'1 साल की मेहनत बर्बाद...बना रहे बच्चों का पागल'; NEET एग्जाम रद्द होने पर स्टूडेंट बोले-चीन के Gaokao जैसी हो सिक्योरिटी
NEET UG 2026 परीक्षा पेपर लीक विवाद के बाद रद्द कर दी गई है. ऐसे में छात्रों ने सरकार से चीन के Gaokao जैसी सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करने की मांग की है, ताकि भविष्य में पेपर लीक की घटनाएं रोकी जा सकें.
NEET Paper Leak Controversy: कथित पेपर लीक मामले के बाद National Testing Agency ने NEET UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी है. इस फैसले से लाखों छात्रों और उनके परिवारों को बड़ा झटका लगा है. इस साल करीब 22 लाख से अधिक छात्रों ने परीक्षा दी थी. परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों में नाराजगी और निराशा साफ दिखाई दे रही है. कई छात्रों का कहना है कि सरकार को चीन के Gaokao जैसी सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू करनी चाहिए, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाएं न हों.
सरकार के इस फैसले के बाद स्टेट मिरर ने दो से बातचीत की. छात्रों का कहना है कि एक परीक्षा के पीछे सिर्फ उनकी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की मेहनत और उम्मीदें जुड़ी होती हैं. ऐसे में परीक्षा रद्द होने से मानसिक दबाव और अनिश्चितता दोनों बढ़ गई हैं.
NEET अभ्यर्थियों ने क्या कहा?
नित्या आहूजा नाम की एक छात्रा ने कहा कि केवल NEET की तैयारी ही आसान नहीं होती, बल्कि हर छात्र अलग-अलग विषयों और सिलेबस के साथ पूरे साल मेहनत करता है. उन्होंने कहा, “जब कोई छात्र पूरे साल मेहनत करता है और फिर अचानक परीक्षा रद्द हो जाती है, तो बहुत बुरा लगता है. अगली बार परीक्षा देने पर भी मन में डर रहता है कि पता नहीं पिछली बार से बेहतर होगा या नहीं.”
वहीं समृद्धि नाम की छात्रा ने कहा कि छात्रों की एक साल की मेहनत बर्बाद हो गई है. उन्होंने सरकार से मांग की कि भविष्य में ऐसी मजबूत व्यवस्था बनाई जाए, जिससे पेपर लीक की घटनाएं दोबारा न हों. समृद्धि ने कहा, “इस बार मेरा एग्जाम काफी अच्छा गया था और मुझे उम्मीद थी कि शायद इस बार मेरा चयन हो जाएगा. लेकिन अब परीक्षा रद्द होने के बाद मन में संदेह है कि अगली बार किस तरह का पेपर आएगा और क्या होगा.”
NEET परीक्षा रद्द होने के बाद अब छात्रों और अभिभावकों की नजर सरकार और परीक्षा एजेंसियों के अगले फैसले पर टिकी हुई है.
Gaokao एग्जाम का किया जिक्र?
नित्या आहूजा बातचीत के दौरान कहा कि सरकार को चीन के Gaokao एग्जाम जैसी सिक्योरिटी करनी चाहिए, ताकि पेपर लीक का कोई भी अंदेशा न हो. इसके साथ ही उन्होंने सरकार से गुजारिश की कि एनटीए को हटा देना चाहिए. बता दें, चीन का Gaokao दुनिया की सबसे कठिन और प्रतिस्पर्धी प्रवेश परीक्षाओं में गिना जाता है.
क्या है चीन का Gaokao एग्जाम?
इसका पूरा नाम “National Higher Education Entrance Examination” है. यह परीक्षा हर साल जून में आयोजित होती है और इसके जरिए चीन के विश्वविद्यालयों में दाखिला मिलता है. करोड़ों छात्र कई सालों तक इसकी तैयारी करते हैं, क्योंकि अच्छे अंक आने पर ही देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में एडमिशन मिल पाता है. चीन में इसे छात्रों के करियर और सामाजिक भविष्य से जुड़ी सबसे अहम परीक्षा माना जाता है.
Gaokao आमतौर पर दो से तीन दिनों तक चलती है. इसमें चीनी भाषा, गणित और विदेशी भाषा जैसे विषय अनिवार्य होते हैं, जबकि अन्य विषय छात्र अपने स्ट्रीम के अनुसार चुनते हैं. इस परीक्षा में प्रदर्शन का असर सीधे विश्वविद्यालय और भविष्य की नौकरी के अवसरों पर पड़ता है. कई परिवार अपने बच्चों की तैयारी के लिए वर्षों तक विशेष कोचिंग और सख्त दिनचर्या अपनाते हैं.
कितनी कड़ी होती है सुरक्षा?
इस परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी मानी जाती है. पेपर बनाने से लेकर पेपर होने तक खास सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है. परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक पहचान, फेस रिकग्निशन और मेटल डिटेक्टर जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है. कई जगहों पर छात्रों को इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाने की अनुमति नहीं होती. परीक्षा हॉल में CCTV कैमरों से निगरानी की जाती है और कुछ क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित सिस्टम संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखते हैं.
चीनी सरकार नकल रोकने के लिए रेडियो सिग्नल जैमर और ड्रोन तक का इस्तेमाल करती है, ताकि कोई बाहरी इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस या संचार माध्यम काम न कर सके. परीक्षा के दौरान कई शहरों में ट्रैफिक कंट्रोल किया जाता है, निर्माण कार्य रोके जाते हैं और आसपास शोर कम रखने के निर्देश दिए जाते हैं, ताकि छात्रों को शांत माहौल मिल सके.
पेपर बनाते वक्त किन चीजों का रखा जाता है ख्याल?
Gaokao के प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया चीन में बेहद गोपनीय और नियंत्रित मानी जाती है. चीन के शिक्षा मंत्रालय और प्रांतीय परीक्षा प्राधिकरण मिलकर पेपर तैयार करवाते हैं. प्रश्न बनाने के लिए अनुभवी शिक्षकों, प्रोफेसरों और विषय विशेषज्ञों की टीम चुनी जाती है. इन विशेषज्ञों की पृष्ठभूमि की जांच की जाती है और उन्हें गोपनीयता नियमों का पालन करना अनिवार्य होता है.
सुरक्षा के लिहाज से पेपर सेटिंग प्रक्रिया के दौरान इंटरनेट और दूसरे कम्यूनिकेशन के तरीकों पर बैन रखा जाता है. चीनी मीडिया और सरकारी रिपोर्टों के मुताबिक, प्रश्नपत्र तैयार करने वाले कुछ विशेषज्ञों को सीमित और निगरानी वाले परिसरों में रखा जाता है. वहां मोबाइल फोन, कैमरा और बाहरी नेटवर्क इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं होती. दस्तावेजों को ऑफलाइन सिस्टम पर तैयार किया जाता है, ताकि साइबर लीक का खतरा कम रहे.




