Begin typing your search...

Modi Era में क्यों बढ़ रही है सूबाई नेताओं की ताकत? योगी, सम्राट, शुभेंदु और डीके क्या 2029 की लड़ाई के नए चेहरे हैं?

मोदी युग में योगी, सम्राट, शुभेंदु और डीके जैसे क्षेत्रीय नेताओं का कद बढ़ रहा है. क्या यही चेहरे 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टियों की सबसे बड़ी ताकत बनेंगे?

Modi Era में क्यों बढ़ रही है सूबाई नेताओं की ताकत? योगी, सम्राट, शुभेंदु और डीके क्या 2029 की लड़ाई के नए चेहरे हैं?
X

भारतीय राजनीति में पिछले एक दशक से ज्यादा समय को 'मोदी युग' के रूप में देखा जाता है, जहां राष्ट्रीय स्तर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की धमक और बीजेपी का संगठनात्मक विस्तार सबसे बड़ा राजनीतिक कारक रहा है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि इसी दौर में बीजेपी और कांग्रेस दोनों के भीतर कुछ क्षेत्रीय नेताओं (सूबाई नेता) की ताकत भी तेजी से बढ़ी है. यह पहले के क्षेत्रीय दलों जैसे आरजेडी, सपा, बीएसपी, टीएमसी, एसएडी, एनसीपी, डीएमके, एआईएडीएमके, बीजेडी व अन्य के उभार की कहानी नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय दलों के भीतर ऐसे नेताओं के उभरने की कहानी है जो अपने-अपने राज्यों में चुनावी चेहरा, सोशल इक्वेशंस और संगठनात्मक ताकत रखते हैं.

क्यों बढ़ रही है क्षेत्रीय क्षत्रपों की ताकत?

दरअसल, मोदी युग में चुनाव पहले से अलग अब प्रेजिडेंशियल स्टाइल (Presidential Style) के हो गए हैं, लेकिन राज्यों के चुनाव अभी भी स्थानीय नेतृत्व, जातीय समीकरण और क्षेत्रीय मुद्दों से प्रभावित होते हैं. बीजेपी का विस्तार उन राज्यों में हो रहा है जहां मजबूत स्थानीय चेहरों की जरूरत है. दूसरी ओर कांग्रेस भी उन राज्यों में स्थानीय नेताओं पर निर्भर है, जहां उसका केंद्रीय नेतृत्व अकेले चुनावी जीत की गारंटी नहीं दे सकता. यही कारण है कि राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ-साथ मजबूत क्षेत्रीय क्षत्रपों (Provincial Leaders) की भूमिका बढ़ रही है.

2029 के लोकसभा चुनाव और उससे पहले होने वाले विधानसभा चुनावों में बीजेपी और कांग्रेस दोनों को ऐसे नेताओं की जरूरत होगी जो अपने-अपने राज्यों में सीटों का बड़ा योगदान दे सकें. जानें ऐसे नेता कौन?

योगी : हिंदुत्व और एडमिनिस्ट्रेटिव कंट्रोल का लाजवाब चेहरा

यूपी के गोरखनाथ मठ के पीठाधीश और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भाजपा के सबसे प्रभावशाली क्षेत्रीय नेताओं में गिने जाते हैं. देश की सबसे अधिक लोकसभा सीटों वाले राज्य उत्तर प्रदेश में उनकी पकड़ भाजपा की चुनावी रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है. योगी ने कानून-व्यवस्था, एंटी रोमियो, बुनियादी ढांचे, बुल्डोजर राष्ट्रवाद और हिंदुत्व की राजनीति को साथ जोड़कर अपना अलग राजनीतिक आधार तैयार किया है.

गोरखनाथ मठ की सामाजिक-धार्मिक विरासत और मुख्यमंत्री के रूप में लगातार सक्रिय प्रशासनिक शैली ने उन्हें राज्य के भीतर एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान दी है. बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 में मजबूत प्रदर्शन 2029 की राह तय करेगा और ऐसे में योगी की भूमिका केवल मुख्यमंत्री तक सीमित नहीं रहेगी. पार्टी के भीतर भी उन्हें बड़े जनाधार वाले नेताओं में गिना जाता है, जिनकी लोकप्रियता राज्य की सीमाओं से बाहर भी दिखाई देती है.

