीं जांच एजेंसियों का दावा है कि कुछ मामलों में यह रकम 25 से 30 लाख रुपये तक पहुंच गई थी. एजेंसियों के अनुसार, जयपुर और हरियाणा से जुड़े सिंडिकेट ने NEET पेपर को 10 से 15 लाख रुपये में बेचा. एक ही पेपर को कई छात्रों तक पहुंचाकर इस गिरोह ने करोड़ों रुपये का अवैध नेटवर्क खड़ा कर लिया.
कौन है पेपर लीक नेटवर्क का मास्टरमाइंड?
जांच एजेंसियों के अनुसार, महाराष्ट्र के नासिक निवासी शुभम खैरनर को इस पूरे नेटवर्क का मास्टरमाइंड माना जा रहा है. हालांकि शुभम ने खुद को मास्टरमाइंड मानने से इनकार किया है. सीबीआई ने अब तक शुभम खैरनर को नासिक से, मंगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल को जयपुर से तथा यश यादव को गुरुग्राम से गिरफ्तार किया है. इसके अलावा पुणे से भी एक संदिग्ध को हिरासत में लिया गया है.
CBI ने क्या-क्या किया जब्त?
सीबीआई ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरण जब्त किए हैं. इन सभी डिवाइसेज को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर किस मैसेजिंग ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए साझा किया गया. अधिकारियों के मुताबिक, विभिन्न शहरों में कई अन्य संदिग्धों से पूछताछ जारी है और आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं.




