कौन थे मुहम्मद अली जौहर, जिनके नाम पर आजम खान ने बनाई थी यूनिवर्सिटी? अब योगी की चलेगी बुलडोजर
मुहम्मद अली जौहर का इतिहास, आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी का सपना, दूसरा एएमयू बनाने की सोच, 38 इमारतों पर कार्रवाई और बुलडोजर विवाद की पूरी कहानी पढ़ें.
रामपुर की सरजमीं पर खड़ी एक भव्य यूनिवर्सिटी आज सिर्फ शिक्षा का केंद्र नहीं, बल्कि सियासत, सपनों और विवादों की सबसे बड़ी कहानी बन चुकी है. जिस संस्थान को समाजवादी पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान अपनी सबसे बड़ी विरासत मानते थे, वही आज बुल्डोजर कार्रवाई और कानूनी लड़ाई के केंद्र में है. यह सिर्फ ईंट-पत्थरों से बना परिसर नहीं, बल्कि उस महत्वाकांक्षा का प्रतीक है, जिसके जरिए आजम खान रामपुर को शिक्षा के राष्ट्रीय नक्शे पर स्थापित करना चाहते थे. सवाल यह है कि आखिर मोहम्मद अली जौहर कौन थे, जिनके नाम पर यह विश्वविद्यालय बना? आजम खान का सपना क्या था, यह संस्थान विवादों में कैसे घिरा और अब आखिर क्यों इस पर बुल्डोजर की तलवार लटक रही है?
यूपी के रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी एक बार फिर सुर्खियों में है. उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय परिसर में बने कई भवनों को अवैध निर्माण बताते हुए कार्रवाई की प्रक्रिया तेज कर दी है. प्रशासन का दावा है कि परिसर में करीब 38 इमारतें नियमों के अनुरूप नहीं बनी हैं. साथ ही विश्वविद्यालय परिसर से गुजरने वाली पीडब्ल्यूडी सड़क को सार्वजनिक सड़क घोषित कर दिया गया है.
कौन थे मोहम्मद अली जौहर, जिनके नाम पर बना विश्वविद्यालय?
मोहम्मद अली जौहर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के प्रमुख नेताओं में गिने जाते हैं. उनका जन्म 1878 में रामपुर रियासत में हुआ था. वे पत्रकार, शिक्षाविद, लेखक और प्रभावशाली वक्ता थे. उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और अंग्रेजी अखबार The Comrade तथा उर्दू अखबार Hamdard की स्थापना की. वे खिलाफत आंदोलन के सबसे बड़े नेताओं में शामिल रहे और महात्मा गांधी के साथ असहयोग आंदोलन में भी सक्रिय भूमिका निभाई. वर्ष 1931 में लंदन में उनका निधन हुआ और उनकी इच्छा के अनुसार उन्हें यरुशलम में दफनाया गया.
आजम खान का सपना था दूसरा 'AMU' तैयार करना?
यूनिवर्सिटी के उद्धाटन के मौके पर आजम खान ने अपनी भावनाओं का इजहार करते हुए कहा था कि मेरा सपना केवल एक विश्वविद्यालय बनाना नहीं, बल्कि रामपुर को शिक्षा का बड़ा केंद्र बनाना है. मेरी सोच इस संस्थान को अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की तर्ज पर विकसित करने की है. मेडिकल कॉलेज, इंजीनियरिंग कॉलेज, लॉ कॉलेज, हॉस्टल, विशाल लाइब्रेरी, खेल परिसर और रिसर्च सेंटर जैसी सुविधाओं के जरिए इसे राष्ट्रीय स्तर का आवासीय विश्वविद्यालय बनाने की योजना आजम ने तैयार की थी.
आजम खान का दावा था कि यह विश्वविद्यालय उन छात्रों के लिए होगा, जिन्हें बेहतर शिक्षा के अवसर नहीं मिल पाते. खासतौर पर गरीब, ग्रामीण और पिछड़े वर्ग के विद्यार्थियों को आधुनिक शिक्षा उपलब्ध कराना इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य बताया गया. इसी सोच के चलते विश्वविद्यालय का नाम स्वतंत्रता सेनानी मोहम्मद अली जौहर के नाम पर रखा गया.
सपनों से शुरू हुई, विवादों में कैसे घिर गई?
जौहर विश्वविद्यालय के निर्माण के साथ ही विवाद भी शुरू हो गए. किसानों की जमीन अधिग्रहण, सरकारी भूमि पर कब्जे, राजस्व रिकॉर्ड में गड़बड़ी, फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल और सरकारी संपत्ति के दुरुपयोग जैसे आरोप लगते रहे. इन्हीं मामलों में आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए और लंबे समय तक कानूनी कार्रवाई चलती रही.
38 इमारतें बुल्डोजर के निशाने पर क्यों?
ताजा विवाद विश्वविद्यालय परिसर में बने करीब 38 भवनों को लेकर है. प्रशासन का कहना है कि इन इमारतों का निर्माण स्वीकृत मानकों और नक्शों के अनुरूप नहीं हुआ. इसके अलावा परिसर के भीतर से गुजरने वाली लगभग तीन किलोमीटर लंबी पीडब्ल्यूडी सड़क को सार्वजनिक सड़क घोषित किया गया है, जिससे प्रशासनिक कार्रवाई और तेज हो गई है.
