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केरल कांग्रेस में ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ पर संग्राम, क्या राहुल गांधी का धैर्य टूट रहा है? 5 बड़ी वजह

केरल कांग्रेस में CM चेहरे को लेकर सतीशान, वेणुगोपाल और चेन्निथला के बीच घमासान तेज. गुटबाजी से राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान की चिंता बढ़ी.

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केरल विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत के बाद, अब सबसे बड़ा सवाल मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर खड़ा हो गया है. चुनाव परिणाम आने के छह दिन बाद भी पार्टी अभी तक अपने सीएम के नाम पर सहमति नहीं बना पाई है. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के भीतर जारी खींचतान ने आलाकमान की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे (Mallikarjun Kharge) के आवास पर हुई तीन घंटे लंबी बैठक के बावजूद कांग्रेस किसी एक नाम पर सहमत नहीं हो पाई.

जबकि, बैठक में राहुल गांधी, वीडी सतीशन, केसी वेणुगोपाल और रमेश चेन्निथला शामिल रहे. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि सड़कों पर खुलकर सामने आई गुटबाजी से कांग्रेस नेता राहुल गांधी बेहद नाराज बताए जा रहे हैं.

1. क्या सड़कों पर शक्ति प्रदर्शन से नाराज हुए राहुल गांधी?

कांग्रेस आलाकमान की सबसे बड़ी चिंता यह रही कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ अब बंद कमरों से निकलकर सड़कों तक पहुंच गई. तीनों दावेदारों के समर्थकों ने जगह-जगह फ्लेक्स बोर्ड, बैनर और प्रदर्शन शुरू कर दिए. राहुल गांधी ने इसे पार्टी की छवि के खिलाफ माना.

सूत्रों के मुताबिक उन्होंने साफ कहा कि इतनी बड़ी जीत के बाद इस तरह की दबाव की राजनीति जनता के जनादेश का अपमान है. यही वजह रही कि बैठक के बाद तीनों नेताओं यानी सतीशान, वेणुगोपाल और चेन्निथला को संयुक्त बयान जारी कर अपने समर्थकों से विरोध प्रदर्शन रोकने की अपील करनी पड़ी. राज्य कांग्रेस अध्यक्ष Sunny Joseph भी इस अपील में शामिल रहे.

2. क्या कांग्रेस के भीतर तीन बड़े पावर सेंटर बन गए हैं?

केरल कांग्रेस में इस समय तीन अलग-अलग शक्ति केंद्र साफ दिखाई दे रहे हैं. के.सी. वेणुगोपाल ने दावा किया कि कांग्रेस विधायक दल यानी CLP में उन्हें बहुमत का समर्थन हासिल है और 63 में से 40 से अधिक विधायक उनके साथ हैं. दूसरी ओर रमेश चेन्निथला ने अपनी वरिष्ठता को सबसे बड़ा आधार बताया. वहीं वी.डी. सतीशान ने दावा किया कि जनता की भावना और UDF सहयोगी दल उनके पक्ष में हैं. खबरों के मुताबिक सतीशन ने आलाकमान से साफ कहा कि अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया गया तो वे कोई अन्य पद स्वीकार नहीं करेंगे. इन दावों ने कांग्रेस नेतृत्व की मुश्किल और बढ़ा दी है.

3. क्या वेणुगोपाल बनाम सतीशन की लड़ाई सबसे बड़ी वजह है?

कांग्रेस के भीतर असली मुकाबला फिलहाल वेणुगोपाल और सतीशन के बीच माना जा रहा है. सूत्रों के अनुसार ज्यादातर विधायक वेणुगोपाल के पक्ष में दिखाई दे रहे हैं, लेकिन जनता के बीच सतीशन की छवि ज्यादा मजबूत मानी जा रही है. पिछले पांच सालों में विपक्ष के नेता के तौर पर उन्होंने पिनराई विजयन सरकार के खिलाफ आक्रामक भूमिका निभाई और UDF के चुनाव अभियान का चेहरा बने रहे. यही कारण है कि पार्टी के भीतर संगठन और जनाधार के बीच संतुलन बनाना कांग्रेस आलाकमान के लिए चुनौती बन गया है.

4. क्या हाईकमान के सामने संतुलन साधने की सबसे बड़ी चुनौती है?

केरल का सीएम चुनने को लेकर बैठक में कांग्रेस की केरल प्रभारी दीपा दास मुंशी, AICC पर्यवेक्षक अजय माकन, और मुकुल वासनिक भी मौजूद रहे. दीपा दासमुंशी ने कहा कि अंतिम फैसला 'बहुत जल्द' और “सही समय” पर लिया जाएगा. लेकिन अंदरखाने पार्टी इस बात को लेकर चिंतित है कि किसी एक नेता को चुनने से दूसरा गुट नाराज हो सकता है. यही वजह है कि आलाकमान जल्दबाजी से बचना चाहता है.

5. क्या कांग्रेस की जीत पर भारी पड़ रही है अंदरूनी गुटबाजी?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केरल में मिली बड़ी जीत के बावजूद कांग्रेस इस समय अपनी ही आंतरिक राजनीति में उलझती दिखाई दे रही है. राहुल गांधी और खरगे की चिंता यही है कि सरकार गठन से पहले ही पार्टी में शक्ति प्रदर्शन शुरू हो गया. तीनों नेता अब केरल लौट चुके हैं, जिससे संकेत मिल रहे हैं कि बातचीत का पहला दौर पूरा हो चुका है. लेकिन सबसे बड़ा सवाल अभी भी कायम है - आखिर कांग्रेस में मुख्यमंत्री कौन बनेगा और क्या यह खींचतान पार्टी की नई सरकार की शुरुआत पर असर डालेगी?

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