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'मुंबई की राजनीति में कुछ भी हो सकता है', BMC Mayor पर संजय राउत का बड़ा दावा; क्या महायुति का खेल बिगाड़ेगी उद्धव की शिवसेना?

बीएमसी चुनाव नतीजों के बाद मुंबई मेयर पद को लेकर महायुति और उद्धव ठाकरे गुट के बीच सियासी घमासान तेज हो गया है. बीजेपी और शिंदे शिवसेना के पास 118 पार्षदों के साथ स्पष्ट बहुमत है, जबकि उद्धव गुट सहयोगियों के साथ 108 का दावा कर रहा है. एकनाथ शिंदे का कहना है कि बालासाहेब ठाकरे की जन्मशती वर्ष में शिवसेना का मेयर बनना सच्ची श्रद्धांजलि होगी. वहीं संजय राउत ने 'वेट एंड वॉच' कहकर मुकाबले को खुला बताया है.

मुंबई की राजनीति में कुछ भी हो सकता है, BMC Mayor पर संजय राउत का बड़ा दावा; क्या महायुति का खेल बिगाड़ेगी उद्धव की शिवसेना?
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( Image Source:  Sora_ AI )

Mumbai Mayor race: मुंबई महानगरपालिका (BMC) के चुनाव नतीजों के बाद महाराष्ट्र की सियासत एक बार फिर उबाल पर है. देश की सबसे अमीर नगर निगम के मेयर पद को लेकर महायुति (BJP + शिंदे शिवसेना) और उद्धव ठाकरे गुट (शिवसेना-UBT) आमने-सामने हैं. सवाल सिर्फ सत्ता का नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतीकवाद, बालासाहेब ठाकरे की विरासत और मुंबई पर पकड़ का है.

संख्या का खेल: किसके पास कितनी ताकत?

  • BMC में कुल वार्ड: 227
  • बहुमत का आंकड़ा: 114

महायुति (BJP + शिंदे शिवसेना)

  • BJP: 89
  • शिवसेना (शिंदे): 29
  • कुल: 118 (स्पष्ट बहुमत)

शिवसेना (UBT) + सहयोगी (दावा)

  • UBT: 65
  • MNS: 6
  • कांग्रेस + VBA: 24
  • AIMIM: 8
  • SP: 2
  • NCP (अजित गुट): 3
  • NCP (शरद गुट): 1

संजय राउत का दावा है कि उनके पास 108 सीटें हैं. यानी बहुमत से 6 कम. यहीं से विवाद शुरू होता है.

शिंदे बोले- बालासाहेब की जन्मशती में हो शिवसेना का मेयर

उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे का कहना है कि 23 जनवरी से बालासाहेब ठाकरे का जन्मशती वर्ष शुरू हो रहा है. शिवसैनिकों की भावना है कि शिवसेना का मेयर बनना ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी. शिंदे ने कहा कि जहां-जहां महायुति ने साथ चुनाव लड़ा है, वहां मेयर भी महायुति का ही होगा. उन्होंने उद्धव ठाकरे गुट से किसी नए राजनीतिक समीकरण की संभावना को सिरे से खारिज कर दिया. राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि शिंदे पहले ढाई साल के लिए मेयर पद चाहते हैं. हालांकि, अंतिम फैसला BJP के साथ सहमति से होगा.

पार्षद होटल में क्यों? ‘वर्कशॉप’ या ‘डर’?

BMC नतीजों के बाद शिंदे गुट के 29 पार्षदों को लग्ज़री होटल में शिफ्ट किया गया. शिंदे गुट का तर्क है कि यह सिर्फ ओरिएंटेशन वर्कशॉप है. पार्षदों को नगर निगम की प्रक्रिया और नियम समझाए जा रहे हैं. इसके साथ ही, उन्हें हॉर्स ट्रेडिंग से बचाया जा रहा है. वहीं, उद्धव गुट का आरोप है कि पार्षदों को BJP के डर से छिपाया गया है. शिंदे को अपने ही लोगों के टूटने का डर है. लोगों को होटल में बंद किया जा सकता है, दिमाग नहीं.

संजय राउत का ‘Wait & Watch’ फॉर्मूला

संजय राउत का दावा है कि मुकाबला उतना आसान नहीं है, जितना दिखता है. यह 118 बनाम 108 की लड़ाई है. सिर्फ 6 सीटों की कमी है. उन्होंने कहा कि मुंबई की राजनीति में कुछ भी हो सकता है. कई पार्षद BJP का मेयर नहीं चाहते.

संजय निरुपम का पलटवार

शिवसेना (शिंदे) नेता संजय निरुपम ने साफ कहा कि मुंबई का अगला मेयर महायुति से ही होगा. UBT के 27 साल के भ्रष्टाचार को जनता ने नकार दिया. उन्होंने कहा कि मेयर चुनने के लिए विपक्ष के वोटों की जरूरत नहीं. मेयर चुनाव से पहले आरक्षण की लॉटरी प्रक्रिया पूरी होनी जरूरी है.

आंकड़ों में बढ़त महायुति के पास है, लेकिन उद्धव गुट राजनीतिक चमत्कार की उम्मीद में है. मेयर पद का फैसला आरक्षण, अंदरूनी सहमति और अंतिम वोटिंग पर टिका है. फिलहाल साफ है कि मुंबई की मेयर कुर्सी सिर्फ प्रशासनिक पद नहीं, महाराष्ट्र की सियासत की सबसे बड़ी ट्रॉफी बन चुकी है. BMC का बजट ₹74,000 करोड़ से ज्यादा का आता है.

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