सम्राट चौधरी: सोशल इंजीनियरिंग का नायाब चेहरा

बिहार भाजपा के प्रदेश नेतृत्व में सम्राट चौधरी का महत्व लगातार बढ़ा है. पिछड़े वर्गों, विशेषकर कुशवाहा समुदाय में उनकी पकड़ प्रदेश में बीजेपी की सामाजिक विस्तार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा मानी जाती है. बिहार की राजनीति लंबे समय से जातीय समीकरणों पर आधारित रही है और बीजेपी को यहां मजबूत स्थानीय नेतृत्व की आवश्यकता रहती है.

सम्राट चौधरी ने बीजेपी के संगठन को गांव और जिला स्तर तक मजबूत करने की कोशिश की है. नीतीश कुमार, तेजस्वी यादव और लालू परिवार के प्रभाव वाले राज्य में बीजेपी को अपनी स्वतंत्र सामाजिक पहचान बनाने के लिए ऐसे चेहरे की जरूरत है जो विभिन्न पिछड़े वर्गों को जोड़ सके. आगामी विधानसभा चुनावों में उनका प्रदर्शन बिहार में बीजेपी की स्थिति को काफी हद तक प्रभावित कर सकता है.

शुभेंदु अधिकारी: बंगाल में भगवा पार्टी की सबसे बड़ी उम्मीद

पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी बीजेपी के सबसे मजबूत क्षेत्रीय चेहरों में उभरे हैं. कभी तृणमूल कांग्रेस के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे शुभेंदु ने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराकर अपनी राजनीतिक क्षमता साबित की थी. बंगाल की राजनीति को करीब से समझने और स्थानीय संगठन पर पकड़ होने के कारण बीजेपी उन्हें राज्य में सत्ता परिवर्तन की संभावनाओं का प्रमुख चेहरा मानती है.

विधानसभा में विपक्ष के नेता के रूप में शुभेंदु लगातार राज्य सरकार को घेरते रहे हैं. बंगाल में बीजेपी का भविष्य काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि वह ममता बनर्जी के मुकाबले कितना मजबूत स्थानीय नेतृत्व खड़ा कर पाती है. ऐसे में शुभेंदु की भूमिका 2026 विधानसभा चुनाव और उसके बाद 2029 लोकसभा चुनाव तक बेहद महत्वपूर्ण रहने वाली है.

डी.के. शिवकुमार: कांग्रेस के सबसे बड़े 'क्राइसिस मैनेजर'

कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार कांग्रेस के उन नेताओं में शामिल हैं, जिन्होंने संगठन और संसाधन प्रबंधन दोनों में अपनी क्षमता साबित की है. कर्नाटक कांग्रेस की सत्ता वापसी में उनकी भूमिका को पार्टी के भीतर व्यापक स्वीकार्यता मिली है. राज्य के वोक्कालिगा समुदाय में प्रभाव और संगठन पर मजबूत पकड़ उन्हें कांग्रेस का प्रमुख क्षेत्रीय क्षत्रप बनाती है.

कांग्रेस के लिए दक्षिण भारत में कर्नाटक सबसे महत्वपूर्ण राज्य है. ऐसे में डीके शिवकुमार की राजनीतिक ताकत केवल राज्य तक सीमित नहीं है. पार्टी नेतृत्व भी उन्हें भविष्य के बड़े राष्ट्रीय नेताओं में देखता है. यदि कांग्रेस को 2029 में बीजेपी को चुनौती देनी है तो कर्नाटक में मजबूत प्रदर्शन आवश्यक होगा और इसमें डीके की भूमिका निर्णायक मानी जाएगी. इस मामले में अब तमिलनाडु में टीवीके भी कांग्रेस के लिए सहयोगी साबित हो सकते हैं.

2029 और विधानसभा चुनावों पर कितना होगा असर?

आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति और क्षेत्रीय नेतृत्व का मेल और मजबूत होने की संभावना है. बीजेपी के लिए उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में योगी, सम्राट और शुभेंदु जैसे नेता सीटों का आधार बढ़ाने में महत्वपूर्ण होंगे. वहीं, कांग्रेस के लिए कर्नाटक में डीके शिवकुमार जैसे नेता पार्टी की राष्ट्रीय रणनीति को मजबूती दे सकते हैं.

2029 का चुनाव केवल मोदी बनाम विपक्ष नहीं होगा, बल्कि यह भी देखा जाएगा कि राष्ट्रीय दल अपने-अपने राज्यों में कितने मजबूत क्षेत्रीय चेहरों के साथ मैदान में उतरते हैं. यही क्षेत्रीय क्षत्रप कई राज्यों में चुनावी नैया पार लगाने वाले सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक स्तंभ साबित हो सकते हैं.

Politicsनरेंद्र मोदीयोगी आदित्‍यनाथशुभेंदु अधिकारीसम्राट चौधरी
अगला लेख