नागपुर में ‘रेडियोएक्टिव साजिश’ की आशंका! RSS मुख्यालय को धमकी- कितना खतरनाक है सीजियम-137, जिसका पत्र में जिक्र?
नागपुर में RSS मुख्यालय को ‘रेडियोएक्टिव’ हमले की धमकी से हड़कंप मच गया. पत्र में सीजियम-137 का जिक्र किया गया है, जानिए यह कितना खतरनाक है और पूरा मामला क्या है.
RSS Office Threat: नागपुर में आरएसएस मुख्यालय और डॉ. हेडगेवार स्मृतिमंदिर को लेकर एक गंभीर धमकी सामने आने के बाद सुरक्षा एजेंसियों में हड़कंप मच गया है. महाल स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के मुख्यालय और रेशीमबाग स्थित स्मृतिमंदिर परिसर में ‘रेडियोएक्टिव’ पदार्थ डालने का दावा एक गुमनाम पत्र में किया गया है.
यह पत्र नागपुर के पुलिस आयुक्त डॉ. रविंद्रकुमार सिंगल को भेजा गया, जिसमें ‘डीएसएस’ नाम के संगठन का जिक्र करते हुए संघ के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का भी इस्तेमाल किया गया है.
धमकी भरे पत्र में क्या है?
जानकारी के मुताबिक, यह पत्र 27 अप्रैल को डाक के जरिए पुलिस आयुक्त कार्यालय पहुंचा. अंग्रेजी में लिखे गए इस पत्र में दावा किया गया है कि दोसरभवन चौक के पास डेटोनेटर रखा गया है. इसके साथ ही आरएसएस मुख्यालय, रेशीमबाग स्मृतिमंदिर और मेट्रो में ‘सीजियम-137’ नाम का रेडियोएक्टिव पाउडर डाले जाने की बात कही गई है. पत्र में इस पदार्थ को बेहद खतरनाक बताते हुए कई स्वयंसेवकों के प्रभावित होने की चेतावनी भी दी गई. जिन स्थानों का जिक्र किया गया, उनमें आरएसएस मुख्यालय, स्मृतिमंदिर, बीजेपी का गणेशपेठ कार्यालय और मेट्रो स्टेशन शामिल हैं.
क्या एक्शन लिया गया?
इस सूचना के बाद एटीएस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए एनडीआरएफ और परमाणु विशेषज्ञों की मदद से सभी संदिग्ध जगहों पर जांच की, लेकिन अब तक कहीं भी कोई संदिग्ध सामग्री नहीं मिली है. इसके बावजूद मामले को गंभीरता से लेते हुए एटीएस की शिकायत पर संबंधित पुलिस थाने में केस दर्ज कर लिया गया है और जांच जारी है कि यह किसी की शरारत है या कोई बड़ी साजिश.
इस पूरे मामले में एक और बात सामने आई है कि कुछ दिन पहले दोसरभवन मेट्रो स्टेशन के पीछे डॉ. उज्ज्वल लांजेवार के घर के सामने खाली जगह से डेटोनेटर और जिलेटिन की छड़ें बरामद हुई थीं. गुमनाम पत्र में दावा किया गया है कि ये विस्फोटक भी उसी संगठन ने रखे थे और यह सिर्फ एक चेतावनी थी, जबकि असली खेल अभी शुरू होना बाकी है.
क्या है सीजियम 137 और कितना खतरनाक है?
जहां तक ‘सीजियम-137’ का सवाल है, यह एक अत्यधिक रेडियोधर्मी और ह्यूमन मेड तत्व है, जो न्यूक्लियर फिशन के दौरान बनता है, जैसे परमाणु हथियार परीक्षण या रिएक्टर दुर्घटनाओं में. इसकी आधी उम्र लगभग 30 साल होती है, यानी यह लंबे समय तक सक्रिय रहता है. यह बीटा और गामा रेडिएशन छोड़ता है, जो इंसानों के लिए बेहद खतरनाक होता है.
हाई लेवल के संपर्क में आने पर यह त्वचा पर जलन, गंभीर रेडिएशन बीमारी और आंतरिक रूप से शरीर में जाने पर घातक असर डाल सकता है. यह पानी में आसानी से घुल जाता है, जिससे शरीर और पर्यावरण में तेजी से फैल सकता है. यहां तक कि कम मात्रा में संपर्क भी लंबे समय में कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है, जबकि अधिक मात्रा में यह शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है.
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि यह धमकी वास्तविक है या किसी की साजिशन अफवाह फैलाने की कोशिश.