क्या चलेगा बुल्डोजर या होगी कानूनी कार्रवाई?
योगी सरकार का कहना है कि यदि कोई निर्माण अवैध पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होगी. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि बिना नोटिस, सुनवाई और निर्धारित कानूनी प्रक्रिया पूरी किए किसी भी संपत्ति पर बुल्डोजर नहीं चलाया जा सकता. इसलिए किसी भी ध्वस्तीकरण से पहले प्रशासन को सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी.
शिक्षा का मंदिर या सियासी विवाद?
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी आज भी उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित शैक्षणिक परियोजनाओं में गिनी जाती है. एक ओर इसे आजम खान के शिक्षा मिशन का प्रतीक माना जाता है, तो दूसरी ओर भूमि विवाद और निर्माण संबंधी मामलों ने इसे लगातार कानूनी और राजनीतिक विवादों के केंद्र में रखा है. अब अवैध निर्माण को लेकर प्रस्तावित सरकारी कार्रवाई ने इस बहुचर्चित विश्वविद्यालय को एक बार फिर राष्ट्रीय बहस का विषय बना दिया है.
इसे समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान ने 2006 में स्थापित किया था. यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा मान्यता प्राप्त एक निजी अल्पसंख्यक विश्वविद्यालय है. रामपुर विकास प्राधिकरण ने विश्वविद्यालय के भवनों के निर्माण को अवैध घोषित करते हुए इमारतों को गिराए जाने का आदेश दिया है.
आजम खान के ड्रीम प्रोजेक्ट की इनसाइड स्टोरी क्या?
मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को केवल एक निजी विश्वविद्यालय कहना इसकी पूरी कहानी नहीं बताता. यह आजम खान की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है. जीवन में कई बड़े पदों पर रहने के बावजूद आजम खान अक्सर कहते रहे कि यदि उनकी कोई स्थायी विरासत होगी, तो वह जौहर यूनिवर्सिटी होगी. यही वजह है कि इसे उनका "ड्रीम प्रोजेक्ट" कहा जाता है.
दरअसल, 2004 के आसपास आजम खान ने रामपुर में एक सरकारी उर्दू विश्वविद्यालय स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था. उनका उद्देश्य उत्तर प्रदेश में अल्पसंख्यकों और उर्दू शिक्षा के लिए एक बड़ा संस्थान बनाना था. लेकिन तत्कालीन राजनीतिक और प्रशासनिक मतभेदों के कारण यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी.
इसके बाद उन्होंने मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के माध्यम से निजी विश्वविद्यालय स्थापित करने का फैसला किया. वर्ष 2006 में इसकी नींव रखी गई और 2012 में इसे पूर्ण निजी विश्वविद्यालय के रूप में संचालन की मंजूरी मिली. आजम खान चाहते थे कि रामपुर की पहचान केवल नवाबों की रियासत या राजनीतिक शहर के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा के बड़े केंद्र के रूप में बने.
'दूसरा एएमयू' बनाने की चर्चा क्यों थी?
आजम खान ने सार्वजनिक तौर पर भले ही इसे "दूसरा अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय" नहीं कहा, लेकिन समाजवादी पार्टी के नेताओं और उद्घाटन समारोह के दौरान दिए गए भाषणों में इस विश्वविद्यालय की तुलना एएमयू से की गई. उद्घाटन के समय तत्कालीन सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव ने भी कहा था कि अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के बाद रामपुर को अब मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के लिए जाना जाएगा. यही कारण है कि इसे अक्सर एएमयू की तर्ज पर विकसित करने की महत्वाकांक्षी परियोजना माना गया.
रामपुर के नवाब का इमोशनल कनेक्शन क्या?
जौहर यूनिवर्सिटी केवल राजनीतिक परियोजना नहीं थी. आजम खान इसके संस्थापक, मोहम्मद अली जौहर ट्रस्ट के प्रमुख और विश्वविद्यालय के आजीवन चांसलर भी रहे. वे अक्सर परिसर के विकास कार्यों की निगरानी करते थे और सार्वजनिक मंचों पर इसे अपनी सबसे बड़ी उपलब्धि बताते थे. यही कारण है कि जब विश्वविद्यालय पर कानूनी कार्रवाई शुरू हुई तो उन्होंने इसे केवल संपत्ति का नहीं, बल्कि अपने जीवन के सबसे बड़े सपने पर हमला बताया.
दरअसल, 2017 के बाद विश्वविद्यालय से जुड़े भूमि अधिग्रहण, सरकारी जमीन, लीज, सार्वजनिक सड़क और निर्माण संबंधी कई मामले सामने आए. उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय की कुछ लीज रद्द कीं, जिन पर कानूनी लड़ाई इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक पहुंची. हाल के घटनाक्रम में रामपुर विकास प्राधिकरण ने 38 भवनों को बिना स्वीकृत नक्शे के निर्मित बताते हुए उनके खिलाफ ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की है. प्रशासन का दावा है कि केवल मेडिकल कॉलेज और एक अकादमिक ब्लॉक के नक्शे ही स्वीकृत पाए गए हैं.




